सुर्य नमस्कार कैसे करें | सुर्य नमस्कार करने के फायदे | सुर्य नमस्कार करने का सही तरीका |

 Tittle- सूर्य नमस्कार कैसे करें और सूर्य नमस्कार क्या है-  सूर्य नमस्कार का अर्थ है। सूर्य का अर्पण यानी नमस्कार करना है। यह एक तरह का योग क्रिया है। जिसको करके हम अपने शरीर को सही आकार और मन को शांत व स्वस्थ रख सकते हैं । आज हम इस लेख के माध्यम से आपको सूर्य नमस्कार किस प्रकार किया जाता है और उसके करने के क्या लाभ हैं विस्तार से बताएंगे।

आयुर्वेदिक अनुसार सूर्य नमस्कार शक्तिशाली योग में से एक आसान माना जाता है। जो उत्तम व्यायाम भी माना जाता है । सूर्य नमस्कार करने से तन मन और  दोनों की शुद्धि होती हैं। यदि आपके पास समय है और आप चुस्त और दुरुस्त रहना चाहते हैं तो सूर्य नमस्कार को अपने जीवन में जरूर अपनाएं।

योग क्रियाओं में से सूर्य नमस्कार एक महत्वपूर्ण आसन है । जिसने आसन और प्राणायाम के लाभ एक साथ प्राप्त हो जाते है। जिन्दगी में प्रतिदिन प्रातः केवल सूर्य नमस्कार का भी अभ्यास किया जाए तो हम अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं ।  सुबह के  समय यह प्रातः काल उगते हुए सूर्य के सामने किया जाता है ।


सुर्य नमस्कार के नियम और सवासथय लाभ-

 इसके नियमित अभ्यास से शरीर के सारे अंग तथ मन सुदृढ़  रक्त शुद्ध होता है एवं रक्त का संचार संतुलित P होता है शरीर के सभी अवयव जैसे हृदय , फेफड़े , आमाशय , गुर्दे , यकृत , आन्त , रीढ़ की हड्डी सभी स्वस्थ होते हैं । यह शरीर के सम्पूर्ण तत्रिका ग्रन्थि एवं तंत्रिका मासपेशीय तंत्र को सुदृढ़ बनाता है ।

 सूर्य नमस्कार करने से स्त्रियों में प्रजनन तंत्र सुदृढ़ होता है जिस से मासिक स्राव सम्बन्धी सभी रोग ठीक होते हैं । इसलिए  यह व्यक्ति को सम्पूर्ण स्वास्थ्य देने में सक्षम है । 


● सुर्य नमस्कार करने की विधि : -

शौचादि से निवृत होकर सूर्योदय के समय , खुली जगह पर , शान्त मन से और ढीले कपड़े पहन कर सूर्य नमस्कार का अभ्यास किया जाता है 

सूर्य नमस्कार सूर्य की ओर दोनों हाथ जोड़कर सीधे खड़े हो र गर्दन और शरीर एक सीध में रहे श्वास की स्थिति सामान्य हो ।

 2 . सांस  भरते हुए , बाजुओं को ऊपर से जाकर पीछे की और झुके और कुम्भक करें । 

3 . श्वास को निकालते हुए आगे झुके और घुटने सीधे रखते हुए हाथों को पावो के दोनों ओर भूमि पर टिकाएं तथा माथे को घुटने पर लगाने का प्रयास करें । ब्राह्म  कुम्भक लगाए । इसे हस्तपादासन भी कहते हैं । 


4. हाथों को जमीन पर ही टिकाएं । श्वास भरते हुए बायां पांव सीधा पीछे ले जाएं । ऐसा करते हुए प्रयास करें कि दोनों कोहनी और बायां घुटना न मुड़े । चेहरा ऊपर करके आकाश की ओर देखें , साथ ही कुम्भक लगाएं । इसे एकपाद प्रसरणासन भी कहते हैं । 


5 . श्वास को निकालते हुए दूसरा पांव पीछे ले जाएं । दोनो पांवो के टखने और अंगूठों को मिलाए । बाजू और घुटने सीधे रहें । शरीर का भार हथेलियों और पैरों की अंगुलियों पर रखते हुए नितम्ब , कमर और सिर भाग को सीध में करे और कुम्भक करें । इसे इसे द्विपाद प्रसरणआसन कहते हैं।



6.  शरीर को नीचे लाएं और घुटने और माथा छाती को जमीन से लगा लेकिन पेट ऊंचा उठा हे पेट अमीन से न लगेर छोड़ दें । यह अष्टांग प्रणिपातासन है । 


7. स्वास भरते हुए और हाथों को सीधा करते हुए छात को ऊपर उठाए सिर को पीछे से जाकर ऊपर उठाए । सिर को पीछे से जाकर ऊपर की ओर देखें । इसे भुजंगासन भी कहते हैं ।


8.  बाजू और घुटने सीधे रखें । पांच और हाथ जमीन पर लगे रहे रहे नितम्ब ऊपर उठाए और ठुड्डी छाती से लगाए । इस अवस्था को पर्वतासन भी कहते हैं ।

 9 . अब वापिस एक पादप्रसरणासन स्थिति 4 में आ जाएं । 


10. इस में वापिस हस्तपादासन स्थिति 3 में आ जाएं । 


11.  अब श्वास भरते हुए स्थिति 2 में आ जाएं । 


12 .श्वास छोड़ते हुए स्थिति में आ जाएं । इस प्रकार 12 स्थितियों में एक सूर्य नमस्कार आसन पूर्ण हुआ । 

सुर्य नमस्कार के लिए  सावधानियां -

सूर्यनमस्कार करने हेतू जमीन पर एक दरी या मोटी चादर अवश्य बिछाएं । योगासन करने से पूर्व मन को शान्त रखें । बिना किसी स्पर्धा के अपनी क्षमतानुसार करें । जितना हो सके उतना ही करें । अभ्यास करने से पूर्व क्रिया को उचित रूप से समझ लें । अनुचित रूप से किया । अभ्यास हितकर नही होता । योगास्यास करते हुए वस्त्र स्वच्छ , सरल व व्यवधान न करने वाले होने चाहिए ।


. प्रसव पश्चात् तीन मास तक न करें ।

 . मासिक धर्म , गर्भावस्था में स्त्रियां इस आसन को न करें ।

. बुखार आदि अस्वस्थता में भी इसे न करें । 

निष्कर्ष - सूर्य नमस्कार अपने आप में एक संपूर्ण योग क्रिया है यह हमारे धर्म ग्रंथो और आयुर्वेद विज्ञान में सदियों से चली आ रही है। इसे अपना कर आप खुद घर बैठे अपने स्वास्थ्य को ठीक रख सकते हो अगर आपकी समस्या बहुत ज्यादा गंभीर है तो फिर अपने डॉक्टर के सालाह अवश्य करें।



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