मन को एकाग्र कैसे करें | धयान( meditation)करने के लाभ


Tittle- चंचल मन को एकाग्र कैसे करें और ध्यान कैसे लगाएं.
हमारे इस जीवन के उथल पुथल और भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने लिए समय नहीं निकाल सकते और हमें पता ही नहीं चलता कब हमारी जिंदगी बीत गई, और फिर पछताने के सिवा कुछ नहीं रहता। आज मैं आपके साथ मन को एकाग्र करने की विधि और ध्यान कैसे लगाएं के बारे में विस्तार से बताने जा रही हूँ।  जिसे अपनाकर आप भी अपने आपको प्रभु नारायण के चरणों में लगा सकते हो, और प्रभु ही हमारा सबसे अच्छा दोस्त, माता पिता और सब कुछ है। बाकी सारी दुनिया सिर्फ दिखावे मात्र की है, चाहे इसमें अपनी औलाद भी क्यों ना हो।

एकाग्रता कैसे बढाये- 
चंचल मन, अशांत मन, विचलित मन  यह सब हमारे स्वास्थ्य के बहुत  बड़े शत्रु हैं। हम सबके लिए चिंता से बच कर रहना सबसे ज्यादा जरूरी है, क्योंकि चिंता हमें 1 दिन चिता में ले जाती है। इस अवस्था से बाहर आने के लिए हमें अपने आप को प्राणायाम और योग के द्वारा ठीक करना होगा। यह तभी संभव है जब हम खुद के लिए जीना सीखें।
धयान कैसे लगाये-
 इसके लिए हमें लंबी सांस छाती से नहीं बल्कि पूरा ध्यान लगाकर फिर से सांस लो और धीरे-धीरे सांस लेते हुए पेट को फुलाकर   इस पर ध्यान केंद्रित करो और सोचो कि जीवन शक्ति अंदर खींच रहा हूं, और धीरे-धीरे सांस बाहर फेंकते  हुए यह सोचे कि गंदे विचार, बीमारियां, बूरी आदते हम सब बाहर फेंक रहे हैं और पेट को पूरा चिपक जाने दें ।
यह क्रिया 5 मिनट से शुरू करके हर रोज एक घंटा तक करनी चाहिए। इसके लिए हमें सुखासन में बैठकर पीठ को सीधी रखते हुए प्राणायाम करते हुए  ध्यान लगाने से मन की एकाग्रता प्राप्त होती हैं। मन शांत होगा ध्यान में दोनों आंखों के बीच में जो स्थान है, दोनों आंखों से  उस जगह पर अपनी दृष्टि लगाएं और अपने इष्ट देव की मूर्ति सामने रखकर आंखें बंद करके उसे मस्तक पर देखने की कोशिश करें। 
 ध्यान 10 से 15 से शुरू करके धीरे धीरे  एक घंटा तक करें।  ऐसा करने से हमें ध्यान लगाने की आदत पड़ जाएगी और हमारे अंदर एक नई ऊर्जा प्राप्त होगी।
प्रभु नारायण के किसी भी एक नाम को हजारों रूप में से अपनी पसंद के एक रूप को जप मन ही मन तीव्र गति से जपना शुरू कर दें । ऐसा करने से मन व्यस्त हो जाएगा और हमें शांति प्राप्त होने शुरू हो जाएगी और जिस कारण हमारा मन  नियंत्रण मे आना शुरू हो जाएगा। अपनी पसंद का कोई भी काम करने में लग जाए और दोनों मनो को पूरा पूरा उसमें लगा दें, काम भी सुंदर होगा मन भी काबू  में आ जाएगा।  बुरे विचार जब भी आने लगे उन्हें तुरंत भगा दो वह तुम्हारे अनिष्ट करने के लिए ही आए हैं। इस प्रकार यह प्रक्रिया करने से बुरे विचारो को बंद करना सीख जाओगे।
हर एक काम को शांति और विवेक से सोच कर आगे बढ़े नारायण प्रभु देवता का नाम लेकर कार्य शुरू करें। कल क्या मिलेगा यह प्रभु पर छोड़ दें। इसकी चिंता ना करें। एकांत मे बैठकर अपने लिए  समय अवश्य निकालें।  प्रभु को अपने इष्ट देव का चिंतन से, प्रार्थना, ध्यान, जप करने के लिए ऐसा करने से मन में बैठे हुए अशुभ संस्कार, गंदे विचारो खतम होंगे  और एक पॉजिटिव ऊर्जा उत्पन्न होगी।  चंचल मन  की एकाग्रता  प्राप्त होगी,दैनिक जीवन की नोरमल बातों का दोष अपने  प्रभु को मत दो , कयोंकि भगवान् हमें दुख देने वाला नहीं हमें सुख देने वाला है। ऐसा करके हम प्रभु का अपमान करना है। 
 छोटी-छोटी अप्रिय घटनाओं में कार्यों में अपने अन्दर की शक्ति को  काम में लगाओ और मन को एकाग्र रखो,  मन को चंचल ना होने दो। मेरा मन अब मेरे बस में है, मैं मन के बस में नहीं हूं, मैं जैसा चाहता हूं मेरा मन शांत है यह संकल्प आप हर समय खाते पीते, घूमते समय, बैठते समय, सोने के समय  और जागने के साथ काम करते एवं दृढ़ संकल्प को याद रखें इसे बार-बार दोहराते रहें आपको सफलता अवश्य मिलेगी। चंचल मन शांत रहने लग जाएगा प्रभु के साक्षात दर्शन होने लग जाएंगे। सुख-दुख सफलता -विफलता इन सबसे  ऊपर उठते हैं यह लगातार कोशिश करते रहे इसका रिजल्ट आपको जरूर मिलेंगा।

मन को नियंत्रण करने की विधि- 

यदि आप अपना कल्याण चाहते हो तो इंद्रियों को वश में करने के लिए मन पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है,  और मन को वश में करना बड़ा ही कठिन काम है। एक सीधा और पक्का उपाय है कि मन को प्रभु नारायण में पूरी तरह लगा दो। इच्छा और लालसा मन के कारण ही उत्पन्न होती है।
 अगर आप सच में ही प्रभु के दर्शन करना चाहते हो तो अपने मन को जिस प्रकार छोटे बच्चे को हम पढ़ने के लिए बिठाते हैं उस प्रकार से कंट्रोल करना सीखना होगा। यह मन  तभी  कंट्रोल में आएगा। यह एक दिन में संभव नहीं होगा धीरे-धीरे अभ्यास करते हुए इस क्रम को आगे बढ़ाते रहें और फिर 1 दिन आएगा कि आपको अपने मन पर कंट्रोल करना आ गया। अगर मन को कंट्रोल करना सीख गए तो आप  प्रभु नारायण के बहुत नजदीक पहुंच गए , फिर आप प्रभु नारायण से अपने मन की हर बात कह सकते हो और उसकी सुन भी सकते हो।
 वह हमारी हर बात का जवाब देते हैं सिर्फ तब जब हम मन की वाणी से मन के द्वारा ही प्रभु तक पहुंचाते हैं। यह तभी संभव है जब हम अपने मन को ध्यान लगाकर प्रभु मे लिन कर लेते हैं।

इन्द्रियो को कैसे वश में करें- 
हमारी जीभ को चटपटा और मीठा खाने की लालसा, नाक को अच्छी सौगंध की चाह, कानों को मीठे मीठे वचन सुनने की इच्छा, आंखों को  सौंदर्य देखने की अभिलाषा, शरीर को बढ़िया से बढ़िया वस्त्र पहनने की और ऐसो आराम करने की चाहत, प्रत्येक इंद्रियों की अपनी अलग अलग चाहना सिर्फ मन के कारण है, और यह इच्छा इंद्रियों की जितनी तुम पूरी करोगे उतनी ही ज्यादा यह इच्छा बढ़ती चली जाएगी ।पूरी तो कभी भी होगी ही नहीं और इच्छा, लालसा पूरी ना होने पर दुख , जलन,  द्वेष की भावना, बदल लेने की भावना पैदा होगी इसका नतीजा एक मात्र सिर्फ दुख है।
 मन को कंट्रोल करना, वश में करना और प्रभु नारायण में मन लगाना ऐसा कर सको तो फिर शांति और आनंद ही आनंद रहेगा। आपको प्रभु के नजदीक पहुंचने का रास्ता बहुत आसानी से मिल जाएगा। इच्छा और लालसा के तुम दास बन जाओगे तो समझ लो तुम्हारा सर्वनाश होगा यह जन्म और अगला जन्म भी ।अगर आपने अपने मन को कंट्रोल कर लिया तो फिर आप भगवान के सबसे फेवरेट बच्चे बन जाओगे। हमारे मन पर पिछले जन्म के संस्कारों का ही प्रभाव रहता है। अच्छा हो या बुरा जो भी हो इस जन्म में हम जो कार्य कर रहे हैं जिन संस्कारों में हम जी रहे हैं उन सभी संस्कारों का प्रभाव हमारे इसी जन्म में भी और अगले जन्म में भी अवश्य पड़ेगा। इसलिए अच्छे ही संस्कार करें, अच्छे वातावरण में रहे, बच्चों को भी अच्छे संस्कार दें। 
इस इस विधि को अपनाकर अपने मन और इंद्रियों को वश में करके आप अपने मन को एकाग्र कर सकते हो और ध्यान लगा सकते हो।
 ध्यान लगाना यानी प्रभु नारायण के दर्शन करना यह तभी संभव होगा जब हम अपनी इंद्रियों को काबू में कर लेंगे , वरना हमारी इंद्रियों को तो हर रोज नए नए वस्त्र और नए नए स्वाद भरी चीजों का आनंद प्राप्त करने की आदत है। जो हमें प्रभु नारायण के नजदीक जाने ही नहीं देती।

प्रभु नारायण को हमेशा याद रखें उनकी भक्ति उनकी सेवा, दीन दुखियों की सेवा, सत्संग कीर्तन, भजन, पूजा पाठ, हवन आरती से अधिक अच्छे संस्कार घर में करने से  बच्चों में अच्छे संस्कार  पैदा होते हैं।  दान हमेशा दोनों हाथों से सच्चे मन से देना चाहिए। जितना हो सके उतना अपनी इच्छा के अनुसार दे। जो दान देता है वह कभी भी घाटे में नहीं रहता हमेशा दान लेने वाला  ही घाटे में रहता है।  दान देने से मन शांत होता है। दान देने से हमारा कल्याण भी होगा हमारे पाप भी कट जाएंगे। मन को शांत रखने के लिए शुद्ध सात्विक भोजन खाएं। प्रभु नारायण के प्रति समर्पण भाव होना बहुत जरूरी है। मानव के मुंह में चमड़े की जीभ है, वह चाहे तो आदर भी दिलवा सकती हैं और चाहे हमें पिटवा भी सकती हैं। द्रौपदी ने मात्र इतना ही कहा था कि अंधे के पुत्र अंधे ही होते हैं जिसका परिणाम भयंकर महाभारत के रूप में सामने आया था।
 उस युद्ध के  कारण  भारत ने जो प्रगति की थी वह सब नष्ट भ्रष्ट हो गई थी। मन को संतुलन बनाए रखना जीवन के सबसे बड़ा उपयोगिता है।

ध्यान कैसे लगाये- 
ध्यान लगाना और मन को एकाग्र करना कोई मुश्किल काम नहीं है बस जरूरत है तो हमारी लगन और मेहनत की बड़े-बड़े संत ध्यान और मन को एकाग्र करके ही दुनिया में अपना नाम अमर करके गए हैं जैसे-  संत कबीर और गुरु नानक जी।
 अगर आप भी अपने मन को एकाग्र करना चाहते हो  तो 
किसी कुटिया या जंगलों में जाने की जरूरत नहीं है। यह हम घर पर रहकर भी कर सकते हैं बस जरूरत है हमारे एक संकल्प की
 जो हमें करना होगा इसको करने के लिए हमें अपने नियम का पालन करना होगा। यह तभी संभव होगा अगर हमारे मन में भगवान को जानने और पहचानने की लगन होगी ।भगवान को आप किसी भी रूप में देख सकते हो ,जिस देव को मानते हो उसका ध्यान करें और अपनी आंखें बंद करके मन ही मन याद करें कि मेरा भगवान मुझे देख रहा है, मेरी हर बात सुन रहा है, वह मेरे बहुत करीब है, और मेरी हर समस्या का समाधान उसके पास है। इस प्रकार करने से आप अपने मन की शांति को प्राप्त कर सकते हो और अपनी जीवन की उथल-पुथल को हर बुरी बुरी परिस्थिति को सहन करने की शक्ति आ जाती है। मन को एकाग्र करने के बहुत सारे लाभ है ।

धयान के लाभ- 

 हमारे शरीर के रोगो को हम शारीरिक बीमारी कहते हैं और शोक को सभी तरह के मानसिक दुख। दोनों की ही उत्पत्ति मन, मस्तिष्क और शरीर के किसी हिस्से में होती है। ध्यान उसी हिस्से को स्वस्थ कर देता है। ध्यान मन और मस्तिष्क को भरपूर ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है। हमारा शरीर सवसथ होकर रोगो से लड़ने की क्षमता प्राप्त करने लगता है। चिंता और चिंतन से दोनों ही खत्म हो जायेगी।

प्रतिदिन तीन माह तक सिर्फ दस मिनट का ध्यान करें। आपके मस्तिष्क में परिवर्तन होंगे और आप किसी भी समस्या को पहले की अपेक्षा सकारात्मक तरीके से लेंगे। केवल  तीन माह में हर तरह के रोग को रोककर शोक को मिटाने की क्षमता है ध्यान  लगाने में ।  

ध्यान का नियमित अभ्यास करने से आत्मिक शक्ति बढ़ती है। आत्मिक शक्ति से मानसिक शांति की अनुभूति होती है। मानसिक शांति से शरीर स्वस्थ अनुभव करता है। ध्यान के द्वारा हमारी उर्जा केंद्रित होती है। उर्जा केंद्रित होने से मन और शरीर में शक्ति का संचार होता है एवं आतमा को बल मिलता है।

ध्यान से हमारा  विजन पॉवर बढ़ता है तथा व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है।

मानसिक क्षमता बढ़ने के कारण सफलता के बारे में सोचने मात्र से ही सफलता आपके नजदीक आने लगती है । 
खुद तक पहुंचने का और खुद को पहचानने  एक मात्र मार्ग ध्‍यान ही है। ध्यान को छोड़कर बाकी सब उपाय पाखन्ड है।

ध्यान से तनाव के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। निरंतर ध्यान करते रहने से जहां मस्तिष्क को नई उर्जा प्राप्त होती है वहीं वह विश्राम में रहकर थकानमुक्त अनुभव करता है। अच्छी नींद लेने के लिए  भी अधिक लाभदायक होता है ध्यान।

ध्यान से उच्च रक्तचाप नियंत्रित होता है। सिरदर्द दूर होता है। शरीर में प्रतिरक्षण क्षमता का विकास होता है, जोकि किसी भी प्रकार की बीमारी से लड़ने में महत्वपूर्ण है। ध्यान से शरीर में स्थिरता बढ़ती है। यह स्थिरता शरीर को मजबूत करती है।
मोक्ष प्राप्त करने और कोई मार्ग नहीं है केवल ध्यान से से हम मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं इस जन्म मरण के चक्कर से बच सकते हैं।
Last alfaaz-
 ध्यान ही एकमात्र इंसान के लिए एक ऐसी औषधि है जिसे अपनाकर हम अपने शरीर और आत्मा को स्वस्थ कर सकते हैं। आत्मा हमारे शरीर का एक ऐसा बिंदु है जो हमारे शरीर से निकलकर फिर ब्रह्मांड में मिल जाती है। यह शरीर तो हड्डी मास का पुतला यहीं पड़ा रह जाता है। जिसकी सुख सुविधा के लिए हम दिनभर भागते रहते हैं और आत्मा फिर जन्म लेने के लिए मजबूर हो जाती है। इसलिए इस जन्म में ध्यान लगाकर मन को एकाग्र करके आत्मा को जानना बहुत जरूरी है, ताकि हमारे अगले जन्म में किसी भी प्रकार का दुख हमें प्राप्त ना हो।
 हम ध्यान लगाकर खुद और भगवान को जान सकते हैं जिसने भगवान को और खुद को जान लिया उसकी फिर किसी प्रकार की कोई इच्छा नहीं रहती।




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