निरोगी स्वास्थय के लिए कुछ रामबाण उपाय

शुद्ध शाकाहार है ,निरोगी काया  का आधार 👇🏻

शरीर हमें ईश्वर का दिया हुआ सबसे सुंदर उपहार है। शास्त्र भी कहते हैं कि पहला सुख निरोगी काया, दुसरा सुख माया। 
स्वास्थ्य शरीर में ही स्वास्थ्य मन मस्तिष्क का निवास होता है। यदि शरीर में कोई दुख तकलीफ आ जाती है तो मस्तिक को सबसे पहले उसके बारे में चिंतन करना शुरू कर देते हैं। शरीर से पहले बहुत कुछ है परंतु उस बहुत कुछ को प्राप्त करने के लिए गति देने के लिए शरीर का स्वस्थ होना परम आवश्यक है।

रोग मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है जो व्यक्ति अपने शरीर को पूर्ण रूप से स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए उपाय नहीं करता वह अपने शरीर और जीवन का नाश करने के साथ-साथ भगवान का अपराध करते हैं। ईश्वर द्वारा प्रदत उपहार को प्रत्यक्ष रूप से ठुकराता है।
मनोवैज्ञानिक कारणों से रक्त विषाक्त होता है और शरीर अनपेक्षित परिवर्तन होते हैं। मानसिक चिकित्साओं के अनुसार प्रत्येक रोग मनुष्य के मन में होता है पहले मन अस्वस्थ होता है, फिर तन। शरीर से तो रोगी मन की अभिव्यक्ति का एक माध्यम है, जैसे पौष्टिक आहार से शरीर बलवान बनता है वैसे ही उत्तम और शुभ विचारों से मन बलवान बनता है। हमारा मन जैसी सोच व विचार करता है वैसे ही हम बन जाते हैं। 
मन के अनुसार ही हमारी बुद्धि कार्य करती है और मन के अनुसार ही हमारी इंद्री का कार्य करती हैं। शारीरिक स्वास्थ्य का मूल आधार है संतुलित भोजन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन , फ्लोर मिल, उचित मात्रा में लेने से शरीर स्वस्थ और क्रिया करने में सक्षम रहता है। उचित मात्रा में जल सेवन अति आवश्यक है ।मुंह से खाना-पीना नाक से सांस ग्रहण करना,तवचा से वायुु,धुप ग्रहण करना आदी को भी आहार के  अंतर्गत ही समझना चाहिए।

 जन्म के पहले मां के द्वारा बच्चों  को पोषण मिलता है, जन्म के बाद मां का स्तनपान ही उसका आहार है।स्वाद की दृष्टि से भोजन नहीं करना चाहिए, प्राणवायु भी हमारा आहार रहै उसने हमें अक्सीजन हमारे फेफडे लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर छोड़ते हैं। 
वन उपवन आदि प्राकृतिक स्थलों की भी सुद्द् हवा में ऑक्सीजन की मात्रा पूरी होती है। इसलिए स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है। इसी तरह सूर्य का ताप भी हमारा श्रेष्ठ आहार है।
 भोजन को खूब चबाकर खाना चाहिए जल्दबाजी में कभी भोजन नहीं करना चाहिए। उस भोजन को इतना चबाए की उसका तरल बन जाए।
भोजन पकाते बनाते समय हमारी सूक्ष्म भावनाऔ और मानसिक विचारधारा का बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है।इसलिए भोजन हमेशा अच्छी भावना से ही बनाना चाहिए। भोजन ही स्वास्थ्य देता है और भोजन ही सवासथय बिगाड भी देता है। भोजन रोग भी पैदा कर देता है और अरोगय भी देता है।  
वह शरीर की पाचन प्रणाली को विश्राम देने के लिए अति उत्तम एक तरह का उपवास है। इसी शरीर की सफाई भी होती है और उपवास के दौरान आवछित तत्वों को एकत्र होने से भी रोकता है। तथा शरीर को हानि पहुंचाने का अवसर नहीं मिल पाता।  
सप्ताह में 1 दिन उपवास अवश्य करना चाहिए,उपवास के बाद भारी  खाना ना खाएं। आधुनिक खोजों ने यह भी सिद्ध किया है, 90% से अधिक लोग खाने-पीने की किए गए आहार के नियमों का उल्लंघन के कारण बिमार होते हैं। जैसा खाए अन्न वैसा बन जाए मन ।
मस्तिक कुपोषित विचारों आशावादी दृष्टिकोण विश्वास का आहार सदैव दें तभी यह स्वस्थ रह सकेगा । खुश  रहने से सकारात्मक दृष्टिकोण से शरीर की पाचन प्रणाली व अन्य तंत्र ठीक कार्य करते हैं। खुलकर हंसना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है  भय से हृदय, नब्ज आदि की सामान्य गति प्रभावित होती हैं ,अंग कांपने  लगते हैं,  वाणी अवरुद्ध हो जाती हैं,ज्ञानेंद्रियों के सचेतना लुप्त हो जाती है व गंभीर पस्थितियों मे तो आघात से मौत तक हो सकती है। इसलिए चिंता और क्रोध मनुष्य की सारी ऊर्जा  सोख लेते हैव उसे अकाल मृत्यु का ग्रास बना देता है।अहंकार करना छोटे पन की निशानी है और महान आदमी कभी   अभिमानी नहीं होते।और अभिमानी कभी महान नहीं बन सकते।  हीन भावना हानिकारक है, क्योंकि जो हीनता के संस्कारों से ऊपर नहीं उठ पाते और वो अपनी जीवन शक्ति को खो देते है ऐसे व्यक्तियों को रोग से मुक्त नहीं किया जा सकता है। दुखद स्मृतियों की याद करने से दुख मिलता है व मनोवृति दूषित होती है। सुख को याद करने से सुख मिलता है ।शोक ग्रस्त होने पर भूख प्यास मर जाती है। पाचन तंत्र भी उचित कार्य नहीं कर पाता चेहरे की आभा मिट जाती है क्रोध करने से शरीर में पित्त का प्रकोप बढता है ।और पित्त कुपित होने से एसिडिटी, अल्सर आदि रोग होते हैं।  क्रोध से अपच भुख मारना, अनिद्रा रोग, मानसिक तनाव से ग्रस्त होते हैं ।गला, पेट मे  जलन होना,  चक्कर आना,के साथ गले में कड़वा पानी आना, उल्टी सिरदर्द होना आदि रोग उत्पन्न होने लग जाते हैं। इसलिए क्रोध से बचकर रहें  प्रतिदिन 500 ग्राम पर्याप्त मात्रा में पानी  पीना चाहिए। अगर बड़ा हुआ म
पेट  है तो शरीर के लिए वसा वाला भोजन कम करना चाहिए इससे अधिक सेवन से शरीर मोटापा, निर्बल और बेडौल होता है, शरीर से आवछित पदार्थों का निष्कासन शुगम कर कब्ज नहीं होने देताव  हुए रोगों को रोकता हैं। विटामिन ई भरपूर मात्रा में लेना चाहिए इसकी कमी से नेत्र व तव्चा के रोग होते है व गुर्दे और  फेफड़ों व रक्त सम्बन्धी रोग हो भी हो सकते हैं। 
इसलिए अपने भोजन में विटामिन ए और ई जरूर शामिल करें जो हमें हरी सब्जियों ,टमाटर ,मूली के पत्तों ,दूध आदि में या पाए जाते हैं। विटामिन सी हमें खट्टे पदार्थों में बहुत अच्छे से मिल जाता है इसके लिए इसकी कमी के कारण रक्त विकार अस्थि रोग, दंत रोग, चर्म रोग, पीलिया होने की अधिक संभावना बढ़ जाती है। यह नींबू, अमरूद ,आंवला ,संतरा ,मौसमी टमाटर ,हरी सब्जियां, मे मिलता है। 
विटामिन डी:-  इसकी कमी में वृद्धि रोकना है।  निमोनिया,संधिपात, महिलाओं  को रक्त प्रदर आदी हो जाते हैं।  इसके मुख्य स्त्रोत सूर्य की किरने हैं और सरसों का तेल दूध व फलों में पाया जाता है। इसकी कमी के कारण बाझपन,नपुसंकता व चर्मरोग  आदि हो जाते हैं! यह  दूध, घी, मक्खन में पाया जाता है ।

कैल्शियम स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है :- 
दूध में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। दूध के अतिरिक्त भी हम अपने भोजन में कुछ ऐसी चीजों को शामिल कर सकते हैं जिनसे हमें कैल्शियम  अच्छी तरह से भोजन में मिल सके। निम्न खाद पदार्थों में 100 ग्राम में कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है जैसे तिल, कैल्शियम का सर्वश्रेष्ठ स्तोत्र है। हृदय रोगों के  तिल का तेल का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है।  आजकल सोया पनीर के रूप में तो काफी प्रचलित हो गया इसके अन्य सब्जियों आदि में भी पाया जा सकता हैं। यह हार्मोन संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद होता है ।बादाम कैल्शियम के साथ यह विटामिन ई का  भी भंडार होता है। जो हमारी त्वचा और बालों के लिए बहुत ही लाभदायक है। अंजीर144 मिलीग्राम व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और कब्ज को भी दूर करता है । यह रात को भिगोकर खाई जाएं तो यह कैल्शियम की मात्रा को काफी  बढा सकता है। कच्ची पालक का जुस निकालकर पिया जाए तो  इसमें बहुत मात्रा कैल्शियम पाया जाता है।

 एक सुझाव को  चिंता और निरोगी काया करने के लिए 50 बार गहरी सांस लें और फिर खुली हवा में छोड़ दे ऐसा करने से आप हमेशा के लिए तरोताजा हो जाएंगे।  और अपनी दिनचर्या में योग और प्राणायाम जरूर शामिल करे। 
 इसलिए अपने खानपान से ध्यान रखकर हम अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं जैसा खाएंगे अन्न वैसा हो जाएगा मन, यह बात बिल्कुल सत्य है।

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