माइग्रेन के लिए घेरेलू रामबाण उपाय

माइग्रेन सिर का एक ऐसा दर्द होता है जो मस्तिष्क के तंत्रिका तंत्र के विकार के कारण होता है।
असल में माइग्रेन सिर में बार-बार होने वाला एक ऐसा दर्द है, जो खासकर सिर के आधे हिस्से को ही प्रभावित करता है। माइग्रेन होने पर मतली, उल्टी और प्रकाश तथा तेज आवाज के  प्रति संवेदनशीलता के कारण  सिर दर्द को एकदम से बढ जाता है। कई बार  यह दर्द कुछ घंटों से लेकर दो-तीन दिनों तक भी हो सकता है।
माइग्रेन को जेंटिक भी माना जाता है।
आयुर्वेद के मुताबिक हमारी डाइट और लाइफस्टाइल की वजह से भी वात ,कफ ,और पित्त में बदलाव आने पर  इस तरह की बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं ।
अगर आप को लंबे समय तक सिरदर्द चलता रहे तो सीटी स्कैन जरूर करवायें तभी असली कारण पता चल सकता है।

माइग्रेन के लक्षण....
आमतौर पर हम सबको कभी ना कभी सिर दर्द की शिकायत होती रहती है। इसे कैसे पहचाना जाए कि यह माइग्रेन है या साधारण सिर दर्द है। माइग्रेन से होने वाले दर्द के कारण मरीज को रुक रुक कर रंग बिरंगी रोशनी दिखाई देती है और सिर एक हिस्से में चुभन जैसी पीड़ा  महसूस होती है। ज्यादातर सिर के एक हिस्से में ही दर्द होता है।
अगर ऐसे ल्क्षण दिखाई दे तो यह माइग्रेन हो सकता है ।इसमें उल्टी आना और एसिड बनना जैसे कहीं लक्षण नजर आते हैं ।
माइग्रेन का दर्द इतना भयंकर होता है लगता है जैसे कोई सिर में है हथोड़े मार रहा हो । इस दर्द को लोग आधासीसी दर्द भी कहते हैं।

माइग्रेन का घरेलू उपचार ...

इस दर्द के लिए एलोपैथिक में बहुत कम ही इलाज संभव है ।इस दर्द को जड़ से खत्म करना चाहते हैं तो इसके लिए आयुर्वेदिक देसी फार्मूले अपनाएं जो सिर दर्द के लिए बहुत ही कारगर सिद्ध होगा ।

एक मिट्टी का बर्तन ले ले उसमें 10 बदाम गिरी और 7,8 काली मिर्च, सात,आठ किसमिश और एक चम्मच भूरी मिर्च थोड़ी सी मुनक्का और बहुत छोटा टुकड़ा सोंठ का इन सब को रात को मिट्टी के बर्तन में भिगो कर रख दें।

और सुबह होने पर इन सारी चीजों को सिल बट्टे में पीस लें और याद रखें कभी भी इन चीजों को मिक्सी में ना पीसे  इनका रिजल्ट तभी मिलेगा जब आप सिर्फ सिल बटटे से पीसते हो। मिक्सी में पीसने से गर्म होने के बाद इनका रिजल्ट आने का बहुत कम चांस है ।इस सारे मिश्रण को पीसने के बाद एक चम्मच देसी घी गाय का लेकर बर्तन में हल्का गर्म कर लें और ऊपर से सारा पिसा हुआ मिश्रण उसमें छोड़ दें ,और एक कप  दूध भी छोड़ दे, और उसमें थोड़ी सी देसी खांड मिला लें और इस घोल को थोड़ा सा ठंडा होने के बाद पीले। ऐसा आपको लगातार एक महीना करना है । किसी भी प्रकार का माइग्रेन हो जड से खत्म हो जाएगा। बस शर्त यह है कि आपको इसको हर रोज लगातार  एक महीना करना है।
यह प्रयोग अनुभव किया हुआ प्रयोग है ।


अश्वगंधा:------
एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो कि कई स्वास्थ्य विकारों के इलाज के लिए फायदेमंद है। यह आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है और विश्राम को बढ़ावा देती है। यह आपके दिमाग को शांत करती है और माइग्रेन कम करने में एक उपयोगी जड़ी बूटी है। यह जड़ी बूटी भी एक उत्कृष्ट तनाव बूस्टर के रूप में काम करती है। आप 5 मिनट के लिए एक गिलास गर्म दूध में इसकी रूट को उबाल कर उपयोग कर सकते हैं।

ब्राह्मी:-----------
आयुर्वेद में एक उत्कृष्ट जड़ी बूटी है जो मस्तिष्क के लिए कई लाभ प्रदान करती है। यह तनाव कम कर देती है और तंत्रिका तंत्र के कामकाज में सुधार करती है। ब्राह्मी भी माइग्रेन का सिरदर्द कम करने में इस्तेमाल की जानी वाली प्रमुख जड़ी बूटियों में से एक है। आप हर दिन पानी के साथ ब्राह्मी पाउडर (2-3 ग्रा) ले सकते हैं।

शतावरी:-----------
एक बहुत ही उपयोगी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका माइग्रेन पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आप हर रोज एक गिलास पानी के साथ शतावरी पाउडर को लेकर अपने सिरदर्द के लिए शतावरी का लाभ ले सकते हैं।

सिर की मसाज:---------
मालिश सिरदर्द की समस्या को हल करने के लिए एक बहुत ही असरदार तरीका है और इसके परिणाम बहुत फायदेमंद होते हैं। यह मस्तिष्क में दर्द के संकेतों के रोक कर दर्द को दूर करने में मदद करता है। आप अपने सिर की तिल के तेल (थोड़ा गर्म) के साथ आधे घंटे के लिए मालिश कर सकते हैं। यह तनाव को कम करने में मदद करेगा और माइग्रेन के लिए एक उपचार के रूप में कार्य करेगा। इसके अलावा आप दिन में दो बार पुदीने की चाय में शहद मिलाकर पी सकते हैं या माइग्रेन में राहत के लिए पेपरमिंट ऑयल के साथ सिर की मालिश भी कर सकते हैं

केसर :-------
केसर का उपयोग माइग्रेन दर्द के इलाज के लिए भी किया जा सकता है। केसर का उपयोग करने के लिए, आप एक चम्मच घी में एक चुटकी केसर पाउडर को मिक्स करें। इस मिश्रण की एक-एक बूँद दोनों नाक में डालें। 20 मिनट के बाद धो लें। दिन में दो बार दोहराएं।

माइग्रेन के कारण ....

यह प्राकृतिक बदलाव या हार्मोन के असंतुलन के कारण भी होता है। ज्यादातर महिलाओं मे एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में कमी होने से सिर  का दर्द बढ़ जाता है।
महिलाओं को पीरियड्स के समय भी इस दर्द की शिकायत होती रहती है।
कुछ असंतुलन डाईट जैसे बियर, रेड वाइन ,चॉकलेट और कैफीन का ज्यादा इस्तेमाल करने से भी माइग्रेन बढ़ता है ।
कुछ लोगों को तेज धूप के कारण भी या फिर तेज आवाज ,परफ्यूम या पेंट थिनर आदि के कारण भी माइग्रेन की शिकायत होने लग जाती है ।

माइग्रेन से कैसे बचें
आपको माइग्रेन ना हो बार-बार होने से बचने के लिए आपको अपने जीवन शैली और खाने में बदलाव लाने की जरूरत है ।दर्द को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। आप तापमान में बदलाव से हमेशा बचें आप गर्मी मे एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करते हो तो ठंडे से गर्म में ना निकले ।
तेज गर्मी से आकर बहुत ज्यादा ठंडा पानी ना पिए ।
बाहर निकलते समय धूप से बचने के लिए छाता और सनग्लास का उपयोग करें।
अधिक ट्रैवल करने से बचें । दिन मे 8, 10 गिलास पानी हर रोज पियें।  ज्यादा  लाल मिर्ची ना खाए और  गर्भनिरोधक गोलियां ना खाएं।
ऐसा करने से आप सिर दर्द से कुछ हद तक बस सकते हो।
इससे बचने के लिए आप सुबह शाम नंगे पांव घास पर चलें ।
इससे तनाव कम होगा और हारमोंस भी बैलेंस रहेगा। जिससे माइग्रेन की शिकायत कम हो सकती है।

रोजाना 20 मिनट योग और प्राणायाम जरूर करें इससे आपको काफी फायदा मिलेगा । मेडिटेशन करना इसके लिए सबसे अच्छा उपयोग है।

माइग्रेन वाले मरीजों को सबसे ज्यादा नींबू पानी और नारियल पानी अधिक से अधिक मात्रा में लेनी चाहिए।
नमक बहुत कम खाये। तेल मसाले वाली चीजें कम से कम खाएं ।

माइग्रेन से बचने के लिए आयुर्वेदिक सबसे कारगर उपाय आयुर्वेद में सिर पर शिरोधारा की जाती है ,जो तेल से या फिर लस्सी से की जाती है।
और सिर पर मिट्टी का लेप भी किया जाता है ।
उसमें भी माइग्रेन में बहुत राहत मिलती है। इसे भी  लगातार एक डेढ़ महीने तक करवाना पड़ता है ।
तब जाकर आपको इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है ।
यह कोई बहुत बड़ी बीमारी नहीं है, बस इन छोटे-छोटे उपायों को अपनाकर आप इस बीमारी को जड़ से खत्म कर सकते हो।

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