आरती कैसे करें और आरती को कैसे घुमायें | आरती कैसे करनी चाहिए

पुजा के बाद आरती कैसे करें -किसी भी देवी या देवता की पूजा करने के बाद आरती क्यों और कब करनी चाहिए इसके बारे में हम सब के अलग-अलग विचार हैं। आइए जानते हैं आरती करने का महत्व और आरती कब करनी चाहिए। भगवान की पूजा करने के बाद आरती करने का एक विशेष महत्व बताया गया है आरती को  निराजन भी कहा जाता है। जिसने किया आरती उसकी हर तरह से पुजा को सफल माना जाता है।  आरती को हमेशा इंसान को तारने वाली मानी जाती है। 

आरती कैसे करें-

जब हम भगवान की आरती करते हैं तो उस समय दिपक और उसकी बतियों का एक विशेष महत्व बताया जाता है।  आरती करते समय  हम भगवान की मधुर ध्वनि में डूब जाते है और हम तन मन धन से श्रद्धा भाव के साथ भगवान् से जुड़ जाते हैं। ऐसा ही  परमात्मा की आरती करने का अर्थात देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति  हमारे मन को प्रकाशित कर व्यक्तित्व को उज्जवल कर देती है। 


आरती करने का तरीका  -

आरती का महत्व इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि स्कंद पुराण पुराण के अनुसार भगवान की आरती के संबंध में कहा गया है यदि कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता हो या पूजा का विधि विधान सही तरीके से नहीं जानता तो ऐसे में पूजन कार्य करने के बाद श्रद्धा के साथ आरती  ही कर लिया जाए तो भगवान उसकी पूजा को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लेते हैं।

आरती करने का नियम-

 हमारे सनातन धर्म में आरती करने से नहीं बल्कि देखने से भी बहुत लाभ मिलता है पद्मपुराण के अनुसार कपूर की चंदन और कुमकुम आदि की 5, 7, 9 बतिया बनाकर देसी घी या फिर तेल की बतियां बनाकर संख, घंटा आदि बजाते हुए प्रभु की आरती करनी चाहिए। आरती में दिन में कम से कम 2 बार तो अवश्य  की जा सकती है। जयादा तर घरों में आमतौर पर सुबह शाम की आरती की जाती है।  भारत देश में कुछ ऐसे मंदिर हैं जिनमें दिन में 5 बार भी आरती होती है.


आरती का धार्मिक महत्व-

सनातन धर्म के अनुसार आरती को लय व ताल के साथ  गाइ जानी चाहिए। जिससे घर का पूरा वातावरण भक्ति में और भगवान की भक्ति में रम जाता है। यह महोल हर स्थिति में मन को सुकून देने वाला होता है ।अलग-अलग देवताओं की अलग-अलग आरती गाई जाती है इसलिए अलग-अलग वाद्य यंत्रों को बजाकर गायन करते हुए देवी देवता जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार आरती करने वाले व्यक्ति पर ईश्वर की कृपा सदा बनी रहती है।

•आरती का वैज्ञानिक महत्व -

 आरती के लिए प्रयोग में लाए जाने वाली रुई की बत्ती के साथ घी, कपूर जब जलते हैं तो वातावरण सुगंधित हो जाता है। जिसे आसपास की नेगेटिव ऊर्जा खत्म हो जाती है और पोजटीव  ऊर्जा का संचार होने लगता है।  मंदिरों में भी आरति के साथ संख, ध्वनि, घन्टे  घड़ियाल के साथ होती है और घंटे और नाद से कई तरह के शारीरिक कष्ट दूर होते हैं, वह मन को शांति के साथ-साथ मानसिक ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है ।अनेक शोधों से स्पष्ट हो चुका है कि घंटे और संख से निकलने वाली ध्वनि  कीटाणुओं का नाश कर देती है। 


*आरती के बाद क्या काम करें-

 आरती करने के पश्चात दोनों हाथों से आरती को ग्रहण करना चाहिए । ऐसे करने से यह माना जाता है कि ईश्वर की शक्ति उस ज्योति में समाई होती है। जिससे भक्त  अपने माथे और आंखों पर ग्रहण करके धन्य हो जाता है। आरती वह माध्यम है जिसके द्वारा देवी शक्तियां को पूजन स्थल तक पहुंचने का मार्ग मिल जाता है। इसलिए आरती होने के बाद आरती पर दोनों हाथ जोड़कर प्रार्थना करें और अपने हाथों को आंखों और माथे को जरूर छुऐ।

अगर आप पूजा करने के बाद सभी प्रकार की आरतियां नहीं कर सकते  तो ओम जय जगदीश वाली एक ही आरती कर ले, उसमें सभी प्रकार की देवी देवताओं की स्तुति हो जाती हैं। इस प्रकार प्रतिदिन पूजा के बाद एक आरती अवश्य करें अगर आप भी अपनी पूजा को सफल बनाना चाहते हैं। अगर पूजा में किसी भी प्रकार की त्रुटि रह गई है तो पूजा के बाद इसीलिए आरती का महत्व बताया गया है जो हमारी त्रुटि को पूरी कर देती है।

Posted-  by kiran


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