तुलसी के धार्मिक गुण और औषधि गुणों के रामबाण उपाय

 तुलसी का पौधा हर घर में बड़ी आसानी से मिल जाता है।हमारी धर्म संस्कृति में तुलसी बहुत अधिक महत्वपूर्ण  मानी गई है ।प्रत्येक हिंदू के घर में आंगन में तुलसी का पौधा होना एक शोभा का कारण माना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार जिस घर में तुलसी का पौधा होता है वह घर तीर्थ के समान है। वहां व्याधि रूप यमदूत प्रवेश ही नहीं कर सकते । 

तुलसी के नाम:-

इसे वृंदा ,वृंदावन विश्वपुजीता, विशवपानी, पुषपसारा,, नंदनी, तुलसी और कृष्णजीवनी के नाम से भी जाना जाता है। यह सार्थक नाम वाले स्तोत्र के रूप में परिणत है। जो तुलसी की पूजा करके नामाष्टक का पाठ करता है उसे असव मेघ  योग का फल प्राप्त होता है। तुलसी को सर्वरोग सहारक प्रवृति के कारण घर में घरेलू वस्तु की श्रेणी में रखा गया है। इसकी गन्ध से मलेरिया  के मच्छर दूर भाग जाते हैं, तुलसी के पौधे में प्रबल विद्युत शक्ति होती है। जो पौधे के चारों और 200 गज तक रहती है ।

आयुर्वेद के अनुसार कैंसर रोग के विषाणुओं के फैलने मे निरोधक है। तुलसी के पत्तों का विशेष गुण जो उस वालों को फैलने से रोकती है वैज्ञानिकों के अनुसार तुलसी के ताजे पत्तों को निरंतर सेवन से गर्भ निरोघ हो सकता है। इसके पत्ते मरने वाले  व्यक्ति के मुंह में  भी डाला जाता है कयोंकी मरने वाले व्यक्ति को सद्गति प्राप्त होती है, ऐसा हमारे शास्त्रों में लिखा हुआ है। दाल संस्कार के समय तुलसी के कास्ट का उपयोग किया जाता है। इससे करोड़ों पापों से मुक्ति मिल जाती हैं।

 तुलसी की माला का महत्व :- 


इसकी माला को सिद्ध माला कहलाते हैं। इसी प्रकार तुलसी का विशेष महत्व है, तुलसी माला पहनने से और धारण करने से मानसिक शांति मिलती है, और मन में positive thought आते है। आध्यात्म के साथ साथ पारिवारिक तथा भौतिक उन्नति होती है। ईश्वर के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ती है। तुलसी की माला को धारण करने से व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास बढ़ाता है और सात्विक भावनाएं जागृत होती हैं। तुलसी पूजन की पूजा वैसे तो सारे साल करते हैं। पर कार्तिक माह में तुलसी के अनुष्ठान बहुत ही फलदायक होता है।और  कार्तिक मास में तुलसी का विवाह करने वाले को और जो फल करोड़ों दान करने से नहीं मिल सकता, वह तुलसी विवाह करने से मिलता है ।ऐसे हमारे वेद और शास्त्रों को कहना है। इसकी माला खास बात यह है कि आप कोई भी मन्तर जाप कर सकते हो यह सभी जाप के लिए उतम है। 

 तुलसी गुण और आयुर्वेद के अनुसार से उपाय:-

तुलसी पितनाशक है।यह कुष्ठ,  दर्द, चर्म रोग, कफ, और वायुजनित रोगो मैं बहुत लाभ दायक है।  तुलसी काष्ठ धारण करने से शरीर की विधुत शक्ति नष्ट नहीं होती  इसलिए इसकी माला पहनने का महत्व है।

 यदि कोई मनुष्य से भुत बाधा से पीड़ित होकर जोर जोर से चिल्ला  रहा हो तो तुरंत लाभ होगा तब तु तुलसीदास जल में डालकर उस व्यक्ति को थोड़ा सा पिला दे और थोड़ा सा जल शरीर पर भी छिड़क दें और अंत में तुलसीदल खिला  दें ऐसा करने से भूत या नेगटिव एनर्जी  बहुत जल्दी दूर हो जाती है।

 आयुर्वेदिक उपचार:-

 बुखार में तुलसी के कई पतियाँ  अनेक प्रकार के बुखार से लाभ पहुंचाती है।  बरसात के सीजन में जब मलेरिया का प्रकोप होता है तब इसकी पत्तियों को चाय में डालकर इस्तेमाल करने से मेलेरिया की रोकथाम होती है।तीव्र  बुखार में जब शरीर का तापमान अधिक हो जाता है आधा लीटर पानी में 5 ,सात तुलसी के पत्ते दुध  तथा चीनी के साथ मिलाकर सेवन करें,शरीर का तापमान एकदम नीचे आ जाएगा। तुलसी दल और काली मिर्च का काढ़ा पीने से जवर का शमन  होता है।  तुलसी के पत्तों को काली मिर्च खाने से बुखार टूट जाता है और उल्टी आनी बंद हो जाती है।

 पेट दर्द में तुलसी के पत्ते और अदरक का रस निकाल कर बराबर वजन में मिलाकर गर्म कर लें इस रस को 3 घंटे से एक एक चम्मच पीने से पेट दर्द दूर हो जाता है पेट में चाहे किसी भी प्रकार का दर्द हो यह उपाय बहुत उत्तम है ।  छोटे बच्चों  को पेट फूलने की यानी आफारा आने की शिकायत आम बात है, ऐसी शिकायत होने पर तुलसी के पत्तों का रस और पान का रस बराबर मात्रा में निकाल कर मिला लें । इसकी 10 बूंदे दिन में तीन  बार चटा देने से बच्चे की पेट वाली समस्या खत्म हो जाती है।

 खांसी में तुलसी के पत्ते और अडुुसा के पत्ते को बराबर मात्रा मे मिलाकर रस का सेवन करने से खांसी में लाभ होता है। तुलसी और शहद खाने से बुखार ,खांसी में आराम मिलता है। तुलसी के पत्तों का रस लगााने से चेहरे की सुंदरता बढ़ती है, खून शुद्ध होता है। प्रातः नींबू का रस और तुलसी के पत्तों का लेप लगाने सुंदरता में चार चांद लग जाते हैं।

 समरण शक्ति बढाने के लिए  खाली पेट तुलसी के 9,10 पत्ते खाकर पानी पी लें इसके बाद सैर करने से बल,तेज व समरण शक्ति की वृद्धि होती है। 

 आयुर्वेद मे तो यहाँ तक कहा गया है इसका उपयोग करने कैंसर होने से भी बचाव करती है।  तुलसी की माला पहनने वाले को दिल का दौरा ,गुस्सा नहीं आता। इससे आकाशिया बिजली से बचाव रहता है। मिर्गी रोग मे तुलसी का रस शरीर पर मलने से मिर्गी रोग ठीक होता है।

 उदररोग:-  तुलसी मंजरी और काला नमक मिलाकर खाने से अजीर्ण रोग में लाभ होता है, पेट के कीड़े, मुहासे, , गुड और तुलसी का पत्ते खाने से अस्थमा जैसा रोग भी ठीक हो जाता है। तुलसी का रस और नींबू रस बराबर मात्रा में मुहांसों पर निकाले से मुंहासे हमेशा के लिए मिट जाते हैं। तुलसी का रस मस्सो पर लगाने से मुंरझा जाते हैं । तुलसीदल काली मिर्च मिलाकर खाने से आधा सिर दर्द ठीक हो जाता है। दाद होने पर तुलसी पत्र का रस और नींबू का रस मिलाकर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

सफेद दाग:-

 कहीं शरीर के किसी भी हिस्से पर सफेद दाग होने से गंगाजल के साथ तुलसी पत्र का रस मिलाकर लगाने से  सफेद दाग ठीक होते हैं ।कुष्ठ रोग में भी तुलसी दल का रस लगाने से और खाने से सोंठ और तुलसी की जड़ को पानी के साथ सेवन करने से इस बीमारी में लाभ होता है।

 तुलसी के पत्ते 7 दिन तक बासी नहीं माने जाते तुलसी की छाया में श्राद्ध करने से पितरों को अक्षय तृप्ति मिलती है। तुलसी के अनेक तांत्रिक प्रयोग है।  यदि किसी के मोहन प्रयोग किया हो तो उस व्यक्ति के द्वारा तुलसी मंजरी को घी या शहद में डुबोकर श्री कृष्ण मंत्र से आहुुति  देनी चाहिए। तुलसी जल से स्नान करते समय ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः का  जाप करने से संतान सुख मिलता है। 

 तुलसी की माला पहनने से किसी भी प्रकार के संक्रमण बीमारी का भय नहीं रहता। इसके पत्तो को दांतो से नहीं चबाने चाहिए क्योंकि पत्तियों में पारा होने के कारण दंत रोग हो जाते हैं। अतः इसके पत्तों को हमेशा निगलना ही उत्तम है। सर्प के डसने पर भी व्यक्ति को तुलसी के पत्तों का रस पिला देने से भी सुधर आ सकता है। काली तुलसी का रस शरीर से पारे का विष नष्ट कर सकता है। 

तुलसी की चाय पिना स्वर्णगुण सपन्नता का प्रतीक है। जबकि सधारण चाय  हानि पहुंचाती है।  तुलसी के पत्ते बहुत सारे होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक दवाइयों में तुलसी के रस का खूब प्रयोग होता है। तथा यह  सांस के रोगों में इसकी पत्तियों को अदरक और शहद के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से सूखी खांसी, बलगम ,खांसी ,सर्दी बुखार ,जुखाम दमा , अस्थमा आदि बीमारियों में लााभदायक औषधि है। 

तुलसी के पत्ते लौंग, दो काली मिर्च, एक चुटकी सोंठ का चुरण और  सेंधा नमक मिलाकर इन सब को पानी में डालकर उबाल लें और जब पानी पक पक कर आधा बच जाए तो उतारकर छान लें फिर एक चम्मच शक्कर डाल ले इसे रात को सोते समय बिना गरम किये ही पी लें और इसे सुबह भी पी सकते हैं। जरूरी हो तो सुबह-शाम दोनों वक्त भी पी सकते हैं। इसके पीने से आधा घंटा तक ठंडा पानी ना पिए यह काढ़ा सर्दी जुखाम, गले की खारिश, टॉन्सिल , गले में  दर्द व सूजन, सिर दर्द हाथ पैरों में दर्द आदि विकार को दूर करने में बहुत ही सफल और कारगर नुस्खा है। इस काढे को आप सप्ताह में एक दिन में जरूर सेवन करें। 

 हैजे जैसी बिमारी  में तुलसी के बीज का चूर्ण बनाकर गाय के दूध में सेवन करने से तुरंत लाभ मिलता है। यादयाशत बढाने के लिए तुलसी के 5 पत्तों का सुबह खाली पेट खाने से लाभ होता है। गठिया रोग होने पर तुलसी का पंचांग चुरण, चार मासा गाय के दूध में सुबह-सुबह पीने से ठीक होता है। तुलसी के बीज का चूर्ण पानी के साथ खाने से स्व्पनदोष भी ठीक हो जाता है। 

निषेध गुण:-तुलसी पत्ता या रस का सेवन करने के  तुरंत बाद दूध नहीं पीना चाहिए।ऐसा करने से  इस प्रकार के रोग पैदा हो सकते हैं। 


तुलसी का पौधा एक और इसके उपाय अनेक यह एक बहुत ही गुणकारी पौधा है जो हर घर में बहुत आसानी से मिल जाता है और यह पौधा गमले में भी  बहुत आसानी से उगा सकते हो। तुलसी दो-तीन तरह की होती है जंगली तुलसी, रामा तुलसी, और श्यामा तुलसी इन तीनों के रंग और पत्तों में थोड़ा थोड़ा फर्क होता है। यह बहुत ही आसानी से मिल जाती है इसलिए अपने घर में तुलसी का पौधा जरूर लगाएं क्योंकि इसके लाभ और गुण बहुत ही यह एक बहुत ही गुणकारी पौधा भी है और एक औषधि भी है।


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