बच्चों को श्रेष्ठ कैसे बनायें और उन्हे क्या बताये और क्या ना बतायें..!!

अपने बच्चों को दे संस्कारो 
का दहेज:- 
MOTIVATIONAL  TOPIC AND QUOTES IN HINDI 👇🏻

बच्चे अमीर के हो या गरीब के हर किसी का एक सपना होता है, कि हमारे बच्चे कामयाब हो। वह कामयाब तभी होंगे जब हम अच्छे संस्कार और शिक्षा दे पाएंगे ।
 हर माँ बाप की इच्छा होती है कि उनकी संतान सफलता के चरम बिन्दु को छुए और उसे समाज में सम्मान मिले। वह उच्च पद पर पहुंचे और धन ऐश्वर्य उसे प्राप्त हो परंतु मात्र इच्छा करने से कुछ होता नहीं। इसके लिए दृढ विश्वास और मेहनत जरूरी है। 
 यदि इच्छा करने से या स्वप्न पालने से कार्य पूरा हो जाता तो भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गीता में दिए गए उपदेश अर्थहीन हो जाता। विचार करने योग्य बात यह है कि माता - पिता अपने बालकों को योग्य बनाने में कितनी निर्णायक भूमिका का निर्वाह करते हैं। बच्चों का बाल्यकाल बच्चों के नहीं अभिभावक के हाथ में होता है । बालक को बच्चा इसीलिए कहा जाता क्योंकि उसे बुरे लोगों और बुरी आदतों से बचा कर रखना पड़ता है। उसे इतनी समझ नहीं होती कि अग्नि उसके हाथ को जला सकती है। बच्चे को अनेकानेक दुर्गुणों से बचाना माता - पिता का धर्म है।
बालक अच्छी और बुरी आदतें हमें  देखकर ही सीखते हैं, इसलिये माता - पिता को चाहिये कि वो उनके सामने अपने आचरण अच्छा रखें और अपना जीवन संयमित और पवित्र रखें।
 ऐसा करने से बालक अच्छी बातें सीखेंगे और श्रेष्ठ बनेंगे । बालकों की उन्नति के लिये एक नम्बर में तो माता - पिता अपने आचरण को अच्छा रखें और दो नम्बर में उनको अच्छी बातें सुनायें ,ऊँचे दर्जे कि शिक्षा दें ,भक्तों के और भगवान् के चरित्र सुनायें।

अच्छी शिक्षा जिससे बालक व्यवहार में परमार्थ की कला सीख जाये।  माता - पिता कहीं बाहर जाना चाहते हैं तो वे बच्चों से कहते हैं कि तुम यहीं रहो ऐसा कहने से बच्चे मानते नही और बच्चे भी जाने कि जिद करते हैं। जिससे माता -पिता विरोध करते हैं   और बच्चे भी दुःखी हो जाते हैं और  घर में अशान्ति का माहोल बन जाता है। इसलिए भलाई इस बात मे है बच्चों को पहले से ही यह कह देना चाहये कि हम कहीं जाये तो जिद मत करना आज हमे जरूरी काम से बाहर जाना है। ऐसा कहने से बच्चे जल्दी समझ जाते हैं और इस बात को स्वीकार कर लेंते है और फिर कहीं जाते समय बच्चों को कह दें कि ' जिद नहीं करना  हम जैसा कहें वैसै ही करना। तो वह आपकी बात मान लेंते है।
 जब भी घर फल, मिठाई या कोई  अच्छा खाद्य पदार्थ आता है तो बच्चा उसको लेने के लिये जिद करता है । अत:  जिस समय खाद्य पदार्य सामने ना हो उस पहले बच्चो को यह संस्कार दे कि सबसे पहले खाने के सामान का भगवान् जी को भोग लगायेगै और फिर घर के बुजुर्ग सदस्यो को देनी चाहिये बची हुई वस्तु खानी चाहिये। इस तरह बच्चों में बचपन से ही ससंकारो के बीज डालने शुरू करें और फिर वह  कोई भी खाने की चीज सामने आने पर वह जिद नही करेगे।

बच्चों के लिए संस्कारवान् शिक्षा:- 
इस तरह आप अपने बच्चों को जो - जो बाते  सिखाना चाहते हो उन बातों को दिन में दो -तीन बार बच्चों को पयार से कहे और उनसे प्यार पूर्वक स्वीकार करवायें  करें ।बच्चो को अच्छी अच्छी बातें सिखानी चाहिये ; जैसे:-  देखो बेटा कभी किसी चीज की चोरी नहीं करना, माँ बाप से मांगकर लेना  और अगर हम कोई वस्तु ना दिलवा पाये तो चोरी नहीं करना। छोटे भाई - बहनों से प्यार करो उनको खिलाओ और साथ में खेलन  और बाांटना सिखााऔ 
जैसे:-  भगवान् राम, भरत,और लक्ष्मण  आदि से प्यार करते थे ,प्यार से समझाते थे , ऐसे ही तुम भी अपने भाई - बहनों के साथ प्यार से रहो , उनसे लड़ाई मत करो। आपस में वाद - विवाद हो जाये तो उनकी बात मानो ,अपनी बात मनाने की जिद मत करो। माँ - बाप जैसा कहें उसके अनुसार घर का काम, धंधा करो । समय को वयर्थ मत खोओ अच्छे काम में लगे रहो, दूसरों का हक मत मारो ,दूसरों की चीज को अपनी मत मानो, चीजों को अच्छे से अच्छे काम में लगाओं आदि। इस तरह बच्चों को जो शिक्षा देनी हो।  उसको रोज दो तीन बार बच्चों से कह देना चाहिये। इससे उनके भीतर इन बातों का असर होगा। जो गुरुजनों ,बड़ों का आदर करता है ,उनको नित्य प्रणाम करता है , उसके बल, आयु, विद्या और यश की वृद्धि होती है। जो इसके विपरीत बड़ों का आदर नहीं करता या उनका तिरस्कार करता है ,उसके आयु , बल , विद्या और यश का नाश होता है 
 शुद्ध सात्विक पदार्थों का ही सेवन करना चाहिये अमिष भोजन एवं नशीले पदार्थों जेसे बीड़ी, सिगरेट , तम्बाकू , गुटका का सेवन नहीं करना चाहिये। निर्धन ,असहाय, रोगी, दुर्बल से घृणा नहीं करनी चाहिये अपितु रोगी व असहायों की यथाशक्ति सेवा करनी चाहिये ।

बच्चों की सफलता के लिए 
वास्तु टिप्स :- 
1. तीन मुखी रुद्राक्ष पीले धागे में बृहस्पतिवार को पहनने से परीक्षा में निश्चित रूप से सफलता मिलती है।
 जो बच्चे परीक्षा में बार बार असफल होते हैं।  उन्हें अवश्य धारण करना चाहिये यह एक सफल प्रयोग है। 

2: बच्चों की पढ़ने वाली स्थान पर सरस्वती माता का चित्र या फिर कोई धातु से बने हुए मूर्ति अवश्य रखें इससे बच्चो  पढ़ाई में मन लगेगा और पोजटीव ऊर्जा प्राप्त होगी।
 
3. बच्चों की किताबो और स्टडी टेबल पर मोर पंख अवश्य रखें यह एक वास्तु टिप्स है जो बच्चों के लिए विविधता की विद्या प्राप्ति के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है।

. अच्छे बालकों की दिनचर्या:-

सूर्यउदय से पहले उठकर बिना कुल्ला किए जितना पानी पिया जाये उतना पिले। हाथ मुंह धो कर निर्वत होकर कुछ समय के लिए ईश्वर का ध्यान और प्रार्थना अवश्य करें । प्रतिदिन नहा धोकर कसरत के बाद पश्चिमोत्तानासन योग, योगमुद्रासन अधिक करने से एकाग्रता बढ़ती है। और शरीर निरोगी रहता है। फिर ऊँ का उच्चारण करके ध्यान करना चाहिए, इससे हमारी स्मृति बढ़ती है। किसी से मिलते समय अभिवादन जय श्री राम आदि से ही स्मरण करते हुए मिलना चाहिए। कुछ समय कठिन विषय पढकर नियत समय पर स्कुल जाना चाहिए। खाना खाने के बाद बाद थोडा विश्राम करे। उसके बाद  school home work करे। 
 शयाम के समय कुछ देर खेलना, हंसना और घूमना चाहिए। व्यर्थ की बकवास और गपशप मे समय वयर्थ ना करो। जरूरत से ज्यादा टीवी ना देखें। कुछ भी खाने से पहले हाथ धोये और खाने पीने के बाद फिर से हाथ धोये। रात के समय अगले दिन  पाठशाला जाने की तैयारी करें।यूनिफॉर्म, कापियां, जूते ,मोजे आदि सब चीजों को जांच कर लेनी चाहिए। रात को 9 से 10 के बीच पढ़ाई करने के बाद सो जाना चाहिए, और रोज रात को सोते समय ईश्वर का नाम सिमरण करके सोये,और हनुमान चालीसा का जाप करना चाहिए। यह बच्चों के लिए सबसे उत्तम उपाय है। ऐसा करने से नजर दोष खत्म होता है और भूत आदि का भय भी खत्म हो जाता है। यह एक अनुभव किया हुआ उपाय है।

बच्चों के लिए सुविचार (motivational quotes )

Quotes. 1
बच्चों के खिलौनों की जिद कभी मत पूरा करना क्योंकि वह खिलौने ना मिलने पर थोड़ी देर रोएगा अगर संस्कार ना मिले वह जिंदगी भर रोएगा..!!

 
Quotes. 2
बच्चे मन के सच्चे ही नहीं पवित्र भी होते हैं क्योंकि वह 3 साल तक भगवान का रूप होते हैं..!!

Quotes .3
अपने बच्चों की तुलना दूसरों के बच्चों से ना करें क्योंकि हर पल का स्वाद अलग अलग होता है...!!

Quotes. 4
यह नियम बना लीजिये; कभी किसी बच्चे को वो किताब नहीं दीजिये जो आप खुद नहीं पढेंगे-  जॉर्ज बर्नार्ड शॉ


Quotes. 5

बच्चों  को अच्छा बनाने का सबसे बढ़िया तरीका उन्हें खुश करना है..!!


Quotes. 6
यदि आप अपने बच्चों को बुद्धिमान बनाना चाहते हैं तो उन्हें परियों की कहानिया सुनाएं।  यदि आप उन्हें और भी बुद्धिमान बनाना चाहते हैं तो उन्हें और अधिक परियों की कहानियां सुनाएं --अल्बर्ट आइंस्टीन


☆. ये बातें हमेशा बच्चों से 
गुप्त रखो :-  बच्चों को ये बातें कभी मत बताये .....!!

1. माता - पिता को कभी भी अपनी ऊपरी  हैसियत बच्चों के आगे नहीं पीटना चाहिये । माता - पिता भी अपने शौक सीमित रखने का प्रयास करे । जिससे अधिक अमीरी न झलके और बच्चों पर बुरा असर ना पडे। अपने बच्चे को अच्छा नागरिक बनाने में उसके सहायक बने उन्हे जिम्मेदारियों का अहसास करवाते रहे।
2.  बच्चों को कुछ अभाव का भी एहसास करवाए जिससे वे जिम्मेदार बन सके और दूसरों की मजबूरी का मजाक ना उड़ाये उनकी मजबूरियों को समझ सके।

3. शिक्षा के प्रति लापरवाही ना बरतें । आवश्यकता पड़ने पर पुस्तके, ट्यूशन आदि का प्रबंध करें और स्वयं भी अच्छे माता - पिता की जिम्मेवारी निभाएं।
  
4. घर के लिए आवश्यक बड़ी वस्तु एकदम घर पर ना लाए। अच्छी तरह से सोच समझकर परामर्श करके  दिलवाये। खरीदते समय बच्चों को अहसास करवाए कि इस चीज पर पैसा खर्चने से पूर्व उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी या आपातकाल में काम आने वाली जमा पूंजी से निकलवा कर ही उनकी जरूरत पूरी की है ।

5. व्यवसाय में कितना लाभ हुआ है । इसकी जानकारी बच्चों को ना दे और ना ही यह जानकारी दे कि यदि मुझे यह प्रोजेक्ट मिल जाता है तो मुझे इतना मुनाफा होता।

6. बच्चों के सामने अपनी पत्नी या अपने मित्रो से कारोबार की लाभ- हानि की चर्चा ना करे।यदि स्वयं किसी अच्छे पद  या ताकत वाले ओहदे पर है तो बच्चों के आगे  उसकी सेखी ना बधारे कि यह काम मैं मिनट में कर सकता हूँ या करवा सकता हूँ । कयोंकि बच्चे नयायज फायदा उठाते है और कोई गलती कर बैठते हैं। 

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