एलर्जी की रोकथाम के लिए घेरेलू उपाय....

एलर्जी कभी भी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है यह एक ऐसी बिमारी है। जिसके होने से हम परेशान हो जाते है ।एलर्जी के बारे में एक कहावत भी है एलर्जी रब की मर्ज़ी....

आयुर्वेद के अनुसार एलर्जी की रोकथाम बहुत ही मुश्किल है
डाक्टरो के मानना है कि एलर्जी का प्रभाव हमारे शरीर में तीन तरीको से होता है ,त्वचा एलर्जी , नाक में एलर्जी, राइनेटिक्स या हेफीबर तथा लंग्स में या थायड ऐफिक्स लाउस में ब्रांकिया लास्मया । यह बिमारी लगभग लाइलाज मानी जाती है । इलाज के रूप में रोगी को चिकित्सक द्वारा बताए गए चीजों के प्रति सख्त परेहज रखना होता है ।
एलर्जी वह स्थिति है, जिसमें हमारा प्रतिरक्षा तंत्र काफी संवेदनशील हो जाता है और किसी भी साधारण कारक के प्रति अत्यंत तीव्र शारीरिक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। यह रोग का रूप ले लेती है। 
एलर्जी के रूप:----
एलर्जी में आमतौर पर जुकाम जैसे ही लक्षण पाए जाते हैं। इसमें नाक का बहना, गले में खराश, आंखों से पानी आना, त्वचा पर दाने आना आदि लक्षण दिखते हैं। कई लोगों में पेचिश और दस्त की भी समस्या देखी जाती है और दिल की धड़कन भी असंतुलित हो सकती है।
मूलतः एटेपिक रोग में स्किन ( त्वचा ) में एलर्जिक डर्म टाइटिस , नाक में एलर्जीक राइनेटिक्स तथा लंग्स में ब्रांकिया लास्मया होते है । एपेटिक डर्मटाइटिस में शरीर में आई.जी.ई प्रोटीन को आई.जी.ई एण्टीबाडी कहते हैं । आई.जी.ई एण्टीबाडी विभिन्न प्रकार के एलर्जी है ।
शरीर में होने वाली कई प्रकार का एलर्जी पर पर्यावरण के चलते और मौसस बदलने से होती है । यह एलर्जी लगभग सत्तर फीसदी लोगों में पाई जाती है । आमतौर एलर्जी के रोगी को खान - पान से भी परहेज करना पड़ता है ।अधिक पानी पिएं, योग जरूर करें, और धुल मिटटी के काम से दुर रहे।
एलर्जी से बचें एलर्जी रिएक्शन के कारण कई और भी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है ।
डाक्टर के अनुसार एलर्जी से निपटने के लिए सबसे आसान और सस्ता उपाय है अधिक से अधिक पानी पिए । अधिक पानी पीने से विषले तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं । एलर्जी जितनी अधिक होगी , उतनी ही शरीर के सैलों को मुरम्मत की जरूरत होगी , पानी अधिक पीने से सैल्स के जहरीले पदार्थ भी बाहर निकल जाएंगे । एलर्जी : बार - बार होने वाले जुकाम , खांसी , बुखार , दमाः पित्ती , सिरदर्द , पेट - दर्द , उल्टी , मासिक गड़बड़ियां आदि अनेक रोगों का कारण एलर्जी भी है । किसी को खाने के किसी पदार्थ से , किसी को पहनने के किसी वस्त्र से , किसी को गन्ध से , किसी को अत्याधिक सर्दी , गर्मी या बरसात से , किसी को किसी वस्तु का सम्पर्क में आने से एलर्जी होती है । इन वस्तुओं का किसी पर प्रभाव होता है और किसी पर नहीं होता है । एलर्जी कभी भी किसी को भी हो सकती है । इसलिए इसे नटखट एलर्जी बनाम अल्लाह की मर्जी कहा जाता है ।
एलर्जी के कारण:------
एलर्जी के कारणों का पता निम्न तरीके से लगाया जाता है । पहला तरीका है नब्ज की गति । सुबह के समय व रात को सोने से पहले नब्ज की प्रति मिनट की गति अथवा दिन की प्रति मिनट धड़कन की गति गिनी जाती है । सुबह की पल्स रेट व हार्टबीट , रात की पल्स रेट व हार्टबीट से हमेशा कम होती है । यह एक सामान्य नियम है । अगर सुबह की पल्स रेट एवं हार्टबीट रात में सोने से पहले की पल्स रट एवं हार्टबीट से ज्यादा हो तो उसका तात्पर्य यह है कि उपयोग में लाए गए बिस्तर में ऐसा कोई कपड़ा ऐसा है जो एलर्जी कर रहा है । इसका पता लगाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले पूरे बिस्तर को चारों तरफ से प्लास्टिक की चादर से ढंक कर केवल एक एक कपड़ा एक एक दिन में पहनकर देखना पड़ेगा कि किस वस्त्र से एलर्जी हो रही है । शेष तरीका वही रहेगा । सोने से पहले व सुबह उठने के तुरंत बाद पल्स रेट एवं हार्टबीट की संख्या गिनना । इसमें अन्तर अधिक नहीं होना चाहिये ।
 एलर्जी का पता कैैसे लगाये:---
खाद्य पदार्थ की एलर्जी का पता निम्न तरीके से लगाया जाता है । सुबह बिस्तर से उठते समय व नाश्ता करने से पहले पल्स रेट एवं हार्टबीट गिनते हैं । नाश्ते में केवल एक बार में एक ही वस्तु खाते हैं , फिर खाना खाने के बाद पल्स रेट एवं हार्टबीट में विशेष अन्तर न हो तो ऐसा समझा जाता है कि अमुक खाद्य पदार्थ एलर्जी नहीं कर रहा है । इसी प्रकार प्रतिदिन एक - एक खाद्य पदार्थ खाकर पल्स रेट एवं हार्टबीट की संख्या गिनकर पता लगाते है कि कौन - सा खाद्य पदार्थ एलर्जी कर रहा है व कौन सा नहीं कर रहा है । जिस खाद्य पदार्थ को खाने से पल्स रेट एवं हार्टबीट की गति 9-10 बीट या उससे भी ज्यादा बढ़ जाए तो उसी पदार्थ को एलर्जी का कारण समझा जाता है ।

एलर्जी के लिए घेरेलू उपाय:------
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर एलर्जी का मुकाबला किया जा सकता है। हल्दी, नीम, तुलसी, काली मिर्च, लौंग, अदरक और अन्य घरेलू तौर पर उपलब्ध सामग्रियां काफी स्वास्थ्यप्रद होती हैं। इनका नियमित इस्तेमाल होना चाहिए। इन मसालों का भोजन में समावेश करना इनके उपयोग का सबसे अच्छा तरीका है। च्यवनप्राश, आंवला आदि का सेवन करें, जो शरीर में आयरन, कैल्शियम और अन्य विटामिनों की कमी को पूरा करते हैं।
वात एवं कफ को संतुलन में लाने के लिए एक खास मिश्रण का इस्तेमाल करें। इस मिश्रण में 20 मिलीग्राम त्रिकटु चूर्ण (सोंठ, पिप्पली, काली मिर्च), 250 मिलीग्राम तुलसी के पत्ते, 10 मिलीग्राम लौंग, कपूर और सूखा धनिया अच्छी तरह पीसकर डालें। इस मिश्रण में से थोड़ा-थोड़ा शहद के साथ  प्रतिदिन  सेवन करें, काफी लाभ होगा।

जुकाम व छिंको की एलर्जी के लिए उपाय:---
अगर आपको मौसम बदलते ही छिंके आनी और जुकाम की एलर्जी है तो इसके लिए सबसे उत्तम उपाय जलनेति है। कई बार रोगी को मौसम बदलते ही नाक में खारिश और छींकें आनी शुरू हो जाती हैं। यह समस्या किसी भी टाइम हो सकती है। इसके लिए आप हल्का गुनगुना गर्म पानी करके और उसमें थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर लगातार एक महीने तक सूरज निकलने के बाद जलनेति करें। यह नाक की एलर्जी के लिए सबसे उत्तम उपाय है यह मेरा अपना निजी अनुभव है। मै विशवास के साथ कह सकती हूं 1 महीने में ही आपकी यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

एलर्जी और होमोपैथी :----

होम्योपैथिक दवाईयों द्वारा ही एलर्जीग्रस्त व्यक्ति को सुरक्षित व स्थाई रूप से रोगमुक्त किया जा सकता है , क्योंकि केवल होम्योपैथिक में ही सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक रोग लक्षणों को अचूक उपाय है यह मेरा निजी अनुभव है।
सावधानियां:----
एलर्जीग्रस्त व्यक्ति को निर्धारित समय पर नित्य व्यायाम , योग , आसन , सात्विक व उचित आहार - विहार तथा शुद्ध जल का सेवन करना जल्दी लाभ प्रदान करता है ।
सर्दी से होने वाली एलर्जी के लिए कया खाये:------
सर्दी के मौसम में होने वाली एलर्जी के लिए कया खाये। ठंड और बिमार होने के कारण अन्य किसी कारण से अत्यन्त कमजोर व अशक्त हुए रोगी को आधा आवंला तथा दस ग्राम अदरक अच्छी तरह कुचलकर पानी में उबाल कर व छान कर सुबह शाम पिलायें ।
अगर अदरक व आंवला ताजे न मिले तो 5 ग्राम सौंठ व 5 ग्राम सूखा आंवला पीसकर व पानी में उबालकर भी दे सकते हैं । इसको स्वादिष्ट बनाने के लिए थोड़ा सा सेंधा नमक या शहद मिला सकते हैं।
कमजोर व अशक्त व्यक्ति की कमजोरी दूर करने के लिए उसे केला खिलाइये केला नेत्र रोगों में भी अत्यन्त गुणकारी है । रोटी की जगह केला खाने से भूख भी मिट जाती है । केला कभी एक न खाये । कम से कम दो केले एक साथ खायें ।

छोटे कमजोर बच्चों को दूध में केला मिला कर दें । दूध में उबालकर 8-10 मुन्नका तथा 20-25 किशमिश रोज खाने से शरीर में शक्ति आती है , कबज दूर होती है और ठंड कम लगती है । अगूर खाने से भी शरीर में शक्ति आती है । गुड़ खाने से शरीर की थकावट व कमजोरी दूर होती है और ठडं होने वाली बीमारियों से बचाव होता है। 

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