प्रदोष व्रत कैसे करे।



व्रत करने के लाभ और महत्व –
हमारे हिन्दू धर्म में व्रत रखने की महिमा का वर्णन सदियों से चला आ रहा है। व्रत के पिछे धार्मिक, आध्यात्मिक और मनोकामना को पूरी करने के लिए मना गया है।
हर सप्ताह में हर दिन अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा होती है।
दिन के हिसाब से उपवास करने के फायदे, तरीका और महत्व अलग अलग है। हमारे शास्त्रों के अनुसार व्रत रखने के मानसिक, शारीरिक और अध्यात्मिक लाभ भी बताये गये हैं। 

प्रदोष व्रत की महिमा-
सावन का महीना भोले शंकर को समर्पित होता है। इस माह में भोले शंकर की विधि- विधान से पूजा- अर्चना की जाती है। हर माह में दो बार प्रदोष व्रत पड़ता है। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। साल में कुल 24 प्रदोष व्रत पड़ते हैं। प्रदोष व्रत भी भोले शंकर को ही समर्पित होते हैं। सावन के माह में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है। इस बार प्ष
प्रदोष व्रत अब 5 अगस्त को है
हमारे धर्म के अनुसार ऐसा माना जाता है प्रदोष व्रत करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं अगर इसे हम विधि विधान से करें ।
 प्रदोष व्रत महीने में त्रयोदशी  तिथि को दो बार आता है।  इस व्रत में  पूजा का समय शयाम  5 और 6 के बीच में माना जाता है। इस समय आप अपने मन में अपनी  मनोकामना धारण करके  शिव से वरदान मांग सकते हो।
 यह व्रत बहुत ही फलदाई हो और जल्दी  मनोकामना को पूरा करने वाला वर्त माना जाता है।
 
आइए जानते हैं व्रतो के बारे में पुरा विस्तार से।


1. सोमवार व्रत के महत्व-------

इस दिन का व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। शिव व्रत की पूजा हमेशा गणेश जी की पूजा से शुरू होती है। भगवान गणेश का आशीर्वाद लेकर उनके माता-पिता शिव-पार्वती जी की पूजा अर्चना की जाती है। 
फायदे – सोमवार व्रत से सभी इच्छाओं, मनोकामनाओं की पूर्ति संभव होती है। अक्सर सोमवार व्रत युवा अविवाहित लडकियाँ रखती है, जिससे उन्हें भगवान शिव जैसा उत्तम वर मिले सके। परन्तु सोमवार व्रत कोई भी व्यक्ति रख सकता है। 

सोमवार व्रत रखने के 3 प्रकार होते हैं, सोमवार व्रत, सोलह सोमवार व्रत, सोम प्रदोष व्रत. सोमवार व्रत की बेहतर सफलता के लिए इसे सावन महीने में शुक्ल पक्ष के सोमवार से शुरू करें। सोमवार व्रत के दिन अधिकाधिक ‘ॐ नमः शिवाय‘ का जाप करें. इस दिन सफ़ेद या नीले वस्त्र धारण करें। 
हर तरह की मनोकामना के लिए सोम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है यह व्रत त्रयोदशी तिथि में करना होता है जो महीने में दो बार आती है।

2. मंगलवार व्रत का महत्व------

यह सबसे ज्यादा रखे जानेवाला व्रत है। बताने की आवश्यकता नहीं है कि मंगलवार व्रत महावीर हनुमान बजरंग बली जी को समर्पित होता है, जोकि भगवान श्री राम के परम भक्त हैं। मंगलवार व्रत के नियम कड़े माने जाते हैं। इसको व्रत को पुरुष सबसे जयादा करते है।

इस व्रत के फायदे – जयादातर पुरुषों द्वारा रखे जाने वाला यह व्रत जीवन में सफलता, आत्मविश्वास, शक्ति, रोग-मुक्ति, कर्ज से मुक्ति का निरंतर फल देता रहता है। ज्योतिष के अनुसार मंगलवार व्रत से मंगल और शनि ग्रह के बुरे असर खत्म होते हैं। 

मंगलवार व्रत को सम्भव हो तो लाल वस्त्र पहने। नमक न खाएं, मीठा भोजन, फल खाएं। हनुमान जी को चन्दन का तिलक लगायें, लाल फूल अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें और ‘राम-राम‘ नाम का 108 बार जाप करें और अगर हो सके तो बजरंग बाण का पाठ करे। 

3. बुधवार व्रत के महत्व -----

बुधवार का दिन भगवान गणेश, बुध ग्रह और भगवान विट्ठलनाथ (विष्णुअवतार) को समर्पित होता है। कोई भी नया उद्यम, पढाई-लिखाई, सम्वाद से सम्बन्धित गतिविधि शुरू करने के लिए यह उत्तम दिन माना गया है। बुधवार के दिन भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण की पूजा-आराधना होती है। 

लाभ – बुधवार व्रत से जीवन में सामंजस्य आता है। विवाहित जोड़ा साथ में यह व्रत रखे तो आनंदमय वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। इस व्रत के दिन हरे रंग के वस्त्र धारण करें। और हरे रगं की वस्तु दान देने से इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।

इस दिन बुधव्रत कथा का पाठ करें और भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें। इस व्रत के प्रभाव से सभी पारिवारिक झगड़ों और जीवन के क्लेश, कष्ट और तनाव से मुक्ति मिलती है। 

4. गुरुवार व्रत के महत्व----------

इस दिन भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, सरस्वती माता, बृहस्पति ग्रह की पूजा होती है। 

लाभ – यह व्रत रखने से धन-धान्य की प्राप्ति, सुख और मानसिक शांति मिलती है। जिनकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर हो उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए।
बृहस्पति वार के व्रत में केले के पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। केले के पेड़ की पुजा घर पर नहीं मंदिर में ही पूजा करना उत्तम माना गया है, कभी भी भूलकर केले के पेड़ की पूजा घर पर ना करें।  

किसी भी महीने में शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से यह व्रत शुरू करें। इस दिन पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु और बृहस्पति ग्रह को पीले फूल, पीला प्रसाद चढ़ाएं, चन्दन का तिलक लगाये। 
इस व्रत रखने वाले को चाहिए कि वो बृहस्पति व्रत कथा का पाठ करे, पीली वस्तु का दान करे , पीले रगं का भोजन करे और खाने में नमक का प्रयोग न करे। 

5. शुक्रवार व्रत का महत्व-------

यह व्रत माँ दुर्गा, माँ महालक्ष्मी जी, संतोषी माता और शुक्र ग्रह को समर्पित होता है। इस दिन सफ़ेद या नीले वस्त्र पहने. सोलह शुक्रवार व्रत की पूर्णता के दिन 7 अथवा 11 लड़कियों का कन्यापूजन करें, भोजन कराएँ और उपहार दें। माँ दुर्गा आपका कल्याण करेंगी। 

शुक्रवार व्रत के लाभ--- कुंडली में कमजोर शुक्र ग्रह होने पर यह व्रत जरुर रखें। सोलह शुक्रवार व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने पर मनोकामना की पूर्ति, सौभाग्य, शारीरिक-मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। 
जो व्यक्ति या महिला इस व्रत को करते हैं इस दिन खटाई खाने और दूसरों को भोजन में खटाई देने के लिए निषेध माना गया है। इसलिए भूल कर भी ना तो खट्टा भोजन करें और ना ही किसी को खट्टा भोजन दान में दें।

6. शनिवार के  व्रत का महत्व-------

इस व्रत के दिन काली वस्तु जैसे काला कपड़ा, काला चना, उर्द की दाल, काला तिल दान करें। लोहे के बर्तन में एक सिक्का डालकर फिर सरसों का तेल डालें। तेल में अपनी परछाई देखकर इसे दान कर दें। शनिवार व्रत के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें और पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दिपक जलायें और पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें जितनी जल्दी संभव हो सके तो पूजा जल्दी ही करने की कोशिश करें क्योंकि 12:00 बजे के बाद पीपल के पेड़ की पूजा करने को निषेध माना गया है

लाभ – शनि ग्रह के बुरे असर से प्रभावित लोग यह व्रत अवश्य रखते हैं। इस दिन भगवान श्री हनुमान की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी शनि के दुष्प्रभाव खत्म होते हैं। शनिदेव हनुमान जी के भक्तों को कष्ट नहीं पहुंचाते हैं। 

शनिवार व्रत रखने वाले दिनभर में एक बार भोजन करें। शाम को पूजा के बाद भोजन करें, कोशिश करें कि कोई भोजन काले रंग का हो- जैसे काला तिल, काला चना, सरसों आदि. इस दिन नीला वस्त्र पहनें, काला नहीं। शनिवार व्रत से धन-समस्या का समाधान, इंजीनियरिंग, फैक्ट्री व्यवसाय में सफलता, कर्ज और रोगो से मुक्ति प्राप्त होती है। 

7. रविवार व्रत का महत्व ------

इस व्रत के दिन भगवान सूर्य की पूजा होती है। इस दिन सुबह जल्दी स्नान करके ताम्बे के पात्र में जल लेकर उसमें चन्दन,लाल फुल मिलाकर पूर्व दिशा में सूर्य के समाने खड़े होकर जल अर्पित करें। 
जल अर्पण करते समय कम से कम 3 बार गायत्री मंत्र का जाप करें। खट्टा, तैलीय, तला-भुना न खाएं बल्कि मीठा भोजन करें।
इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनें और इस व्रत को करने का लाभ तभी मिलता है जब हम उगते हुए सूरज को जल अर्पित करें इसलिए जितना जल्दी हो सके जल्दी उठे और स्नान आदि करने के बाद भगवान सूर्य देव को जल अर्पित करें।

रविवार व्रत के लाभ – भगवान सूर्य व्यक्ति की हर इच्छा पूरी करते हैं, शत्रु पर विजय देते हैं। सूर्यदेव उसे समाज में ऊँचे, सम्मानित स्तर पर पहुंचाते हैं, प्रसिद्धी दिलाते हैं। इस व्रत से व्यक्ति का आभामंडल शुद्ध होता है और अगर कोई रोग या स्किन समस्या हो तो वह भी दूर होती है। 

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