चाणक्य नीति के अनुसार लोगों को कैसे परखे | How to judge people according to Chankya Niti |

चाणक्य नीति के श्लोक- चाणक्य नीति के अनुसार लोगों को कैसे परखे?
आचार्य चाणक्य अपनी नीति के लिए बहुत ज्यादा फेमस और प्रसिद्ध राजगुरु माने गए हैं । जिसने जिंदगी के हर पहलू पर जिक्र किया है। ऐसा माना जाता है आचार्य चाणक्य की नीतियों का अनुसरण  करने वाले व्यक्ति कभी भी जीवन में हार का सामना नहीं कर सकता। यह महान  कूटनीतिक आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक के जरिए बताया कि अच्छे व बुरे व्यक्ति की फर्क करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
* चाणक्य नीति श्लोक अर्थ सहित -

• श्रम द्वारा प्राप्त की गई सम्पत्ति ही स्थायी होती है । 
• अपनी आय - व्यय का सन्तुलन बनाकर खर्च करना ही अर्थशास्त्र है । 

• जो आप की बात सुनते समय इधर - उधर देखे उस पर कभी विश्वास न करना ।

• अतिथि आदर सत्कार का भूखा होता है
 न कि स्वादिष्ट व्यंजनों का ।

• जरा सी भी आनाकानी करने वाले से हमेशा सावधान रहो ।

• शाँति के समान दूसरा तप नहीं है , संतोष से परे सुख नहीं , तृष्णा से बढ़कर दूसरी व्याधि नहीं है , न दया से अधिक कोई और धैर्य है ।

• जब जिन्दगी में तमाम निराशाएँ होती हैं तो उनके एक बड़ी कामयाबी की डगर होती है । 

• अनायास संकट आने पर भी जो धैर्य नहीं
 खोते वो ही संकट से छुटकारा पाते हैं ।

• पाप करते समय व्यक्ति की आत्मा उसे बता देती है । कि इस काम को करना उचित है या नहीं ।

•  अपमानित होना और मर जाना एक बराबर है । 

• कोई भी क्रिया अकारण नहीं होती कारण से ही क्रिया की उत्पत्ति होती है ।

 • शिक्षा रूपी दीपक से हर राह रोशन होती है । 

• ज्ञानदाता गुरु की निन्दा करना तो दूर , निन्दा सुननी भी नहीं चाहिए । अतः आदर्श शिष्य सच्चे गुरुओं या शिक्षकों की संगत से ही उत्तम बनेगें , तभी तो भावी नागरिक बन सकेंगें ।

• साँप के मुँह में , बिच्छु की दुम में विष होता है लेकिन क्रूर व्यक्ति की रग - रग में विष भरा होता है ।

 • विषधर के पास बैठना इतना अहितकर नहीं होता , जितना कपटी पुरुष की संगत से अहितकर होता है । 

• आचार्य चाणक्य का कहना है कि घमंड और स्वार्थ में चूर इंसान से हम सभी को दूर रहना चाहिए . साथ ही ऐसे भाव अपने अंदर भी नहीं आने देने चाहिए . 

आचार्य कहते हैं कि जो व्यक्ति स्पष्ट होते हैं , भले ही वे अपने खरेपन की वजह से दूसरों की नजर में बुरे हो जाए , लेकिन वे मन के काले नहीं होते . अगर कोई व्यक्ति सच बोलता है और हमेशा बिना किसी डर के सच के साथ रहता है , आपको उसके संपर्क में जरूर रहना चाहिए . 

आचार्य कहते हैं कि जो निस्वार्थ आपका भला करें और स्पष्ट  रहे , वहीं परायों में अपना होता है . 

चाणक्य कहते हैं कि किसी को परखना हो कि वह स्वार्थी होने के साथ - साथ धोखेबाज नहीं है , इसके लिए सामने वाले को कुछ पैसे देकर देखें . अगर वह समय पर उन्हें लौटा दें , तो आपको उसके साथ संपर्क रखना चाहिए . इसके अलावा स्वार्थी और लालची मनुष्य सदा आपसे पैसे लेने या खर्च करवाने की कोशिश करेगा . 

अगर आप हर बार ऐसा महसूस करते हैं , तो ऐसे व्यक्ति से दूरी बना लेना ही बेहतर होता है .
चाणक्य कहते हैं कि जीवन में त्याग करना आसान नहीं है . अगर आप किसी को परखना चाहते हैं तो सामने वाली के त्याग की भावना को जानने की कोशिश करें . अगर व्यक्ति दूसरों के सुख के लिए अपनी सुख को त्याग कर दे तो ऐसा व्यक्ति कभी धोखा नहीं देता है . ऐसा व्यक्ति जो दुख के समय आपके साथ खड़ा न रहें उससे दूरी बना लें . ऐसे व्यक्ति धोखा देने के अलावा नुकसान तक पहुंचा सकते हैं . 

जैसे एक अकेला चांद हजारों कि ० मी ० की दूरी पर रहकर भी पूरे विश्व के अंधेरे को दूर कर देता है ठीक ऐसे ही एक बुद्धिमान विद्वान बेटा अपने परिश्रम तथा लगन से पूरे वंश का नाम रोशन कर देता है । रात तो किसी को भी अच्छी नहीं लगती , ठीक ऐसे ही गुणहीन बुद्धितीन चरित्र हीन संतान किसी को भी अच्छी नहीं लगती । 

हर मां बाप पर यह जिम्मेदारी आती है कि वे अपनी संतान को पांच वर्ष की आयु तक खूब लाड़ प्यार करें । परन्तु जैसे ही बच्चा पांच वर्ष की आयु पूरी कर लेता है तो दस वर्ष की आयु तक उसके साथ खूब कड़ाई से पेश आएँ । उसकी किसी भी भूल को क्षमा न करें । हर भूल पर उसे डांट लगाएं क्योंकि यही आयु बच्चे की शिक्षा की नींव पक्की करने की होती है । इस आयु में बच्चा थोड़ी सी शिक्षा प्राप्त करके भी अच्छे बुरे का भेद जान लेता है । इस आयु में आप बच्चे की बुद्धि जैसे भी चाहे मोड़ सकते हैं । इस आयु में मार पीट की बात न सोचें बल्कि हल्की डांट - डपट से भी बच्चा अपनी भूल को सुधार सकता है । 

Disclaimer-  इसमें हमारा कोई योगदान नहीं है यह चाणक्य नीति के अनुसार लिखा गया है। 



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ