मौन व्रत के लाभ और कुछ जीवन उपयोगी सुविचार...☆☆

 जीवन उपयोगी कुछ ऐसी बातें जिनका पालन करने से हमारे संस्कार और आचरण का पता चलता है। 
आप धन कमाकर धनवान तो बन सकते हैं। लेकिन संस्कारवान नहीं, धन खर्च हो सकता है लेकिन संस्कार नहीं ।अगर आपके पास धन हैं और संस्कार नहीं है तो वह धन भी बेकार है। 

 अपने जीवन में हमेशा संस्कारवान और और दया भाव वाले इंसान जरूर बनो, क्योंकि इंसान किसी भी रास्ते पर चलकर धन तो कमा सकता है लेकिन संस्कारवान बनने के लिए अपने आप को ही बदलना पड़ता है ।इसलिए अपने जीवन में कुछ ऐसी बातें और संस्कारवान और बुद्धिमान जरूर बनो।


मौन रखना एक अदभुत योग है : -

गांधी जी ने कहा था मौन एक में मानसिक शक्ति को जगाने की अत्यधिक क्षमता होती है । बोलना एक कला है और ,मौन उससे भी ऊँची कला है । 
सप्ताह में एक बार कुछ घंटों का मौन रखने से अपार शक्ति - संचय हो सकती है । यह एक यौगिक क्रिया होने के कारण मानसिक एकाग्रता प्रदान करता है । मौन वास्तव में तनाव - मुक्त जीवन जीने की कला का एकमात्र उपाय है और स्वस्थ रहने के लिए एक विश्वसनीय आवश्यक प्रक्रिया है । 
हमारे ऋषि - मुनि तो मौन के ही सहारे ध्यान की अवस्था में लीन रहकर ईश्वरीय शक्तियों से साक्षात्कार करते थे । मौन को व्रत की संज्ञा दी गयी है और वास्तव में यह एक व्रत ही है ,जो अन्य व्रतों की भांति फलदायक है । विधिपूर्वक किया गया " मौन " हृदय को शुद्ध तथा दृष्टि को निर्मल करता है ।  
चरक - संहिता में  ऐसा  बताया गया है, ईर्ष्या , रोग , द्वेष , क्रोध , मोह आदि का त्याग करने के साथ भोजन करते समय " मौन " रहने की बात कही गयी है । अधिक बोलने से उदान - वायु निर्बल होती है ।
जिससे मन शरीर भी दुर्बल पड़ जाते हैं ।  " मौन " द्वारा भावनाओं पर भी नियन्त्रण रखा जा सकता है । भावनाओं का सम्बन्ध आत्मा , हृदय , मस्तिष्क , पाचनक्रिया , जननांगों तथा तन्त्रिका - तन्त्र से है ।  भावनाओं की भिन्न - भिन्न अवस्थाएँ हमारे शरीर को प्रभावित करती हैं।
जैसे - दया , प्रेम , क्रोध , तनाव , चिन्ता , आवेश , भय , हिसा , व्याकुलता आदि । इनके बार - बार प्रकट होने से मनोविकार उत्पन्न हो जाते है , जो स्वास्थ्य पर कुप्रभाव डालते है । अतः  वेग को भी नही बाधित कर सकता है तथा हमें मानसिक रोगों से मुक्ति दिला सकता है । " मौन " केवल मुह बंद रखने को नहीं कहते । 
मन की इच्छित सफलता के लिये मन शान्त तथा चित प्रसन्न रहना चाहिये । यदि मन भटकता रहे तो कोई लाभ नहीं होता । " मौन हमारे अन्तः और बाह्य सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त रहना चाहिये ।
 
MOTIVATIONAL QUOTES IN HINDI:-👇🏻
Quotes. 1
मौन रहना एक साधना है,
और सोच समझकर बोलना 
एक कला है...!!

quotes. 2
क्लेश पर विजय पाने के लिए
 मौन से बड़ा कोई हथियार नहीं..!!


Quotes. 3
मौन और मुस्कान दो ऐसी शक्तिशाली हथियार हैं, मुस्कान से कई तरह की समस्याओं का हल किया जा सकता है और मौन रहकर कई समस्याओं को दूर रखा जा सकता है..!!

Quotes. 4
मौन और मुस्कान दोनों अपने पास रखिए, मौन रक्षा कवच है, तो मुस्कान स्वागत द्वार...!!

Quotes. 5
परिश्रम करने से गरीबी नहीं रहती मौन रहने से झगड़ा नहीं होता
सावधान रहने से भय नहीं रहता...!!

Quotes. 6
समय गूंगा नहीं है, बस मौन है
वक्त आने पर बता देता है
किसका कौन है..!!

Quotes. 7
जिस परिवार का मुखिया अन्याय होने पर भीष्म पिता की तरह मौन रहे तो उस परिवार में महाभारत का होना तय है...!!


Quotes. 8
किसी मूर्ख व्यक्ति की पहचान उसकी बातों से होती है और बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान उसके मौन रहने से होती है...!!

Quotes. 9
मौन रहना ही क्रोध को वश
में करने का सबसे बेहतर
 उपाय है..!!

Quotes. 10
एक बेवकूफ खुद को समझदार कहने में वक्त खराब करता है, वही एक समझदार व्यक्ति कभी खुद को समझदार कहने में वक्त जाया नहीं करता..!!
Quotes. 11
 सही जगह और सही जगह पर बोलना जरूरी है वरना चुप रहना ही बेहतर है..!!

Quotes. 12
ईश्वर भी हमें अत्यधिक सुनने की सलाह देते हैं, इसी कारण उन्होंने हमें एक मुँह और दो कान दिए हैं..!!
Quotes. 13
जो घड़ा आधा भरा होता है, वह ज्यादा बजता है, जो पूर्णता भरा होता है वह मौन रहता है..!!
इन बातों को हमेशा गुप्त रखो :- 

(1) किसी जाने या अनजाने को पेट की बात न कहो । परंतु अपने सच्चे हितेषी बन्धु से छिपाओ भी नहीं । 

( 2 ) अपने घर के अपने परिवार के दोष , दूसरे को ना बतलाएं ।

 ( 3 ) किया हुआ दान या धर्म किसी दूसरे को न बतलाएं । 

( 4 ) अपनी दौलत , धन संपति किसी दूसरे को ना बतलाएं ।

 ( 5 ) अपनी कमजोरी किसी दूसरे को ना बतलाएं । 

( 6 ) अपने मित्र की कमजोरी या उसके दोष किसी दूसरे को ना बतलाएं । 
( 7 ) किसी का उपकार किया है तो किसी दूसरे को ना बतलाएं । 

( 8 ) कोई योजना या कार्य जब तक पूर्ण सफल नहीं हो । जाता है तब तक किसी दूसरे को ना बतलाएं । 

( 9 ) अपने सम्बन्धी की कमजोरी को गुप्त रखो ।

इन बातों का हमेशा सम्मान करो : 

नौ जनों को गृहस्थ को जरूर दान देना चाहिये- ( क ) ( 1 ) माता , ( 2 ) पिता , ( 3 ) गुरु , ( 4 ) दीन , ( 5 ) अनाथ , ( 6 ) उपकार करनेवाला , ( 7 ) सत्पात्र , ( 8 ) मित्र और विनयशील । यह दान अनन्त फलदायक होता है । 

नौ आदमियों को दान नहीं देना चाहिये-

 ( 1 ) खुशामदी , ( 2 ) स्तुति करनेवाला , ( 3 ) चोर , ( 4 ) कुवैद्य , ( 5 ) व्यभिचारी , ( 6 ) धूर्त , ( 7 ) शठ , ( 8 ) कुश्तीका पेशा करने वाला और ( 9 ) अपराधी । इनको देने से कोई फल नहीं होता । ( ग ) नौ वस्तुओं को किसी हालत में विपति पड़ने पर भी नहीं देना चाहिये- ( 1 ) संतान के रहते सर्वस्व - दान . ( 2 ) पत्नी , ( 3 ) शरणागत . ( 4 ) दूसरे की रखी हुई चीज , ( 5 ) बन्धक रखी हुई चीज , ( 6 ) कुलकी वृत्ति . ( 7 ) आगे के लिये रखी हुई चीज , ( 8 ) स्त्री - धन और पुत्र । इनके देने पर प्रायश्चित किये बिना शुद्धि नहीं होती । 

 ये कर्म अवश्य पालन करनेयोग्य हैं । इनसे  सुख - समृद्धि की वृद्धि होती है ।
 ( 1 ) सत्य , ( 2 ) शौच , ( 3 ) अहिंसा , ( 4 ) क्षमा , ( 5 ) दान , ( 6 ) दया , ( 7 ) मनका निग्रह , ( 8 ) अस्तेय और ( 9 ) इन्द्रियों का निग्रह । इन दस नवकों का पालन करने से लोक , परलोक दोनों बनते हैं 

जीवन को ऊंचा उठाने की बातें " :

 दूसरों के दोष ना देखो , अपने देखो । किसी को छोटा न समझो । अपना दोष स्वीकार करने को सदा तैयार रहो । अपने दोषों की एक डायरी रखोः रात को उसे रोज देखो और कल ये दोष नहीं होंगे , ऐसा दृढ़ निश्चय करो । दूसरे के द्वारा अच्छा बर्ताव होने पर ही मैं उसके साथ अच्छा करूंगा , ऐसी कल्पना न करो । अपनी ओर से पहले से ही सबसे अच्छा बर्ताव करो , जो अपनी बुराई करे उसके साथ भी । नम्र और विनयशील रहो , झूठी चापलूसी न करो , ऐंठो नहीं , मान दो , मगर मान पाना न चाहो ।
  किसी से विवाद या तर्क न करो । शास्त्रार्थ न करो । 
अपने को सदा विद्यार्थी ही समझो । समझदारी का अभिमान ना करो । सीखने की धुन रखो । 
 मीठा बोलो , ताना ना मारो , कड़वी जबान ना कहो ; बीच में ना बोलो , बिना पूछे सलाह न दो ; सच बोलो , अधिक न बोलो , बिल्कुल मौन भी ना रहो ; हँसी - मजाक ना करो ; निन्दा - चुगली ना करो , ना सुनो , गाली ना दो . शाप या वरदान ना दो ।
 
अपरिचित मनुष्य से दया ना लो , जादू - टोना किसी से भी ना करवाओ ।

  नोट या जेवर, दूना बनानेवाले , आँकड़ा बतानेवाले , सोना बनाने वाले , सट्टा खेलने  वाले लोगों से सावधान रहो , ऐसा करने वाले लोग प्रायः ठग होते है । 

नौ बातों में हमेशा शामिल हो :-

जहां पर सत्संग , रामायण - पाठ , भागवत् का पाठ ,गीता का पाठ , प्रवचन हो रहा हो । 
( 2 ) जहां पर नारायण प्रभु , कोई भी देवी - देवता का भजन , कीर्तन , दर्शन , आरती हो रही हो ।
 ( 3 ) देव - दर्शन , मंदिर , तीर्थों की यात्रा में । 
( 4 ) जहां सच्चे संत , महात्मा , साधू , ऋषिगन के दर्शन हो ।
 ( 5 ) जहां पर निष्काम भाव से दीन - दुखियों की सेवा हो रही हो । 
( 6 ) स्कूल , कालेज , मंदिर , देवालय , धर्मशाला , होस्पीटल बनाने के लिए सहायता के काम के लिये मदद करो।
 ( 7 ) अबला नारी , वृद्ध , असहाय व्यक्ति , अपंग , अपाहिज , दुःखी , बिमारों की सहायता करो।
 ( 8 ) संकटग्रस्त ,बाढ़ ,तुफान ,आंधी , रेल या जहाज एक्सीडेंट के कारण संकट में घिरे हुए लोगों को सहायता किसी भी प्रकार की करने के मदद करो।
 ( 9 ) भूखे , प्यासे , लाचार , बिमार , असहाय प्राणी की सहायता करने के कार्यों में शामिल जरूर ही होना ही चाहिये । 
अगर  आप अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देना चाहते हो तो इस प्रकार की शिक्षा अवश्य दें । अगा यह लेख अच्छा लगे तो शेयर जरूर करें।

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