गेहूं के ज्वारे है कैंसर जैसी बिमारियों के लिए संजीवनी बूटी, जानिये कैसे करें इसका सेवन.☆☆☆

गेहूं की घास यानी गेहूं के ताजा छोटे नन्हे पौधे प्रकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में दुनियाभर में धूम मचा रहे हैं। ऐसा दावा किया जा रहा है कि नन्नी गेहूं की घास मामूली सर्दी जुखाम से लेकर कैंसर जैसे गंभीर रोगों तक की एक ऐसी रामबाण प्रकृति की दवा है जो कुल मिलाकर 350 रोगों का इलाज कर सकती है। 
गेहूं की घास के द्वारा डाक्टर कहते है कि गेहूं का स्वाद में मिठा और शीतलता प्रदान करने वाला है, जो कि गेहूं की घास अववयों को रक्त द्वारा जल्दी सोख लिया जाता है। जिसमें देह तुरंत लाभ होता है।  चिकित्सकों के अनुसार गेहूं की घास में क्लोरोफिल के अलावा और भी कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जिससे इसे सेवन करने वालों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। गेहूं की घास में कार्बोहाइड्रेट ,प्रोटीन और वसा के अलावा शरीर के लिए आवश्यक तत्व मौजूद होते हैं। इसमें विटामिन ए,बी, सी,ई और के साथ  
लैटराईल बी-17 नामक एक खास विटामिन भी मौजूद होता है।  इसी विटामिन के कारण गेहूं घास में कैंसर से लडने की क्षमता भी पाई गईं है। गेहूं की घास के रस में जर्मनाशक गुण भी पाये जाते हैं।

डॉक्टरों और आयुर्वेद के अनुसार हमारी देह एक मशीन की तरह है जब तेल पानी की जरूरत पड़ती रहती है, तब हम ऐसी प्राकृतिक चीजों का सेवन करते रहते हैं। गेहूं की घास हमारे शरीर के लिए एक तरह से तेल का काम करती है।  जिससे हमारे अंगों में जंग नहीं लगता। गेहूं के जवारे में क्लोरोफिल की मात्रा होने से हमारा रक्त शुद्ध होता है ,दिल की कार्यप्रणाली में सुधार आता है और पूरे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। इन्हीं कारणों से शरीर में रोगों को लड़ने की ताकत आती है। गेहूं की घास का लेप लगाने से घाव बहुत जल्दी भर जाते हैं ।
सोंदर्य वर्धक:-
गेहूं की घास पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों के अनुसार इसके अन्दर सौंदर्य वर्धक खूबियां भी मौजूद हैं ,इससे चेहरे के दाग धब्बे मिट जाते हैं चेहरे में चमक आ जाती है।

बालों के लिए:-
यदि गेहूं के घास का रस को खोपड़ी पर लगाया जाए तो बालों के गिरने वाली समस्या और उम्र से पहले सफेद होने की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है ,इसके लिए ले कम से कम 1 घंटे तक लगा रहने दें।
 सिर में लेप लगाने से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

गले की लिए:-
गेहूं की घास का रस निकालकर गरारे करने पर गले की तकलीफ से बचा जा सकता है। आयुर्वेद के डॉक्टरों के अनुसार इस रस का सेवन सुबह सुबह खाली पेट ही करना चाहिए और इसके साथ कोई गरिष्ठ भोजन ना करें। 

तवचा रोगों के लिए:-
गेहूं के जवारे का रस तवचा से जुड़ी हर तरह की समस्या को खत्म करने कर सकता है। एक्जिमा, सोरायसिस जैसी गंभीर बीमारियों को यह ठीक कर सकता है। इसमें नए सेल्स को बनाने का गुण होता है और ये डेथ सेल्स को हटा कर प्रभावित स्किन को सही करने के लिए रामबाण उपाय है।  

पेट के लिए लाभदायक:-
गेहूं के जवारे का रस सुपर डाइजेस्टबल होता है। ये पेट से जुड़ी किसी भी तरह की समस्याओं को दूर करने में असरकारक होता है। इसके अलावा एंजाइम, अमीनो एसिड और विटामिन बी डाइजेशन से जुड़ी हर समस्या को खत्म करने में कारगर होते हैं। यही कारण है कि ये अल्सर, इरिटेबल इंटेस्टाइन सिंड्रोम जैसी समस्या के लिए रामबाण का काम करता है।

कैंसर:-
गेहूं के जवारे में कैंसर से बचाने का गुण होता है। ये ब्लड में ऑक्सिटोसिन की मात्रा को बैलेंस करता है। साथ ही ये एंटी ऑक्सिडेंट से भरा होता है जो कैंसर कोशिकाओं को पनपने से रोकता है। 

खुन की कमी को पुरा करता है:-
जिन्हें खून की कमी की दिक्कत रहती हो वह गेहूं के जवारे का रस जरूर शुरू कर दें। एक महीने में ये आपके हीमोग्लोबिन को बढ़ा देगा।और आपकी यह समस्या खत्म हो जायेगी।

घर पर गेहूं को उगाने का तरीका:-

गेहूं की घास घर पर बहुत आसानी से उगाई जा सकती है यह काम बहुत आसान है। गेहूं क ज्वारे को 25 से 50 मिली शुद्ध बालू मिट्टी में थोड़ा सा गाय का गोबर डालकर 7,8 गमलों में गेहूं के दाने कुछ दुरी के अंतराल से बोयें।यह कुछ दिनों में ऊग जाते है। गेहूं के पौधों का हरा भाग काट कर  मिक्सी में पीसकर जूस बनाएं। इस प्रकार आप एक एक  गमले के ऊपर से थोड़ी मिट्टी हटाकर फिर से गेहूं को बो दें इस प्रकार सभी गमलो मे घर पर गेहूं के  पौधे उगाये और उसमें फिर नए सिरे से गेहूं बोते रहें। इस जूस का प्रयोग तुरंत करना होता है तभी आप इसका लाभ ले सकते हैं । गमलो मे हररोज पानी देते रहे।यह रस आपको रोगो से लडने में अधिक सहायता करेगा।

गेहूं और गेहूं पौधो का रस ईश्वर की तरफ से एक वरदान है। गेहूं के आटे में भी खासकर चोकर के साथ खाने वाला आटा कब्ज आदि की शिकायत में अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। चोकर की रोटी बनाकर खाने से कब्ज में आराम मिलता है और बवासीर के रोगियों के लिए चोकर की रोटी रामबाण का काम करती है।  पेचिश आदि की शिकायत होने पर भी चोकर की रोटी बहुत ही फायदेमंद रहती है।
गेहूं जब पैदा होती है तब उसकी तासीर गर्म होती है इसलिए उसको कभी भी बिना धोए ना खाएं, क्योंकि ताजी गेहूं का आटा  खाने से हमें दस्त लगने की बीमारी हो सकती है।  इसलिए हमेशा गेहूं को धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। गेहूं का सेवन करने से वीर्य व पौरुष में वृद्धि होती है। शारीरिक श्रम करने वालों को इसका सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह अत्यंत ऊर्जा प्रदान करने वाला भोजन है। गेहूं और जई को मिलाकर नाश्ते के रूप में प्रयोग करने से हृदय रोगों से बचा जा सकता है ,क्योंकि जई का आटा या दलिया हृदय रोगियों के लिए हमेशा स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता है। क्योंकि जई के आटे में विटामिन ए और विटामिन ई  पाया जाता है जो एक  रक्त वाहिनी रक्षक है लेकिन विटामिन सप्लीमेंट्स यानी तैयार विटामिन की गोलियां सुबह-सुबह शरीर की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाती जबकि का गरम गरम दलिया और शरीर इसकी कमी की अपेक्षा जल्दी पूरा कर देता है। सुबह के नाश्ते के लिए आटा हमेशा गेहूं, काला चना ,सोयाबीन आदि सामग्री मिलाकर ही पिसवाये। शनिवार को काला चना किसी न किसी रूप में अवश्य भोजन में खाने का नियम बना लेना चाहिए। भोजन बनाते समय पहली रोटी  गाय को जरूर खिलाएं। ऐसा हमारे ऐसा शास्त्रों में लिखा गया है। गेहूं के जवारे का रस और गेहूं बहुत ही लाभदायक है। आप भी इसका लाभ अवश्य उठाएं। इस रस से हमें अनेक रोगों से लड़ने की क्षमता प्राप्त होती है, यह  शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

गेहूं के ज्वारे के नुकसान:-

गेहूं का जवारा जरुरत से ज्यादा पीने से आपको सिर दर्द और उल्टी हो सकती है या फिर आपको पेट संबंधी डायरिया जैसा रोग भी हो सकता है। इसलिए इसका सेवन किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह से ही करें या फिर धीरे-धीरे थोड़ी मात्रा में ही करें और एक बार अपने डॉक्टर की सलाह जरूर कर लें इसका सेवन करने से पहले, तभी सेेवन करे। 

Disclaimer: इस लेख में बताये गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिये गये हैं आप अपने डाक्टर खुद ना बने किसी भी प्रकार की समस्या होने पर पेशेवर चिकित्सक की सलाह जरूर करें ।
फिटनेस और सवास्थय प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।


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