सावन में शिव की पुजा कैसे करें || शिव भगवान् की पुजा करने की विधी विधान ||


Tittle- भगवान् शिव की पुजा कैसे करें ।सावन मास (सावन के महीने) में शिव की पूजा बहुत धार्मिक महत्व रखती है, और यह हिंदू धर्म में बहुत प्रमुख देवता माना जाता  है. यहां शिव पूजा करने का कुछ सरल तरीके दिए गए हैं, आइये जानते है विस्तार से भगवान् शिव की पुजा कैसे करें।

शिव पुजा की विशेष जानकारी-

पूजा स्थल की तैयारी---
 एक शिव मंदिर के आस-पास या घर के एक विशेष कमरे में एक पूजा स्थान तैयार करें. पूजा स्थान को सुंदरता से सजाएं और शिवलिंग या शिव की मूर्ति को स्थापित करें.

स्नान और  पुजा के समय पहनने वाले वस्त्र-
 पूजा करने से पहले नियमित स्नान करें और साफ कपड़े पहनें, परंतु श्वेत वस्त्र प्राथमिकता दें. अगर संभव हो तो एक रुद्राक्ष माला धारण करें.

पूजा सामग्री---
शिव पूजा के लिए आपको नीचे दिए गए सामग्री की आवश्यकता होगी:

शिवलिंग या शिव की मूर्ति

• जल और दूध

• धूप, दीप, अगरबत्ती

• फूल (बेल पत्र, कनेर, गुलाब, चमेली, दालीया)

• फल (बेल, केला, बर्फी, दही)

• पंचामृत (दूध, दही, घी, मधु, शहद)

• रुद्राक्ष माला

• कपड़ा, चादर

• कलश 

पूजा करने की विधि-

पूजा शुरू कैसे करें-
•  पूजा का आरंभ करने के लिए अपने पूजा स्थान पर बैठें और मन को शुद्ध करें. फिर गणेश वंदना करें और गणेश की पूजा करें.

अभिषेक कैसे करें-
  शिवलिंग पर जल, दूध, और पंचामृत से अभिषेक करें. अभिषेक के समय शिव चालीसा, मंत्र या शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें.

पूजा और आरती -
शिवलिंग को फूल, फल और धूप-दीप से सजाएं. शिवलिंग पर चादर चढ़ाएं. फिर शिव जी को मोली बांधें और उन्हें रुद्राक्ष माला से प्रसन्न करें. अंत में शिव आरती गाएं और प्रसाद चढ़ाएं.

व्रत और कथा पाठ का महत्व -
 सावन के महीने में शिव पूजा करते समय, शिव पूजा की कथा का पाठ करें. यह आपको शिव पूजा के महत्व और फलादेश के बारे में जानकारी देता है.

व्रत का पालन- 
सावन के महीने में शिव पूजा के दौरान श्रद्धा और निष्ठा से व्रत का पालन करें. इसके अलावा, सोमवार को सावन के महीने में शिव जी की पूजा को विशेष महत्व दें.

यह थी सामान्य रूप से शिव पूजा करने की विधि सावन के महीने में। हालांकि, पूजा की विधि और अनुष्ठान क्षेत्र से भिन्न भिन्न हो सकती हैं और भारत के विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त होने वाली प्रथाओं और आचारों का आधार बनाती हैं। इसलिए, आपकी स्थानीय परंपरा और आपके आस-पास के मंदिरों या तीर्थ स्थलों की निर्देशिका का पालन करना अच्छा होगा। सर्वाधिक प्रचलित प्रथाओं को समझाने के लिए स्थानीय पुजारी या धार्मिक आचार्य से संपर्क करें।

शिव भगवान् के मनपसंद फूल-
कुछ फूल जिन्हें शिव भगवान् के पूजन में आमतौर पर उपयोग किया जाता है, इनमें लाल और काले रंग के गुलाब, जास्मीन, पारिजात, नीलकंठी, बेल पत्र और दत्तात्रेय फूल शामिल हो सकते हैं। यह फूल भगवान् शिव की पूजा में प्रसाद के रूप में भी प्रयोग  किए जाते हैं।

शिव भगवान् की पूजा में फूलों का महत्व और चढाना  व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर भी निर्भर कर सकता है। इसलिए, यह अपेक्षित होता है कि आप अपने स्थानीय पारंपरिक पद्धति, संस्कार और आपके आस-पास के माहौल के अनुसार फूलों का चयन करें जो शिव भगवान् के पूजन में उपयोगी होंगे।

शिव को चढाने वाली कुछ विशेष  वस्तुए -कौन सी है---

शिव को बेलपत्र, भांग और धतूरा चढ़ाने की प्रथा कुछ धार्मिक संस्कृति और परंपराओं में प्रचलित है, खासकर शिवरात्रि और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर।

शिवलिंग को बेलपत्र कैसे चढाये -
 बेलपत्र को शिव की पूजा में उपयोग किया जाता है क्योंकि इसे मान्यता के अनुसार शिव भगवान् की प्रिय पूजा सामग्री माना जाता है। बेलपत्र को शिवलिंग पर रखा जाता है और उनकी पूजा के दौरान उपयोग किया जाता है।

भांग का भोग लगाये --
भांग शिव की पूजा में उपयोग की जाने वाली पदार्थों में से एक है। भांग को मान्यता के अनुसार शिव की प्रिय औषधि माना जाता है और इसे शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में चढ़ाया जाता है। भांग की प्रसाद के रूप में यह पूजा में बांटा जाता है और भक्तों द्वारा सेवित किया जाता है।

• शिव को धतूरा चढाये ---
 धतूरा भी शिव की पूजा में उपयोग किया जाने वाली पदार्थों में से एक है। यह अनुचित मान्यताओं के चलते और आध्यात्मिक अनुभव के लिए विशेष तत्व माना जाता ह। धतूरा को शिव की पूजा में चढ़ाया जाता है। यह पूजा के दौरान शिवलिंग पर रखा जाता है या उनकी प्रतिमा के सामने स्थापित किया जाता है। 

यदि आप शिव की पूजा करने की सोच रहे हैं, तो आपको अपने स्थानीय संस्कृति, परंपरा और आचार-विचार के अनुसार उचित और सम्मानित तरीके से पूजा करने का सुझाव दिया जाता है। ध्यान दें कि शिव की स्तुति और पूजा मन, वचन और कर्म से की जाती है, और आपकी निःस्वार्थ भक्ति और ध्यान के माध्यम से शिव को समर्पित करें। सावन मास शिव के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।

 शिव के लिए  निषेध वस्तुए- 
शिव भगवान् को तुलसी, तांबे के बर्तन में मिला हुआ दुध नही चढाना चाहिए।
 
 शिव के विशेष मंत्रों की सूची है जो आप सावन महीने में जाप कर सकते हैं: 

• ॐ नमः शिवाय (Om Namah Shivaya): यह मंत्र शिव का प्रमुख मंत्र है और उनकी प्रसन्नता को प्रकट करने के लिए उच्चारित किया जाता है। इसका जाप करने से मान्यता के अनुसार भक्त को शिव की कृपा प्राप्त होती है।

• ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। (Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam): यह महामृत्युंजय मंत्र कहलाता है और इसे अकाल मृत्यु से बचाने और शिव की कृपा को प्राप्त करने के लिए जाप किया जाता है।

• ॐ नमो भगवते रूद्राय (Om Namo Bhagavate Rudraya): यह मंत्र शिव को समर्पित है और उनकी स्तुति का अर्थ है। इस मंत्र के जाप से भक्त को शिव की कृपा मिलती है और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

• ॐ नमः शिवाय गुरवे (Om Namah Shivaya Gurave): यह मंत्र शिव और गुरु को समर्पित है। इसका जाप करने से भक्त को ज्ञान, शक्ति और आनंद की प्राप्ति होती है।

यह मंत्रों की सूची मात्र सूची केवल प्रारंभिक रूप में है और अन्य शिव मंत्र भी उपलब्ध हैं। यदि आप इन मंत्रों का जाप करने की योग्यता और प्राथमिकताएं जानना चाहते हैं, तो आपको संदर्भित आचार्य, पंडित या शिव मंदिर के पुजारी से परामर्श लेना चाहिए। वे आपको सही मंत्रों की संख्या, उच्चारण प्रक्रिया और मंत्रों की महत्वपूर्ण बातें बता सकते हैं।

शिव के मंत्रों का जाप करते समय, अपने मन को शुद्ध और ध्यानित रखें। आप चाहें तो इन मंत्रों का निरंतर जाप कर सकते हैं या रोजाना एक निश्चित संख्या में जाप कर सकते हैं। मंत्रों का जाप करते समय यथासंभव एक प्रतिमा या शिवलिंग के सामक्ष बैठें या ध्यान केंद्रित करें। यदि आपके पास कोई विशेष आचार्य या पंडित नहीं है, तो आप अपने निजी आध्यात्मिक अनुभव के अनुसार अपनी पूजा और जाप की व्यवस्था कर सकते हैं। ध्यान दें कि आपकी निःस्वार्थ भक्ति, समर्पण और आदर्शतापूर्वकता ही मंत्रों की शक्ति को प्रकाशित करेगी और आपको शिव के साथ एकाग्रता और संयम की अनुभूति होगी। सावन मास में शिव के मंत्रों का जाप करने से आप उनकी कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष-
वैसे तो शिव भगवान की पूजा सारे साल की जाती है, लेकिन सावन के महीने का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि हमारे धर्म के अनुसार ऐसा माना जाता है सावन के महीने में भगवान शिव  मंदिरों में ही निवास करते हैं। इसलिए जितना हो सके सावन के महीने में सुबह शाम आप जब भी आपको समय मिले तो भगवान शिव की आराधना अवश्य करें अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए जो आपकी श्रद्धा  हो उसी के अनुसार उनको भी समर्पित करें वैसे तो हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव एक जल लोटे से भी खुश हो जाते हैं कयोंकि उनके तो नाम की शुरुआत ही  भोले भंडारी से होती  हैं। 
Post by kiran

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