फल और सब्जियों के गुण और चमत्कारिक लाभ ☆☆☆


फल और सब्जियों के गुण और चमत्कारिक लाभ 👇🏻
 फल और साग सब्जियों का रस:-


आंवले का रस :- 

आंवले में विटामिन सी सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है विटामिन सी का ताजा रस मूत्र संबंधी शिकाय करता है और दो-तीन महीने तक आंवले का ताजा रस पीने से वीर्य की निबर्लता में लाभ मिलता है। आंखों की रोशनी बढ़ाने बहरा पर दूर करने में भी यह रस बहुत ही लाभदायक है, साथ ही एसिडिटी कम करने गठिया सफेद बालों का बढ़ना से रोकना रक्त विकार पीलिया रोगों में भी आंवले का जूस बहुत ही फायदेमंद रहता है।
 
 1: चुकंदर का रस:-
 चुकंदर में पाया जाने वाले बिटिन नामक खास तत्व ट्यूमर कैंसर की प्रवृत्ति को शरीर से नष्ट करता है। यह तत्व शरीर के रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है। इसलिए खून की कमी होने पर एक कप की मात्रा में दिन में तीन या चार बार इसके रस को पीने से बहुत जल्दी लाभ मिलता है। इसके पत्तों का रस को पर सिर पर लगाने से असमय झड़ने वाले बाल पुने: फिर से उग जाते हैं। गुर्दे संबंधी रोगों को दूर करने के लिए एक कप चुकंदर का रस पीने से बहुत जल्दी लाभ होता है। यह दिमाग की गर्मी को भी फायदा करता है। प्याज का रस एक छोटी चम्मच प्याज के रस में बराबर पानी में मिलाकर छोटे बच्चों को दिन में तीन बार पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। 20 ग्राम प्याज के रस में 50 ग्राम मिश्री मिलाकर प्रातकाल 20 दिन तक सेवन करने से पथरी गल कर पेशाब के साथ बाहर आ जाती है। प्याज के रस की दो बूंदें कान में डालते रहने से बहरापन दूर हो जाता है ।पीलिया रोग में 10 ग्राम सफेद प्याज का रस 5 ग्राम हल्दी 10 ग्राम गुड़ मिलाकर सुबह-शाम खिलाने से बहुत जल्दी लाभ होता है।

2:  गाजर का रस:- 
गाजर का रस बहुत ही लाभदायक होता है इसे किसी भी आयु में किसी भी समय दे सकते हैं। जिन माताओं को दूध की कमी पाई जाती है गाजर का रस रोजाना सेवन करने पर इस कमी को दूर कर सकती है। कैंसर रोगियों को भी से बहुत जल्दी राहत मिलती है यह रस आंखों व दांतों के लिए भी बहुत ही गुणकारी है। जिन रोगियों में खून की कमी पाई जाती है। उन रोगियों के लिए गाजर का रस रामबाण का उपाय करता है। इसका रस पीने से शरीर में खून की कमी नहीं रहती। गाजर का सेवन खून साफ करने के लिए भी किया जा सकता है। गाजर में विटामिन ए बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, इसलिए गाजर का रस आंखों के लिए काफी फायदेमंद होता है। 2 किलो गाजर का जूस एक-एक कप कर के दिन में कई बार पीने से प्राथमिक आवश्यकता का कैंसर ठीक हो जाता है । गाजर के पत्तों रस चार-चार बूंद रस गर्म करके कान में नाक में डालने से सिर दर्द ठीक होता है। निम्न रक्त चाप वाले रोगियों के लिए भी है रस बहुत ही लाभदायक है इसमें विटामिन ए की मात्रा के साथ विटामिन बी सी डी ए वी होते हैं इसके पीने से भूख खुलकर लगती है। गाजर के खाने से सोडियम पोटैशियम मैग्निशियम तथा आदि लोह तत्व प्राप्त होते हैं। गाजर का रस से बीमारियों में रक्त की विषाक्तता और बवासीर आदि रोगों में बहुत लाभदायक सिद्ध हुआ है।

3:  पालक का रस:-
इसमें विटामिन ए बी व सी तीनों होते हैं इसमें विटामिन ए व लौह तत्व अधिक होता है। पालक एक प्रकार का हरा रक्त ही है।यह कब्ज दूर करने, दांत में मसूड़ों को मजबूत करने पर पायरिया को नष्ट करने वाले बैक्टीरिया के लिए विशेष गुणकारी गुण हैं। 

4: टमाटर का रस ;- 
 इसमें विटामिन ए ,बी ,सी के अतिरिक्त साइट्रिक एसिड, फासफोरिक तथा मेलिक एसिड जैसे उपयोगी द्रव्य पदार्थ पाए जाते हैं। इसके रस से कब्ज को मिटाने रोग ग्रस्त यकृत को स्वस्थ करने और रक्त को शुद्ध करता है।  
चेहरे को चमकीला बनाने की एक अद्भुत शक्ति है। यह स्वास्थ्य के लिए अमृत तुल्य हैं,टमाटर पूरे सारे साल बहुत आसानी से मिल जाता है।

5:  संतरे का रस:- 

 इसमें विटामिन ए, बी ,सी ,डी विटामिन है किंतु विटामिन सी अधिक मात्रा में है। सौ ग्राम संतरे का रस पूरे दिन की विटामिन सी की पूर्ति पूरी कर देता है। इसके अलावा इसमें शर्करा सिट्रिक एसिड फॉस्फोरस,   सोडियम, कैल्शियम, पोटेशियम आदि अन्य  लाभकारी तत्व भी पाए जाते हैं। यह उदर में पहुंचते ही बहुत जल्दी पच जाता है।
 कब्ज का नाश व आंतों  की शुद्धि करता है रोग प्रतिकार की क्षमता बढ़ाता है। उच्च रक्तचाप जवर व इन्फ्लूएंजा रक्त प्रवाह, दमा, जुखाम अनिद्रा आदि रोगों के लिए अति  उत्तम है।

6:  मौसंमी का रस:- 

 इस फल में  बहुत गुण होने के साथ-साथ सिट्रिक एसिड विटामिन ए, बी, सी और क्षार होते हैं। यह बलवर्धक, रक्तवर्धक, बिमार लोगों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। थकान बेचैनी उपाधि को दूर करके स्फूर्ति रोग निरोधक शक्ति प्रदान करता है वह रक्त को बढ़ाता है चर्म रोगियों के लिए भी मुसम्मी का रस लाभकारी है|| अनानास का रस में पासवर्ड कैसे प्राप्त मात्रा में पाया जाता है लो मैग्नीशियम सोडियम क्लोराइड ऑफ पोटेशियम के 1 साल की ठीक मात्रा में होते हुए विटामिन ए वैसे भी होता है इसके रस में अंतरियो में से अम्लता को बाहर निकालने के गुण हैं। यह दमा , भेद वृद्धि, उच्च रक्तचाप आदि रोगों के लिए बहुत गुणकारी है।  
 
7: गन्ने का रस:- 

 गन्ने का रस पिलिया रोगों के लिए रामबाण दवाई है। पीलिया  रोगी को गन्ने का रस देना सर्वाधिक लाभदायक है। पेट संबंधी विभिन्न शिकायतें जैसे  कब्ज, गैस आफारा ,जलन, बदहजमी आदि होने पर गन्ने के रस में नींबू और अदरक का रस मिलाकर सेवन करने से तुरंत लाभ हो जाता है। गन्ने का रस वीर्य वर्धक भी होता है और शरीर में ताकत अतः स्फूर्ति पैदा करता है। गन्ने में शर्करा की प्रधानता होती है इसके रस को पीते ही राहत मिलती है। गन्ने के रस में कैल्शियम की प्रचुर मात्रा होने के साथ-साथ आयरन की मात्रा भी बहुत अधिक पाई जाती है, जिसके कारण हमारे दांत और हड्डियों को  बहुत मजबूत होते हैं।  गन्ने का रस लोह तत्वों से परिपूर्ण होता है, जिससे शरीर में रक्त की कमी और
  इसका सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। यदि खूनी दस्त की शिकायत हो तो भी गन्ने का रस में अनार का रस मिलाकर सेवन करने से बहुत जल्दी लाभ होता है। गर्मी में लू लगने पर गन्ने का रस सेवन करना चाहिए। कुकुर खांसी होने पर गन्ने का रस में मूली का रस मिलाकर सेवन करना चाहिए। यदि स्मरण शक्ति कमजोर हो तो गन्ने का रस अत्यंत प्रभावी है और गन्ने के रस में अदरक का रस मिलाकर सेवन करने से आवाज मधुर हो जाती है, और बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। मुत्र रोगों में भी गन्ने का रस बहुत लाभदायक है और इसके सेवन करने से पेशाब खुलकर आता है ।और हिचकी आने पर गन्ने का रस घुट घुट कर पीना चाहिए। गन्ने का रस शुद्ध होना चाहिए तथा वहां साफ-सफाई का विशेष प्रबंध होना चाहिए, अन्यथा यह रस लाभ के बजाय हानि ही पहुंचा सकता है। यदि रस में बर्फ डालाना हो तो शुद्ध  साफ पानी से बनी होनी चाहिए ।गिलास साफ-सुथरे व धुले हुए होने चाहिए तभी गन्ने के रस का सेवन करें। क्योंकि ज्यादातर गन्ने का रस हम बाहर से ही पी सकते हैं घर में बनाना यह संभव नहीं होता।
 अनार का रस :-
अनार के रस में उच्च कोटि का सोडियम तथा पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी, एंव टोनिक एसिड भी है ।यह तत्व शक्ति वर्धक होने से शरीर को पुष्ट करते हैं वह अतिसार, दस्त ,संग्रहणी में बहुत लाभदायक है। आँतों  व पेट के कीड़े के लिए यह एक रामबाण है। इससे लीवर की शक्ति बढ़ती है ,आंतों की क्रियाशीलता बढ़ती है। उच्च रक्तचाप आदि में इसका रस तत्काल असर करता है।
सेब का रस:- सेब के रस में विटामिन ए बी1, बी2, बी3 , पी और सी आदि  एव अधिक खनिज तत्व अधिक मात्रा में होते हैं। यदि सुबह खाली पेट लगभग ढाई सौ ग्राम ताजा सेब का रस पिया जाए तो है शरीर के समस्त प्रकार के विष मुक्त कर देता है, और इसके रस से पीलिया के बाद बिगड़ा हुआ लिवर भी द्वारा कार्यशील हो जाता है। हृदय रोग उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए उपयोगी फल है। यह हमारी आंतों को मजबूत बनाता है  और भूख को शांत करने के लिए बहुत ही उपयोगी है। नर्वस सिस्टम व तनाव मुक्त करने का जो सामर्थ्य सेब में है वह अन्य किसी फल में नहीं है।   ऐसा भी कहा जाता है जो हर रोज एक सेब खाएं ,वह  हमेशा डॉक्टर से दूर रहे।

 डिब्बे बंद रसों के नुकसान :- 
अक्सर बंद डिब्बों के फलों के रस व जैम  जैली ,आचार इत्यादि बेनजौइक एसिड व सोडियम बेंनजौइक मिलाया जाता है जो बहुत ही हानिकारक है। हमारे स्वास्थ्य के लिए डिब्बे रस का प्रयोग ना कर के ताजे रस निकले हुए रस का ही प्रयोग करना उचित व लाभकारी हैं। इसलिए खाने-पीने का समान है हमेशा बहुत ध्यान से और उनकी एक्सपायरी डेट देख कर ही खरीदना चाहिए ।सभी डिब्बे बंद सामान के लिए मना किया जाता है। क्योंकि पता नहीं चलता वह कब के बने हुए होते हैं फिर ऐसा सामान  खाने पीने से लाभ तो नहीं नुकसान ही होगा।
इसलिए हमेशा सवास्थय को ध्यान में रखकर खाये जीभ के वश में होकर नही कयोंकि सवास्थय ही सबसे बड़ा धन है इन्सान के लिए। 

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