करवा चौथ पर्व के लिए best wishes और करवा चौथ की कहानी




Kerwa chauth ki
 best wishes👇🏻 

1. जब तक चाँद सूरज रहें तब तक मेरी माँग में सिन्दूर रहे, रब से माँगू एक वरदान, मेरा हमसफ़र सदा सलामत रहे। 


  2. करवा चौथ संग लाये खुशियाँ हज़ार,हर साल मनाएं हम यह त्योहार,भर दे हमारा दामन खुशियों के साथ,मेरी भी उम्र लग जाये तुम् जियो हज़ारो साल !!

3.सुख दुःख मे तुम हर पल मेरा साथ निभाना , एक जन्म नहीं हर जन्म में तुम मेरे पति बनकर आना। 


4. करवा चौथ तो एक बहाना है, कुर्बानी देना तो मेरी आदत है , कभी सीता,कभी मीरा बनकर ,कयोंकि मै औरत हु, मुझे आदत है, माँ बनकर पीड़ा सहने की...!!


 5.सुबह की किरण सरगी मिलेगी,
आज सुहागिन फिर दुल्हन की तरह सजेगी....,
व्रत से पति की उमर बढ़ेगी,
हर सुहागिन को माँ करवा आशीर्वाद देगी,उसकी झोली खुशियों से भर देगी...!!



6. करवा चौथ का पावन व्रत,
आपके लिए मैं कर पाई हूँ,
आप के प्रेम और सम्मान
की वज़ह से ही मैं जीवन में नये रंग भर पाई हूँ ....!!

7.हाथों में चूड़ा ,मेहंदी सजाकर,
माथे पर सिन्दूर लगाकर ,सातो श्रृंगार करके ,निकली हर सुहागन चाँद के दीदार में , देर ना करना ऐ चाँद आज हर सुहागिन हे तेरे इन्तजार में...!!


8. जीवन मे मुझे जो मिला है तेरा साथ, दुःख सारे मिट गए , हुआ खुशियों का आगाज...खुदा से गुजारिश है जब तक चाँद सूरज रहें हर जन्म में तुम मेरे हमसफ़र रहो।


9. व्रत तो एक बहाना है,
पति तो पत्नी के लिए खुशियों का खजाना है ...दिल में बसाये रखनाअपनी पत्नी को,
उनके बिन आपका आशियाना अधुरा है...!!


10.  चाँद मे दिखती है मुझे मेरे पिया की सूरत,चाँद संग चांदनी सी है मुझे भी उनकी जरुरत...!!


  11.आज का दिन बड़ा ख़ास है,
आप के आने की आस है,
थोड़ी भूख, थोड़ी प्यास है,
आप नहीं आये तो कया हुआ
पर खवाबों में अब भी आपका ही एहसास है...!!



12. आज फिर आया है, मौसम प्यार का,
न जाने कब होगा दीदार चाँद का,
करवा चौथ की रात ऐसी आई,
आज फिर वो दुलहन की तरह सजकर आई...!!


13. खुदा से मैंने एक दुआ मांगी,
दुआ में अपनी मौत मांगी ,
फिर खुदा ने कहा मौत तो तुझे
में दे दू पर उसको क्या कहू
जिसने तेरी लिए लम्बी उम्र मांगी !!


14. करवा चौथ का दिन हैं,
तेरी यादों में कई बार खोये हम,
तुम बिन ज़िन्दगी कितनी बेरंग होगी,ये सोच कर कई बार डर गये हम...!!

15. चाँद को पुजु
,,व्रत करू ,हरदम करती हूँ मैं तेरी सलामती की दुआ,
तुझे लग जाये मेरी भी उमर,
हर पल यही है, मेरी रब से दुआ ...!!


16. करवाचौथ तो बहाना है,
असली मकसद तो पति को याद दिलाना है, है कोई तेरे इंतजार में
टकटकी लगाए रहती है, तेरे इंतज़ार में थोड़ी सी देर होने से वो मुरझा जाती है...
अपनो को छोड़ वो पति की चौखट पर पडी रहती है...!!



17. जन हित में जरी आज ये फरमान है,दिल से निकला हुआ ये हमारा अरमान है
आज करवा चौथ का पर्व है
जिस पर फ़िदा हमारी जान हैं...!!


18. तुम्हारी मुस्कुराहट करवाचौथ के चाँद सी है ….बड़े इंतज़ार के बाद ही दिखती है !!!! 


19.  मेहंदी का लाल रंग आपके,
प्यार की रगं दिखाता है.
माथे का सिन्दूर,
गले में पहना हुआ मंगलसूत्र,
हमारा मजबूत रिश्ता दिखता है,
ये करवा चौथ का त्यौहार
औरत देती है हर मोड़ पर बलिदान यह हम सबको संदेश देता है..!!



20. चाँद मे दिखती है मुझे मेरे पिया की सूरत, चाँद संग चांदनी सी है मुझे भी उनकी जरुरत

21.किसी ने खूब कहा है : ऐ चाँद तू किस मजहब का है...
ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा...!!

22. अगर पत्नी नही मिलती तो कभी यकिन नहीं होता की ...
अजनबी लोग भी अपनों से ज्यादा प्यारे हो सकते है..
लोग कहते है, हाथों की लकीरें अधूरी हो तो किस्मत में पत्नी नहीं होती...
लेकिन मैं कहता हूँ की,हाथों में पत्नी का हाथ हो तो लकीरों की भी जरुरत नहीं होती...!!


23. करवा चौथ का त्यौहार आया
सुहागिनो के लिए मेहंदी, चूड़ा और रगं बिरंगी पोशाक के साथ घर में खुशियों का आगाज़ लाया..!!

24. पहले तेरे इश्क में
फिर तेरे इंतजार में..
अब तो आ जाऔ बैरी पिया
एक साल बाद आता है ये करवे का त्यौहार ,हमें आज भी है तेरा इन्तजार...!!


25. करवा व्रत करूँ, पुजा करूँ, तुम थामे रखना यु ही मेरा हाथ, अगर तुम्हे खरोंच भी आ जाये, मै आपके लिए भगवान् से लड़ पडूँ ...!!


26. पयार हम दोनों करते थे
मै दिल से करता था वो दिमाग़ से
फिर अनजानी सी एक रात आई
पता नहीं वो कौन सी बात से खफा हो गई
,वो किसी और की हो गई
और मुझे हमेशा के लिए तन्हा
छोड़ गई...!


करवा चौथ का शुभ मुहूर्त और कौन सी तिथि को है पुरी जानकारी :-----
 
अब की बार करवा चौथ 4 नवंबर 2020 बुधवार को है हर साल करवा दिवाली से 10या 11 दिन पहले आता है। इस बार भी करवा दिवाली से 10 दिन पहले हैं। यह त्यौहार औरतें अपने पति की लंबी आयु और घर में सुख समृद्धि के लिए करती हैं।

करवा चौथ मुहूर्त समय:--
 
चतुर्थी तिथि- 4 नवंबर को सुबह 03:24 मिनट से 5 नवंबर को सुबह 05:14 मिनट तक।
करवा चौथ पूजा मुहूर्त- शाम 5 बजकर 29 मिनट से शाम 6 बजकर 48 मिनट तक।
चंद्रोदय- रात 8 बजकर 16 मिनट पर यह समय भारतवासियों के लिए है।

चांद को देखने के बाद खोला जाता है व्रत:---

करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से चांद निकलने तक रखा जाता है। चांद को अर्घ्य देने और दर्शन करने के बाद ही व्रत को खोलने का विधान है। चाँद निकलने से कुछ समय पहले शिव-पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। चांद निकलने के बाद सुहागिन महिलायें अपने पति को छलनी,जलेबी और कुल की रित के अनुसार दीपक रखकर पति का चेहरा देखती हैं और पति के हाथों जल पीकर उपवास खोलकर पति और घर के बुजुर्गों से सदा सुहागन का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

करवा चौथ में चंद्रमा की पूजा का महत्व-
हिन्दू धर्म के अनुसार में चंद्रमा को आयु, सुख, शांति और ठंड प्रदान करने वाला देवता माना जाता है।ऐसी मान्यता है कि चंद्रमा की पूजा से वैवाहिक जीवन सुखी होती है और पति की उम्र लंबी होती है।

हमारे इतिहास में कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं जिनकी वजह से हमारे त्यौहार मनाए जाते हैं, दिवाली हो या होली हो इन सब त्योहारों के पीछे कोई ना कोई ऐतिहासिक घटना अवश्य रही है, और इसी तरह करवा चौथ की भी बहुत सारी कहानिया हमारे ग्रंथों में मिल जाती हैं। करवा चौथ की बहुत सारी कहानियां हैं।
यह festival भी हर साल पूर्णिमा के बाद चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागन औरतें अपने पति की लंबी आयु के लिए दिनभर निर्जला व्रत रख के रात को चांद को देखकर भोजन ग्रहण करती हैं। यह त्यौहार सदियों से चला आ रहा है। आज मैं आपके साथ कुछ ऐसी कहानियां शेयर कर रही हूँ जो आप कोरोना के इस दौर में घर पर रहकर अपने पूजा को संपन्न कर सकती हैं।

करवा चौथ की ऐतिहासिक व्रत कथा:-----
साहुकार की बेटी-------
पुराने समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।
शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूंकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।

सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर छलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चौथ का चांद उदित हो रहा हो।
इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है। वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है।

उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।
सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।
एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियां करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियां उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो' ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है।

इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूंकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह कर वह चली जाती है।
सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टाल मटोल करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है।

अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अंगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुंह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। इसी कारण इस का नाम करवा चौथ पडा।तब से लेकर आज तक यह निर्जला व्रत का विधि विधान माना जाता है।
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करवा चौथ की दुसरी कथा:----

सावित्री के त्याग और तपस्या से ही शुरू हुई करवाचौथ व्रत की प्रथा

अन्न जल त्याग यमराज से पति के प्राण वापस लाई थी सावित्री
यह सुहागिनों का त्योहार करवाचौथ है। इस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन चंद्रमा की पूजा की जाती है। चंद्रमा के साथ- साथ भगवान शिव, पार्वती जी, श्री गणेश और कार्तिकेय की पूजा भी की जाती है।

यह व्रत कार्तिक माह की चतुर्थी को मनाया जाता है, इसलिए इसे करवा चौथ कहते हैं। ऐसे तो करवाचौथ की बहुत सी पौराणिक कथा है पर इस व्रत की शुरुआत सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस लाकर की थी। तभी से सभी सुहागिनें अन्न जल त्यागकर अपने पति के लम्बी उम्र के लिए इस व्रत को विश्वास के साथ रखती हैं।

सती सावित्री की करवा चौथ की कथा:---
शास्त्रो के अनुसार जब सत्यवान की आत्मा को लेने के लिए यमराज आए तो पतिव्रता सावित्री ने उनसे अपने पति सत्यवान के प्राणों की भीख मांगी और अपने सुहाग को ना ले जाने के लिए प्रार्थना की । बहुत कोशिश करने पर यमराज के ना मानने पर सावित्री ने अन्न-जल का त्याग दिया। वो अपने पति के शरीर के पास विलाप करने लगीं। पतिव्रता स्त्री के इस विलाप से यमराज विचलित हो गए, उन्होंने सावित्री से कहा कि अपने पति सत्यवान के जीवन के अतिरिक्त कोई और वर मांग लो।
सावित्री ने यमराज से कहा कि आप मुझे कई संतानों की मां बनने का वर दें, जिसे यमराज ने हां कह दिया। पतिव्रता स्त्री होने के नाते सत्यवान के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष के बारे में सोचना भी सावित्री के लिए संभव नहीं था। अंत में अपने वचन में बंधने के कारण एक पतिव्रता स्त्री के सुहाग को यमराज लेकर नहीं जा सके और सत्यवान के जीवन को सावित्री को सौंप दिया। कहा जाता है कि तब से स्त्रियां अन्न-जल का त्यागकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए करवाचौथ का व्रत रखती हैं। यह त्योहार हर साल कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।
  
हे श्री गणेश- मां गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले।

Last alfaaz:---------

करवा चौथ का विधि विधान और कहानियां अपने परिवार और दोस्तों को जरूर शेयर करे। आप सबका दिन शुभ हो और सभी त्यौहार आपके लिए खुशियाँ और सुख समृद्धि लेकर आये।

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