मातृ दिवस पर निबंध || नारी शक्ति के रूप || mother day special topic in hindi ||

Tittle- मदर्स डे के विशेष लेख- नारी शक्ति के रूप-  
दुनिया में मां का चरित्र तो और भी अधिक महत्व रखता है जिसने पूरे 9 महीने तक बच्चे को अपने पेट में रखकर और सख्त से सख्त तकलीफ सहन करके और कई तरह के परहेज करके जिंदगी और मौत के बीच में लटक कर उसे जन्म दिया है, और खुद सख्त सर्दी की रातों से बच्चे के पेशाब से तर बतर बिस्तर को बदल बदल कर स्वयं  पेशाब से तर बिस्तर पर सोना और बच्चे को सूखे बिस्तर पर सुलाना और 3 वर्ष तक मल मूत्र से उसको साफ रखना  कितना महत्व रखता है। 
एक औरत एक बच्चे का पालन पोषण करने के लिए अपने तीन साल तक सुध बुध खो देती है,क्योंकि 3 साल तक बच्चे को बहुत ही देखभाल की जरूरत होती है, जो सिर्फ एक मां ही कर सकती है। 

माँ की ममता का महत्व-
गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं, विष्णु के समान कोई देवता नहीं और मां के समान कोई पूजनीय नहीं है। 
मां सर्वोपरि नारी मां है, बेटी है, दोस्त है, जो ममता की देवी है,  स्नेह का भंडार है और त्याग, दया की स्वामिनी है।
श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में सती अनुसूया द्वारा सीता को दी गई पतिव्रत  शिक्षा का वर्णन किया है  उसकी प्रत्येक पंक्ति भारतीय स्त्री के लिए आदर्श एवं याद करने लायक है । 
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श्री भागवत में भी कहा गया है कि जो स्त्री पति में हरि भाव रखकर लक्ष्मी की तरह उसकी सेवा करती है, वह बैकुंठ में हरी को प्राप्त होकर लक्ष्मी की भांति आनंद प्राप्त करती है।
पत्नी पति के परम मित्र है। संसार में जिसका कोई सहायक ना हो उसकी पत्नी जीवन यात्रा में उम्र भर साथ देती है। स्त्री और पुरुष एक दूसरे के पूरक हैं। एक की अनुपस्थिति में दूसरे के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती। पति और पत्नी रूपी दो पहिए गृहस्थी  की गाड़ी को मंजिल तक पहुंचाने के लिए एक दूसरे का जीवन भर साथ देते हैं।  यदि कोई पति सफल होता है तो निश्चय ही  पत्नी उसमें पूर्ण योगदान देती है।  
इसी तरह यदि कोई पत्नी सफलता के शिखर पर पहुंचे तो उसके पति के योगदान को भी नकारा नहीं जा सकता।

औरत ममता का सागर है-
ईश्वर ने स्त्री की रचना करते समय उसमें अनगिनत भावों को भरा है जैसे-  प्रेम ,करुणा ,वात्सल्य की मूर्ति के रूप में स्त्री स्वयं अपने भीतर कई तरह के किरदार को समेटे परिवार के प्रति पूरी तरह समर्पित होती है। वह बचपन में आज्ञाकारी बेटी, युवा अवस्था में अपने छोटे भाई बहनों के लिए मार्गदर्शक ,मां-बाप का सहारा और भाई की संभल होती है। शादी के बाद वह अपने नए जीवन की शुरुआत ससुराल में करती है। वहां एक ही समय में समझदार पत्नी, आज्ञाकारी बहू ,व ननद और देवर की दोस्त बनकर ससुराल के प्रति अपने अपने कर्तव्यों का पालन करती है। इन सब किरदारों के बीच प्रत्येक स्त्री के जीवन में फिर वह क्षण भी आता है। जब उसका नन्ना बचपन फिर एक बार बेटा या बेटी के रूप में उसकी गोद में अठखेलियां करने लगते हैं। किसी भी स्त्री की पूर्णता मां के रूप में ही पूर्ण मानी जाती है। अपने जीवन के इतने पड़ाव को पार करने के बाद और अपने ही अक्स को अपनी संतान के रूप में देखकर पुलकित हो उठती है।  यही उसकी पूर्णता होने का एहसास कराता है ।

बच्चों की गुरु -
मां के रूप में स्त्री अपने बड़े हो रहे बच्चों को गुरु की भांति सामाजिक जीवन की व्यवहारिक शिक्षा देती है । अपने पति और बच्चों के बीच भावनाओं को सेतु बना कर दोनों पक्षों को समान रूप से तवज्जो देती है।

नारी घर को सवर्ग बना देती है-
एक से उजुड़े हुए अशांन्त क्लेस घर को एक नारी स्वर्ग बना देती है घर में सुख, शांति, आनंद, खुशियां, हंसी की आवाज सबसे प्रेम पूर्ण व्यवहार प्रत्येक दिन बड़ों के चरण स्पर्श छोटों को दुलार यह सारे गुण बच्चों में सिर्फ एक नारी ही पैदा कर सकती है।
एक अच्छी औरत प्रत्येक दिन में सुबह और शाम को प्रभु नारायण की पूजा पाठ, धूप दीप ,आरती करती है जिसका सद्भभाव पूरे घर के वातावरण पर पड़ता है।
घर के प्रत्येक सदस्य पर इस बात का असर देखने को मिलता है। सदृ गृहणी कभी थकती नहीं, कभी हार नहीं मानती ,कठिन से कठिन कष्टों और मुसीबत में भी मुस्कुराती रहती है, और उसके कारण घर की सारी विपदाएं कट जाती हैं।  वहां पर शांति, सुख, प्रेम आनंद ही आनंद हो जाता है।
मनुस्मृति में स्त्री कर्तव्य का वर्णन किया गया है। इनमें उल्लेख किया गया है कि औरत को  विवाह के बाद  घर के काम में दक्ष होना चाहिए। घर की साज-सज्जा, बुद्धि आदि में चतुर होना, आय व्वय की संभाल रखना, गृह स्वामी होना ,सभी वस्तुओं की संभाल, धार्मिक अनुष्ठानों का संयोजन कामों में एक औरत को महारत होनी चाहिए।
स्त्री को प्रभु नारायण ने सेवा भाव उसके स्वभाव में दिया है। उसके बोलने में मिठास है, नम्रता , प्यार भरा है। नारी एक सेवा की सुंदर मूर्ति है, सास ससुर की सेवा, पति की सेवा, बच्चों की सेवा, नंनद देवर की सेवा, अतिथि सेवा, दुखियों की सेवा, रोगियों की सेवा एक नारी ही कर सकती है ,और प्रत्येक घर में औरत ही सब की सेवा कर रही है, इसमें किसी भी प्रकार का कोई  शक नहीं है। 
सेवा एक ऐसा मंत्र है जिसके द्वारा सभी को वश में किया जा सकता है। सेवा करने के बदले कुछ पाने की लालसा या अभिमान का लोभ कभी भी औरत अन्दर नहीं आता, क्योंकि यह भगवान का दिया हुआ अनमोल तोहफा है। उसके लिए, जो भगवान ने उसको इतना ताकतवर बनाया है कि वह पूरे घर के काम करने के साथ-साथ अपने घर के सदस्यों की सेवा भी कर देती है। इसलिए कभी भी नारी को कमजोर मत समझो और उसकी भावनाओं को ठेस मत पहुंचाओ ।
सेवा करने वालों को आत्म संतोष और परम आनंद की प्राप्ति होती है ।यह एक अमूल्य धन है। यह बात एक नारी अच्छी तरह से जानती है और साथ ही साथ बेटे और बेटियों को भी इस सेवा के लिए वह सुसंस्कृत करती है।
घर में दैनिक कार्यों को नियम अनुसार शांति से और कुशलता के साथ चुपचाप संचालन करती हुई वह धर्म परायण औरत घर को स्वर्ग बना देती है।

लक्ष्मी जी कहती है- कि जिस घर में बर्तन अच्छे से ना रख कर इधर-उधर बिखरे रहते हैं, और सफाई आदि नहीं रखती, सदा पति के खिलाफ बोलती है, दूसरों के घरों में घूमने फिरने की आदत बनी रहती है, और लज्जा छोड़ देती है, आलस्य और नींद में बेसुध होकर सदा खाट पर पड़ी रहने वाली होती है, ऐसी नारीयो से हमेशा के लिए दूर रहती हूं ।
जो औरतें सोम्य वेशभूषा के कारण देखने में प्यारी  होती हैं ,जो सौभाग्यशाली, गुणवती, पतिवर्ता एवं कल्याणमय आचार  विचार वाली होती है ऐसी स्त्रियों में मैं हमेशा निवास करती हूं ।

नारी घर परिवार की धूरी और निर्माता है। जिस घर में सदा चारणी और पुत्तर पतिव्रता नारी होगी उस घर में पवित्रता की वर्षा होगी। वह घर स्वर्ग के समान है। भगवान भी पवित्रता के साथ ही दिखलाई देते हैं। सती व पतिव्रता नारी निश्चित रूप से श्रेष्ठ व पवित्र आचरण ही करेगी।
बच्चों के निर्माण में मां की भूमिका ही अहम होती है। बच्चे की पहली गुरु उसकी मां होती है। एक कहावत भी है जब  माँ ही हो अज्ञान तो बच्चे कैसे बनेंगे महान। माता क अच्छे संस्कारों का बच्चों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा और बच्चे सदाचारी बनेंगे। सदाचारी बच्चे होंगे तो धरती पर स्वर्ग बनेगा ही।

हमारे धर्म ग्रंथों और शास्त्रों में नारी  की बहुत ज्यादा महिमा गाई गई है।  सतयुग में तो यहां तक माना जाता था कि अगर औरत पूजा में शामिल ना हो वह पूजा अधूरी मानी जाती थी।अकेला पुरूष औरत के बिना पूजा नहीं करते थे।

हमारे धर्म शास्त्रों में पतिव्रता के लिए बहुत सारी औरतों का नाम
की प्रसिद्धि पाई है ।
जैसे -सावित्री, पतिव्रत शणिडलिनी, सती कुंती देवी, सती लोपामुद्रा ,सीता, तारामती बाई, जनाबाई ,मीराबाई आदि अनेक नाम उनके अद्भुत कामों के लिए और महान शक्ति की जानकारी के लिए प्रसिद्ध है।  सती दमयंती तो सभी धर्म के कारण अपने मृत पति के प्राण यमराज जी के हाथ से वापस लेकर आई थी। यह कहानी बहुत फेमस है।
आदर्श सती वही है जो पति की सेवा  परमात्मा समझ कर करती हो ।

माँ का महत्व-
मां का दर्जा पिता से भी ऊंचा बताया गया है,क्योंकि पिता तो धन संपत्ति आदि से पालन पोषण करता है पर माँ अपना शरीर देकर अपने बच्चों का पालन पोषण करती हैं। बच्चे को गर्भ में 9 महीने तक धारण करती है और जन्म देते समय प्रसव पीड़ा सहन करती है, फिर अपना दूध पिलाती है और अपनी ममता की छांव में उसका पालन पोषण करती हैं। ऐसी ममतामई जननी कारण पुत्र या पुत्री कभी भी ऋण नहीं चुका सकते। इसलिए कभी भी अपनी मां का या किसी भी औरत का मन ना दुखाए, क्योंकि एक औरत तुम्हें जन्म देकर दुनिया में लाती हैं और दूसरी तुम्हारे लिए अपने मां-बाप का घर बार छोड़कर तुम्हारे घर को सजाने के लिए जिंदगी भर के लिए तुम्हारे घर में आ जाती है।
जो लोग मां और पत्नी को  साक्षात लक्ष्मी मानते हैं ,उन्हें कभी भी किसी प्रकार की कमी नहीं रहती। अपने घर की हर औरत को मां सरस्वती और लक्ष्मी के रूप में अगर देखोगे तो आपको भगवान किसी भी तरह कोई कमी नहीं रहने देंगे।
मां की दुआ में दवा से भी हजार गुना ज्यादा शक्ति होती है। हमारे धर्म ग्रंथों में भी मां की पूजा भगवान से भी पहले बताई गई है। इसलिए अपनी मां के लिए कभी भी बुरा ना सोचे क्योंकि अगर मां नहीं होती तो आप दुनिया में नहीं आते।

Last alfaaz- 
 Mother's day quotes in hindi-
 * माँ भगवान् का दुसरा रूप है ...!!
* मां दुनिया में जीता जागता
 एक फरिश्ता है। 

* मां से बड़ा कोई और दुख दर्द बांटने वाला हमदर्द नहीं है।

* मां घर का सबसे बड़ा 
चौकीदार है..!!

Last alfaaz- 
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