आयुर्वेद के अनुसार विरूद्घ आहार क्या खाये और क्या ना खाये ....





विरुद्ध आहारः किसके साथ क्या खाएं और क्या ना खाएं

हमारे जीवन में हमारे लिए खाने का बहुत महत्व है। अक्सर आपने बहुत सारे लोगों को देखा होगा कि बिना सोचे समझे कुछ भी खा लेते हैं,खासकर जब शादियों में free का मिल रहा हो, पर आयुर्वेद के अनुसार हर चीज का खाने का समय है और किस चीज के साथ क्या खाएं और क्या ना खाएं यह बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। वरना ऐसी गलती करने पर हम बीमार पड़ सकते हैं या तो हमें food poisoning हो जाएगी या फिर शरीर किसी गम्भीर बीमारी को पकड़ लेगा क्योंकि हमारा शरीर वात, पित्त, कफ तीन तरह मेल से बना हुआ है।

ऐसा खाना खाने कई लोगों का पेट खराब होने लगता है तो कुछ लोगों को अन्य तरह की समस्याएं होने लगती हैं। दरअसल कुछ लोग ये बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते कि किस चीज के साथ क्या नहीं खाना चाहिए। बहुत से खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिनका मेल सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। 
आयुर्वेद में खानपान को लेकर कई नियम बताए गये हैं जिसमें से विरूद्ध आहार का नियम प्रमुख है।
विरूद्ध आहार के अंतर्गत यह बताया गया है कि किन खाद्य पदार्थों को साथ में नहीं खाना चाहिए।

आइए हम विस्तार से जानते हैं की किस चीज के साथ क्या खाएं और क्या ना खाएं------


कुछ पदार्थ तो स्वभाव से ही हानिकारक होते हैं। जबकि कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जो अकेले तो बहुत गुणकारी और स्वास्थ्य-वर्धक होते हैं, लेकिन जब इन्हीं पदार्थों को किसी अन्य खाद्य-पदार्थ के साथ लिया जाए तो ये फायदे की बजाय सेहत को नुकसान पहुँचाते हैं। ये ही विरुद्धाहार कहलाते हैं।

विरुद्ध आहार का सेवन करने से कई तरह के रोग होने का खतरा रहता है। क्योंकि ये रस, रक्त आदि धातुओं को दूषित करते हैं, दोषों को बढ़ाते हैं तथा मल को शरीर से बाहर नहीं निकालते और कब्ज की शिकायत होने लगती और ऐसा होने पर मल पेट में सडता रहता है जिससे हम पेट की बिमारिया सबसे ज्यादा उत्पन्न होती है।ङ

ये विरुद्धाहार अनेक प्रकार के होते हैं, जैसे-


बरसाती मौसम--- बरसात के मौसम में आयुर्वेद के अनुसार कच्चा दूध और दही को खाना निषेध माना गया है इसीलिए सावन के महीने में शिवलिंग पर दूध और दही चढ़ाने का महत्व बताया गया है, ताकि लोग दूध ना पी कर उसको धर्म के साथ जोड़ दिया गया है। इस महीने में भूलकर भी कच्चा दूध ना पिए। दुघ को हमेशा उबालकर ही पिये।


सावन के महीना----

सावन के महीने में कढी खाने के लिए भी विशेष रूप से मना किया जाता है क्योंकि इसके खाने से हमारे शरीर में बाई ( uric acid ) की वृद्धि हो जाती है इसीलिए सावन के महीने में कढी खाने के लिए मना करते हैं। अगर आप इसे खाने के बहुत शौकीन हैं तो इसमें बहुत ज्यादा लहसुन, अदरक और साथ में हींग डालकर खाना ही उचित माना गया है, वरना यह आपको नुकसान ही करेंगी। इसको खाने से पेट संबंधी रोग सबसे ज्यादा बढेंगे।

विरुद्धाहार :  जैसे- नमी-प्रधान स्थानों में नमी वाले, चिकनाई युक्त, ठंडी तासीर वाली चीजों का सेवन करना मना होता है।

2- मौसम के अनुसार - 
सर्दी में ठंडी व रुखी चीजें खाना सेहत के लिए हानिकारक होता है।

3- पाचक-अग्नि की दृष्टि से : 
जैसे- मन्द अग्नि वाले व्यक्ति को भारी, चिकनाई युक्त, ठण्डे और मधुर रस वाले या मिठास युक्त भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।

4- मात्रा की दृष्टि से: 

जैसे- शहद और घी का समान मात्रा में सेवन करना विष के समान है, परन्तु अलग अलग मात्रा में सेवन करना अमृत माना गया है।

5- दोषों की दृष्टि से- 

जैसे- वात-प्रकृति वाले लोगों को वात बढ़ाने वाले पदार्थ और कफ-प्रकृति वाले लोगों को  कफ-वर्द्धक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

6- पाक की दृष्टि से- : 
जैसे- खट्टे पदार्थों को ताँबे या पीतल के बर्तन में पका कर खाना निषेध माना गया है ।

7- वीर्य की दृष्टि से : 

शीतवीर्य पदार्थों को उष्ण वीर्य पदार्थों के साथ खाना, जैसे – शीतवीर्य संतरा, मौसम्मी, अनानास आदि को दही अथवा लस्सी के साथ सेवन  करना।

शारीरिक अवस्था की दृष्टि से- 

जैसे- अधिक चर्बी वाले अर्थात् मोटे व्यक्तियों द्वारा चिकनाई युक्त पदार्थों (घी, मक्खन, तेल आदि) का सेवन तथा कमजोर मनुष्यों द्वारा रूक्ष और हल्के (लघु) पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

निषेध की दृष्टि से- 
कुछ विशेष पदार्थों के सेवन के बाद उनके कुप्रभाव से बचने के लिए किसी अन्य विशेष पदार्थ का सेवन अवश्य करना चाहिए या उसके बाद किसी पदार्थ का सेवन एकदम नहीं करना चाहिए।  इस नियम का उल्लंघन करना निषेध की दृष्टि से विरुद्धाहार है।
जैसे- घी के बाद ठण्डे जल आदि पदार्थों का सेवन करना, जबकि घी के बाद गर्म जल या गर्म पेय लेने का नियम है। गेहूँ व जौ से बने गर्म भोजन के साथ ठण्डा पानी पीना, भोजन के पश्चात् व्यायाम करना, इत्यादि।

संयोग की दृष्टि से-
 कुछ पदार्थों को एक-साथ या आपस में मिला कर खाना संयोग की दृष्टि से विरुद्धाहार है, जैसे खट्टे पदार्थों को दूध के साथ खाना, दूध के साथ तरबूज व खरबूजा खाना, दूध के साथ लवण युक्त पदार्थों का सेवन करना।


कौन सी चीजों के साथ क्या नहीं खाना चाहिए------

दूध के साथ : दही, नमक, मूली, मूली के पत्ते, अन्य कच्चे सलाद, सहिजन, इमली, खरबूजा, बेलफल, नारियल, नींबू, करौंदा,जामुन, अनार, आँवला, गुड़, तिलकुट,उड़द, सत्तू, तेल तथा अन्य प्रकार के खट्टे फल या खटाई, मछली आदि चीजें ना खाएं।

दही के साथ : 
खीर, दूध, पनीर, गर्म पदार्थ, व गर्म भोजन, चाय, खीरा, खरबूजा आदि ना खाएं।

खीर के साथ : 
कटहल, खटाई ,दही, नींबू, सत्तू, शराब आदि ना पिये।

शहद के साथ: 
घी (समान मात्रा में पुराना घी), वर्षा का जल, तेल, वसा, अंगूर, कमल का बीज, मूली, ज्यादा गर्म जल, गर्म दूध या अन्य गर्म पदार्थ, शार्कर (शर्करा से बना शरबत) आदि चीजं ना खाएं। शहद को गर्म करके सेवन करना भी हानिकारक है।

ठंडे जल के साथ- 
घी, तेल, गर्म दूध या गर्म पदार्थ, तरबूज, अमरूद, खीरा, ककड़ी, मूंगफली, चिलगोजा आदि चीजें ना खाएं।

गर्म जल या गर्म पेय के साथ-
 शहद, कुल्फी, आइसक्रीम व अन्य शीतल पदार्थ का सेवन ना करें।

घी के साथ– समान मात्रा में शहद, ठंडे पानी का सेवन ना करें।

खरबूजा के साथ- लहसुन, दही, दूध, मूली के पत्ते, पानी आदि का सेवन ना करें.

तरबूज के साथ–  ठण्डा पानी, पुदीना आदि विरुद्ध हैं।

चावल के साथ–  सिरका और चाय ना पिये ।

नमक- अधिक मात्रा में अधिक समय तक खाना हानिकारक है।और दुध वाले खाद पदार्थों के नमक खाना निषेध माना गया है।

उड़द की दाल के साथ– मूली और दुघ ना ले।

केला के साथ- मट्ठा पीना हानिकारक है।

घी- काँसे के बर्तन में दस दिन या अधिक समय तक रखा हुआ घी विषाक्त हो जाता है।

दूध, सुरा, खिचड़ी- इन तीनों को मिलाकर खाना विरुद्धाहार है। इससे परहेज करें.

इस प्रकार के विरुद्ध आहार के सेवन से शरीर के धातु और दोष असन्तुलित हो जाते हैं, परिणामस्वरूप अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं। अतः इन सबका विचार करके ही खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

विरुद्ध आहार एवं उनसे होने वाले रोग :

चर्मरोग,फूड पॉयजनिंग,नपुंसकता,
पेट में पानी भरना, बड़े फोड़े, भगन्दर,,डायबिटीज,पेट से जुड़ी बीमारियां,बवासीर,कुष्ठ,सफेद दाग,
टीबी,जुकाम आदि।

इस प्रकार खाने खाते समय हमेशा धयान रखे कया खाये और कया ना खाये। आयुर्वेद के अनुसार यह विरूद्ध आहार लेने से हमें फायदे की बजाय नुकसान हो सकता है कयोंकि हमारा शरीर वात ,पित ,वायु के मेल से बना हुआ है। जिसके कारण हमें भोजन करते समय विशेष धयान रखना चाहिए।

हमारा सवास्थय ही सबसे बड़ा धन है, अगर सवास्थय ठीक है तो झोपड़ी भी अच्छी लगती है, अगर स्वास्थ्य ही ठीक नहीं है तो फिर महल में भी मन नहीं लग सकता।

इसलिए अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खाने-पीने का विशेष ध्यान रखें अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे प्लीज शेयर करना ना भूले।

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