बुखार को कम करने के लिए घेरेलू और आयुर्वेदिक उपाय ☆☆☆

 बुखार एक ऐसी बीमारी है जो कभी भी किसी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। हर साल मौसम मे परिवर्तन होने के बाद बुखार होना एक आम समस्या है । सर्दी हो या गरमी मौसम चेंज होते हैं बुखार होना आम बात है। इसलिए अगर आपको भी बुखार जैसी समस्या हो तो आप घर पर ही इस समस्या को ठीक कर सकते हो कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर जो हम आपके साथ शेयर करने जा रहे है।
हम सभी को बुखार के कारण शरीर में उठने वाली ठंडी लहरों और थकावट का सामना करना पड़ता है। बुखार कई अन्य परिस्थितियों के कारण भी हो सकता है, जो कभी सामान्य रहता है तो कभी गंभीर स्थिति तक भी पहुँच सकता है। 
अगर दो दिन से ज्यादा बुखार होता है और आसपास डेंगू, मलेरिया,चिकनगुनिया के मरीज हैं तो ब्लड टैस्ट कर प्लेटलेट काउंट टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। कई बार किसी अन्य कारण जैसे पेट का इंफेक्शन,अपच, यूटीआई, कैंसर या फिर ऐड्स जैसी भयंकर बिमारी के कारण भी बुखार नहीं उतरता।
इसलिए दो दिन से जयादा बुखार रहने पर लापरवाही ना बरते।
बुखार किसी भी मौसम में आ सकता हैं और ये किसी को भी हो सकता है। बुखार की पहचान तेज, गर्म सांस और शरीर में थकान से की जाती है।इसके अलावा चेहरे पर हल्के हल्के दाने निकाल आते हैं। लेकिन अगर हम सावधानी बरते तो बुखार से आसानी से निजात पाया जा सकता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण हमारा शरीर आसानी से रोगों जैसे खाँसी, जुकाम, और बुखार की चपेट में आ जाता है। मौसम में बदलाव होते रहने की वजह से वायरल फीवर होने की सम्भावना बनी रहती है। बुखार के समय कई लक्षण हमारे शरीर में देखने को मिलते हैं। जैसे, ठंड लगना, आखों का लाल होना, जुकाम, साँस लेने में दिक्कत आदि।

बुखार के लिए तुलसी के उपाय :-



तुलसी के पत्ते 10 , काली मिर्च 10. खुबकला 10 ग्राम , पोदीना 5 ग्राम , पनिया 10 ग्राम , 400 ग्राम पानी में चढ़ाकर , 100 ग्राम रह जाने पर 10 ग्राम मिस्री मिलाकर काढा बनाकर पिना चाहिए।

गिलोये की बेल :- 


गिलोय की बेल बुखार के लिए रामबाण औषधि मानी जाती है खासकर डेंगू के लिए अगर आपको बुखार है तो आप गिलोय की सुखी लकडी तोड़कर काढ़ा बनाकर पी लें इससे बहुत जल्दी आराम मिलता है। यह काढ़ा डेंगू बुखार के लिए रामबाण से कम नहीं है।

कच्चा प्याज के उपाय:-

कच्चे प्याज शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करते हैं और शरीर के दर्द को भी कम करते हैं। कच्चे प्याज का एक टुकड़ा ताजा काटकर पैरों के नीचे रखें। अब पैरों को कंबल से अच्छी तरह से ढक लें। यह तापमान को संतुलित करके बुखार को काफी स्तर तक कम कर देगा। यह बुखार के लिए रामबाण घरेलू उपायों में से एक है।

किशमिश:-

जिन लोगों को तेज बुखार है, उनके लिए यह घरेलू उपाय काफी काम आ सकता है। लगभग आधे गिलास पानी में 25 किशमिश भिगोएं। अब किशमिश को अच्छे से मैश कर लें और फिर पानी को छान लें। इसमें अब आधे नींबू का रस मिलाएं और फिर दिन में दो बार पीने के बाद तापमान सामान्य हो जायेगा

हल्दी और सौंठ का पाउडर:-

अदरक में एंटी आक्सिडेंट गुण बुखार को ठीक करते हैं. एक चम्मच काली मिर्च का चूर्ण, एक छोटी चम्मच हल्दी का चूर्ण और एक चम्मच सौंठ यानी अदरक के पाउडर को एक कप पानी और हल्की सी चीनी डालकर गर्म कर लें. जब यह पानी उबलने के बाद आधा रह जाए तो इसे ठंडा करके पिएं. इससे वायरल बुखार में बहुत जल्दी आराम मिलता है।

धनिया के उपाय:-

धनिया सेहत के लिए बहुत गुणकारी होता है, इसलिए यह वायरल बुखार जैसे कई रोगों को खत्म करता है.वायरल के बुखार को खत्म करने के लिए धनिया चाय बहुत ही असरदार औषधि का काम करती है।

मेथी का पानी:-
हम सबकी किचन में मेथी बहुत आसानी से मिल जाती है,। सुखी मेथी के दानों को एक कप में भरकर इसे रात भर के लिए भिगों लें और सुबह के समय इसे छानकर हर एक घंटे में पिएं. जल्द ही आपको बुखार से आराम मिलेगा।

बुखार मे जलन:- 

अगर बुखार में पेट में जलन हो तो सफेद चन्दन घिसकर 20 ग्राम अदाज से नाभि में लगा ले बहुत जल्दी आराम मिलेगा।
अगर पुरे शरीर मे जलन हो तो , नाभि पर कांसे की कटोरी रखकर के एक हाथ ऊंचे से उसमें पानी की धार छोडे दस मिनट में जलन मिट जायेगी।


मलेरिया बुखार के उपाय:-

श्यामा तुलसी के 11 पत्ते और 11 काली मिर्च का काढ़ा बनाकर बुखार चढ़े रहने तक और जब तक बुखार ना उतर जाये तब तक काढा पिते रहे। 10 पत्ते तुलसी के 10 काली मिर्च के साथ बुखार में हर रोज चबाने चाहिये ।

पित्तज्वर में धनिया की हरि पत्तियों का जूस पीयें एवं भोजन में भी पत्तियां मिलाकर खायें ।

बुखार की वज़ह से दुर्बलता होने पर परवल और पालक का मिलाकर जूस लेते रहे , कमजोरी जल्द ही मिट जायेगी । साधारण बुखार में अन्न बन्द करके सेब जयादा खाते रहे। बुखार होने पर सेब रामबाण का काम करता है।

बुखार होने पर नींबू का रस , पुदीना , काला नमक मिलाकर पीने से मलेरिया बुखार में बहुत जल्दी लाभ होता है ।
बुखार होने पर सर्व प्रथम बुखार क्यों हुआ है । इसकी जानकारी लें । थकावट अधिक होने से शरीर में बहुत दर्द हो रहा हो तो उचित आराम करें। अगर बुखार तेज हो जाए तो डाक्टरी परामर्श लें,माथे और शरीर पर ठंडे पानी की पट्टीया रखे।

बुखार उतारने की दवा लेने के बाद 25 से 35 मिनट तक इतजार करे , उसको बाद शरीर को संपज करे । तापमान बार - बार नहीं नापे । तेज बुखार होने पर एक दवाई के लिए एक  घन्टे का अंतर रखें ,समय और तापमान नोट करते रहे ।
कम बुखार होने पर दवाई के लिए  चार घन्टो का अंतर रख सकते है । बुखार में शरीर को आवश्यकतानुसार आराम दे । जब लगे कि छोटा - मोटा काम कर सकते है तो करे परंतु ध्यान रखें कि अधिक काम ना करे और शरीर को थकाएं नहीं ।

बुखार के लिए सुप और फल :-
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ताजे पानी में बनी शिंकजी , मौसमी का जूस , चाय , ग्लूकोज , पानी और दूध उसकी इच्छानुसार देते रहे , क्योंकि तरल पदार्थ अधिक देने से रोगो को मूत्र निष्कासन में आसानी होगी । शरीर में किसी प्रकार का इंफैक्शन होने पर ज्वर तेजी से बढ़ता है । गर्मियों में अधिक समय धूप में रहने से कभी - कभी हीट स्ट्रोक हो जाता है । इसका इलाज शीध प्रारंभ करें ।
एक बार ज्वर को निकलने दें । कभी - कभी प्रारंभ में रोकने से बुखार अंदर ही अंदर शरीर को तंग करता रहता है । वैसे बुखार कोई खतरनाक गंभीर बीमारी नहीं है पर शरीर की प्रतिरोधक शक्ति को कमजोर बना देती है इसलिए समय पर उचित उपचार अवश्य करना चाहिये । और इन सब उपाय करने के बाद भी आराम ना मिले तो अपने डाक्टर से जल्द से जल्द मिले।

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