भगवान् से प्रार्थना कैसे करें | भगवान् से आशीर्वाद कैसे ले | How to pray to God |


Tittle- भगवान् की पुजा  और जप कैसे करें- 
हम सब उस अदृश्य शक्ति के बारे में जानते हैं और उसको मानते भी हैं लेकिन उसको किस प्रकार याद करें वह कैसे अपने मन की बात उस तक पहुंचाई यह बहुत उलझन भरा सवाल हमारे हम सबके मन में रहता है पर कोई हमें इसका जवाब नहीं दे सकता क्योंकि सही उत्तर किसी के पास भी नहीं है सभी अपने धर्म ग्रंथों और शास्त्रों के अनुसार चल रहे हैं आज मैं आपके साथ इसी टॉपिक पर कुछ ऐसी विशेष बातें शेयर करने जा रही हूं. जिनको अपनाकर आप भी अपना जीवन में बदलाव ला सकते हैं और अपने मन की बात और मनोकामना को भगवान के सामने रख सकते हो.

अदृश्य शक्ति की महिमा-

आप जिस भी धर्म, भगवान या शक्ति  को भी नाम को मानते हो आप उसको छोड़िए मत और कभी भी प्रपरिवर्तन मत करिए। अपने धर्म को छोड़ना एक बहुत बड़ा पाप है। राम का नाम राम से भी बड़ा है और सबसे बड़ा है।यह नाम  एक अमूल्य हीरा है, इसे आप परिवर्तन मत करिए।
 अपने धर्म को छोड़ना एक बड़ा पाप है। आपको किस प्रकार का कषट या किसी भी तरह की परेशानी रहती है तो एक बात आप मेरी मान सकते हो, 
एक छोटा सा नाम मगर बहुत ही कीमती और अमूल्य नाम है उसकी सेवा करके देखें वह है राम नाम का शब्द।

 आपको यह जानकर हैरानी होगी यह नाम हीरे से भी अधिक कीमती है, क्योंकि जो इस नाम को जानता है वह अपने करोड़ों रुपए की दौलत भी इसके ऊपर लुटाने को तैयार हो जाएगा। अगर कोई इस हीरे से अनजान है तो वह इस हीरे को 5 रूपये  में भी नहीं खरीदेगा, पर मुझे पता है राम नाम एक पूरा हीरे के समान  है । यह नाम इंसान की नैया को पार लगाने वाला मूल मंत्र है। 
राम नाम का पूरा मूल्य आज तक कोई भी नहीं जान पाया जिसमें उसको थोड़ा से भी जान लिया उसकी मुक्ति हो गई। पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ राम नाम लिखना शुरू कर दो, जब भी समय मिले, जितना भी समय मिले, राम नाम लाल सही से सफेद कागज के ऊपर लिखे।
जब आप इसे  लिखने लग जाए तो फिर चलते फिरते  राम नाम का जाप शुरू कर दो।  माला की  जरूरत नहीं है। प्रत्येक मनुष्य के मन दो होते हैं। एक मन काम करता है और दूसरा मन  बिना कारण बेकार फिजूल की बातों में इधर-उधर घूमता रहता है, या फिर  किसी चिंता में डूबा रहता है।  अतः एक मन से सांसारिक कार्य करते रहो दूसरे मन में राम नाम को जपते रहो, कोई भी काम करते समय किसी से भी बात करते समय, आराम करते समय, राम राम के मानसिक जप का क्रम छुटने ना पाए, अगर टूट भी जाए तो कोई बात नहीं फिर से शुरू कर दो। खाना खाते समय, पानी पीते समय, सब कुछ करते समय,  राम नाम का जप चालू रखो।  जब भी खाना-पीना करें, मन में यह संकल्प विचार करें कि मैं जो खा रहा हूं, सिर्फ तेरे लिए तेरे ही शरीर के लिए खा रहा हूँ। इस शरीर को सव्सथ रखने के लिए ,सुकर्म करने के लिए, हे प्रभु  तेरा दिया हुआ ही खा पी रहा हूं,  तेरा ही प्रसाद पा रहा हूं। क्यों जाऊं तुझे छोड़कर कहीं जाना नहीं चाहता, जहां भी जाऊं जहां भी रहूं, तुम हमेशा सदा मेरे साथ रहो , क्योंकि तेरे सिवा मुझको कोई और सहारा देने वाला नहीं है। मैं तेरी शरण में सिर्फ इसलिए आया हूं, क्योंकि दुनिया साथ छोड़ सकती है पर तू नहीं।
 इस प्रकार अब प्रतिदिन इस मंत्र जाप के साथ राम नाम का उच्चारण करते रहे फिर देखना आप की जिंदगी में चमत्कार होते देर नहीं लगेगी और दुख कैसे खत्म हो जाएंगे आपको पता भी नहीं चलेगा क्योंकि वह अदृश्य शक्ति कुछ भी कर सकती हैं जो इंसान सोच भी नहीं सकता।

 राम लेखन सरल विधि- 

राम लखन विधि- आप 3 महीने लगातार पूर्ण आस्था, श्रद्धा,  विश्वास करके तो देखो। आपको शांति, सफलता अवश्य मिलेगी और एक नया चमत्कार हो जाएगा। खर्चा कुछ भी नहीं है-  " जा पर कृपा राम की होई ता पर कृपा करे सब कोई।" इसलिए आज से ही शुरु करना लिखना शुरू कर दो कयोंकि  यह घन दौलत वाले  अमूल्य खजाने से भी बढ़कर  एक ऐसा अनमोल खजाना है  जिसे प्राप्त करने के बाद कोई और इच्छा नही रहती।  राम नाम एक ऐसी पारस मणि है जिसे पाकर मनुष्य को कुछ और पाने की इच्छा नही होती।
  
कीर्तन व जप की महत्व- 
भगवान श्री कृष्ण ने गीता में जप वह कीर्तन की महिमा सबसे उत्तम बताई है ।जप करने वाले को सभी योगियों में श्रेष्ठ योगी बताया गया है। जो मनुष्य श्रद्धा से भगवान के नाम गुण और लीला आदि का कीर्तन करता है वह भगवान को सबसे अधिक प्यारा है। गीता में भगवान ने कीर्तन की महिमा इतनी बताई कि वह पापी से पापी, दुष्ट से दुष्ट मूर्ख से मूर्ख भी यदि भगवान के नाम का जप करता है तो भगवान उसको अपनी शरण में रख लेते हैं, और उसके सारे दोषो को स्वयं मिटा देते हैं,  एवं उसे धर्मात्मा बना देते हैं। कीर्तन व जप करने से भक्त को वरदान प्राप्त होता है। ऐसे लोगों को भगवान श्री कृष्ण ने श्रेष्ठ बताया है। यही कारण है कि भगवान जप  करने वाले लोगों को ज्ञान ,अज्ञान पवित्रता ,अपवित्रता का ध्यान ना देकर उनका कल्याण करते रहते हैं। इतना ही नहीं गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने यह भी कहा है कि यदि कोई अत्यंत दुराचारी भी भगवान राम के कीर्तन करता है तो ऐसे मनुष्य भी साधु बनने योग्य हो जाता है। जब भगवान कृष्ण संवय  कीर्तन जप भजन के प्रचार-प्रसार पर बल देते हैं तब हम प्राणियों का कर्तव्य है कि हम स्वयं कीर्तन भजन करें ,और इनका प्रचार प्रसार करें।
 अपने आपको भजन कीर्तन में लगाकर ही लिन रहे तभी हमारा कल्याण संभव होगा।

कलयुग में पापों को काटने के लिए और सुख पाने के लिए, प्रभु के दर्शन करने के लिए, सबसे अधिक  शीघ्र फल देने वाला एकदम सरल और सीधा रास्ता है सिर्फ राम नाम जप है।
जहां पर भी भगवान राम का जप व  कीर्तन नाम का वर्णन होता है वहां भगवान देवी देवता, मुनि ,पितर अदृश्य रूप में अवश्य आ जाते हैं और कीर्तन को सुनते भी  हैं और कीर्तन  करने वालों को आशीर्वाद और वरदान दोनों ही देते हैं। 
 जहां पर भगवान श्री राम का कीर्तन होता है,उस कीर्तन में देवताओं के साथ-साथ हनुमान जी भी अवश्य आते हैं।
 भगवान राम का कीर्तन किसी भी स्थान पर किसी भी समय किया जा सकता है ।कीर्तन करने व सुनने के सभी समान रूप से अधिकारी हैं। बिना किसी भी प्रकार के भेदभाव से चिंतन प्रेम पूर्वक ध्यान मन लगाकर शांत चित् भाव के साथ उच्च स्वर में  जप व कीर्तन किया जाना चाहिए।  उस समय कोई और बात मन में नहीं आनी चाहिए। इस प्रकार करने से कीर्तन अधिक फलदाई होगा।
 राम नाम का जाप और कीर्तन हम सब के लिए कल्याण का भंडार है। कलयुग के विकारों को नष्ट करने वाला और पवित्र करने वाला राम नाम कीर्तन जप से मुक्ति मिल जाती है।
 कलयुग का ऐसा कोई भी दुख नहीं है जो राम नाम कीर्तन से ना कटे। प्रभु राम का पवित्र कीर्तन सभी पापों का नाश और सभी तरह के मनोकामना को पूर्ण करने वाला है। इस नाम से मनुष्य क्या कुछ नहीं प्राप्त कर सकता ।आप खुद इसका इसका अनुभव करके देखें,क्योंकि इस छोटे से राम नाम में एक बहुत बड़ी महाशक्ति छिपी हुई है। संसार में और बहुत कुछ कमाया है लेकिन राम नाम की कमाई जरूर करके देखो ,क्योंकि तुम्हारे साथ और कुछ नहीं जाएगा लेकिन भजन कीर्तन परलोक तक साथ ही जाएगा ,इसमें किसी भी प्रकार का शक नहीं है।

 Last alfaaz- 
इस प्रकार अदृश्य शक्ति का कोई नाम नहीं है उसको बस सिर्फ मन ही मन याद करने का एक अनुभव है. जिस प्रकार इंसान को सर्दी गर्मी का अनुभव होता है उसी प्रकार उसको याद करके हम अनुभव कर सकते हैं और अपने अंतर्मन के बात उस तक पहुंचा सकते हैं वह हमारे मन की बात बहुत जल्दी सुनता है , क्योंकि  दुनिया में उससे बड़ा कोई हमारा मां-बाप या भाई-बहन नहीं हो सकता बाकी सब रिश्ते झूठे हो सकते हैं बस अगर सच्चा रिश्ता है तो उस अदृश्य शक्ति के साथ ही है,  जो हमारा साथ कभी नहीं छोड़ता। 
ओम शांति .

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