शास्त्रो के अनुसार भोजन के नियम |eating food rules | भोजन खाने का सही तरीका और नियम |


Tittle भोजन करने के नियम-
हमारे स्वास्थ्य पर भोजन का बहुत ही गहरा संबंध है  कयोंकि स्वास्थ्य के लिए भोजन जितना जरूरी है उतना यह उतना यह भी जानना जरूरी है  किस समय और कब क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए ।आज हम इस बात पर एक article लेकर आए हैं ।
जिसे पढ़कर आप भी भोजन करने की विधि विधान का पालन करने की जरूर कोशिश करोगे क्योंकि स्वास्थ्य का भोजन से बहुत ही गहरा संबंध है।  हर इंसान जिंदगी में दो समय की रोटी खाने के लिए बहुत ज्यादा भागदौड़ करता है इसलिए जितना भी खाना खाएं उसका सकारात्मक प्रभाव हमारे शरीर पर पड़े ।इसके लिए हमें कुछ नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए ताकि हम जो भोजन खा रहे हैं उसका कोई भी बुरा प्रभाव हमारे शरीर पर ना पड़े।
 
* भोजन करने के नियम और सवास्थय लाभ -
 भोजन करने से पहले दोनों  हाथ, मुंह  और पैरो को भली भांति धोकर आचमन करते हुए और शांति के साथ पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करके स्वच्छ वातावरण में बैठकर ही भोजन करना सबसे अच्छा माना जाता है।

भोजन करते समय काम क्रोध लोभ और मोह को त्याग करके भोजन को मुंह में डालते हुए बिना बोले भोजन करना चाहिए।

 भोजन की थाली धुली हुई होनी चाहिए और साथ में अगर हो सके किसी लकड़ी की पटरी के ऊपर रखकर भोजन करना चाहिए।
अगर संभव हो भोजन घर की मां बहन बेटी और भाभी के हाथों के द्वारा बनाया हुआ ही  भोजन धारण करना चाहिए, क्योंकि उसमें उनकी भावनाओं जुड़ी होती हैं।

धर्म के अनुसार इंसान को भोजन जमीन  पर बैठकर ही करना चाहिए क्योंकि जमीन की पोजटीव तरंगे हमारे शरीर के अंदर पैरों से प्रवेश करती है जिसका सकारात्मक प्रभाव हमारे शरीर के ऊपर पड़ता है।

भोजन करते समय थाली में कभी भी भूलकर 3 रोटियां न रखें  रखें क्योंकि तीन  का अंक को अशुभ माना जाता है।

 आपको ऐसे भोजन के अच्छे संस्कार भी मिलेंगे । अन्यथा जैसा खाए अन्न वैसा ही हो जाएगा मन। जितना भी हो सके घर का बनाया हुआ अपने घर की औरतों द्वारा ही भोजन जो बनाया जाता है वही ग्रहण करें।

भोजन शुरू करने से पहले सबसे पहले स्नान करके सबसे पहली रोटी गाय को, कुत्ते को, अतिथि को, भूखे को खिलाकर अग्नि को गारस देकर ,प्रभु नारायण को याद करके उनको भोग लगाकर ही प्रभु की कृपा समझकर, यह भोजन प्रभु का दिया हुआ है जो भोजन मुझे मिल रहा है इसमें प्रभु का ही हाथ है, ऐसी मन में धारणा रखकर भोजन प्राप्त करना चाहिए और जितना  संभव हो सके चाहे औरत हो या फिर मर्द से सिर ढककर ही भोजन करना चाहिए।


भोजन हमेशा शुभेच्छा ऋतु के अनुसार ही होना चाहिए । होटल में बनाया हुआ भोजन अशुद्ध , असवासथय कारक होता  है।होटल में भोजन जितना हो सके संभव, नहीं खाना चाहिए। जितना भी संभव हो अपने घर का बना हुआ भोजन होना चाहिए। क्योंकि उस भोजन में भोजन के साथ प्रेम और शुद्धि होती है जिसको खाने से मन को शांति और स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ता है और आपकी लंबी उम्र सब कुछ प्राप्त हो सकती हैं ।बड़े तकदीर वाले होते हैं वह लोग जो घर का बना हुआ भोजन ग्रहण करते हैं।


भोजन हमेशा पवित्रता और शुद्धता से बनाया जाए शुद्ध और पवित्र होकर शुद्ध स्थान पर किया जाए। भोजन हमेशा ऐकांत में करना चाहिए उस पर किसी की दृष्टि नहीं पढ़नी चाहिए। अपनी पत्नी, बहन और माँ के हाथों से बना हुआ खाना चाहिए।

भोजन को जितना हो सके चम्मच के साथ खाये  क्योंकि कई बार हमारे नाखूनों के अंदर गंदगी फसी होती है। जितना संभव हो भोजन को हमेशा छोटे चम्मच के साथ परोसने  चाहिए।  किसी का भी झूठा भोजन, जो भोजन पैर सै छुआ जाए या लाघं दिया गया उसे कभी ना खाएं ऐसा भोजन  स्वास्थ्य को खराब करेगा।

भोजन करने के पश्चात कभी भी अपने हाथों को थाली में नहीं धोना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से अन्नपूर्णा माता नाराज होती है और जिसके कारण हमें धन की कमी होने लगती है  और ऐसा करने से हमारी आर्थिक स्थिति खराब होती है।ज

 दूध गाय भैंस और बकरी को छोड़कर अन्य किसी पशु का दूध मनुष्य के पीने के योग्य नहीं होता इनमें सबसे उत्तम गाय का दूध माना जाता है।

 भैंस हो या गाय जब तक उसका बच्चा 10 दिन का  हो जाये तब तक उसका दुुध नही  पीना चाहिए । 

भोजन करते समय अगर किसी की भोजन परछाई पड़ जाए या बुरी नजर पड़ जाए या फिर बाल या कोई कीड़ा दिख जाए तो उस भोजन को त्याग देना चाहिए। ऐसा  भोजन  कभी भी भूल कर नहीं करना चाहिए। 

भोजन करते समय इस बात का ध्यान रखें सबसे पहले  मीठा खाद्य पदार्थ,  बीच में गरिष्ठ नमकीन खट्टी वस्तुओ और अंत में कड़वी वस्तु  खाये ।

 तरल पदार्थ खाने से बल और अयोग्यता में कमी नहीं आएगी। संध्या करने के बाद बचा हुआ जल फेंक देना चाहिए उसे कुत्तों के मुत्र के समान अपवित्र समझा जाता है।

 भोजन के समय शरीर पर कुर्ता कमीज नहीं होना चाहिए शरीर को खुला रखना चाहिए किंतु केवल धोती पहन कर ही भोजन करना अति उत्तम माना जाता है पर कंधे पर चादर या गमछा अवश्य रखना चाहिए। भोजन के पश्चात हाथ धोकर गिले हाथ नेत्रों परखे लेने से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है।

भोजन करते समय एक थालि या पात्र में कई लोगों को एक साथ भोजन नहीं करना चाहिए, ऐसा भोजन हानिकारक माना जाता है।
 छोटे बच्चों को कभी भी  झूठा भोजन नहीं देना चाहिए  कयोंकि छोटे बच्चों की इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होती है वह जल्दी बीमारी को पकड़ लेते हैं। इसलिए न किसी का झूठा भोजन  खाओ और न किसी को अपना झूठा मत खिलाओ एक बार का झूठा भोजन दोबरा काम में लाऔ। 
 उसको फेंक देना चाहिए।

लाल मिर्च, खटाई, तेल के बने पदार्थ ,पूरी और चाट मसाला स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है।

 बहुत गर्म दूध पीना अथवा को ठंडा भोजन  खाना पेट को तो खराब करता ही है साथ में दातँ शीघ्र ही गिर जाते हैं ऐसी भोजन को हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

अपने स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए सोडा वाटर लेमन नहीं पिना चाहिए  वह झूठा तो होता ही है साथ में हमारे स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होते हैं।  जितना हो सके ऐसी तरल पदार्थों से बचना चाहिए क्योंकि इनका फायदा कम नुकसान ही नुकसान होता है।

यदि आप चाहते हो कि आप स्वस्थ रहें और पेट ठीक से काम करें तो पान ,तम्बाकु कभी मत खाओ, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट चाय, कॉफी सभी  प्रकार के नशीली वस्तुएं मांस, मछली, अंडे प्याज, लहसुन  तथा बासी और शराब भोजन बुद्धि को निश्चय ही मलिन करता है और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। 
 भोजन करते समय हमारे शरीर में ऊर्जा का निर्माण होता रहता है और नंगे पैर पृथ्वी को छूने  और भोजन की पूरी की पूरी उर्जा हमारे शरीर को प्राप्त होगी। 
 
माँसाहारी भोजन के नुकसान-
बहुत सारे लोग मांसाहार खाने के शौकीन होते हैं, पर मेरा यह खुद का मानना है कि मांसाहार खाना हर तरह से नुकसानदायक  है, क्योंकि हमें पता ही नहीं होता किसी जानवर का भोजन हम खा रहे हैं। वह किस  बीमारी से ग्रस्त था, हो सकता है उस जानवर के अंदर कोई भयंकर बीमारी हो वह आपके अंदर जाएगी ही जाएगी और आप ऐसा भोजन खा कर अवश्य बीमार होंगे, और मेरा तो यह भी मानना है कि मरी हुई चीज को हम समसान घाट लेकर जाते हैं ना कि अपने और पेट में रखते हैं ।इसलिए जितना हो सके मांसाहार के सेवन से दूर रहें और शुद्ध  और स्वस्थ भोजन करें क्योंकि स्वास्थ्य हमारा है और इस को स्वस्थ रखना भी हमारी जिम्मेवारी है। 

 एक कहावत के अनुसार जैसा खाएंगे  अन्न और वैसा होगा मन।  अगर हम भोजन शुद्ध सात्विक खाएंगे तो हमारा मन पर भी असर शुद्ध सात्विक ही होगा। अगर हम मांस मछली इस प्रकार का भोजन खाएंगे तो हम तामसिक विचारों वाले बन जाएंगे और हम अपने बच्चों को भी ऐसा ही बना देंगे ।इसलिए भोजन करते समय इन सब बातों का ध्यान रखें।

भोजन खाने  के बाद कया न करें-
भोजन के तुरंत बाद पानी या चाय नहीं पीना चाहिए। भोजन के पश्चात घुड़सवारी, दौड़ना, बैठना, शौच आदि नहीं करना चाहिए। 

भोजन के बाद  क्या करें-
भोजन के पश्चात दिन में टहलना एवं रात में सौ कदम टहलकर बाईं करवट लेटने अथवा वज्रासन में बैठने से भोजन का पाचन अच्छा होता है। भोजन के एक घंटे पश्चात मीठा दूध एवं फल खाने से भोजन का पाचन अच्छा होता है। 

क्या न खाएं-
रात्रि को दही, सत्तू, तिल एवं गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए।
*दूध के साथ नमक, दही, खट्टे पदार्थ, मछली, कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए। शहद व घी का समान मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।
दूध-खीर के साथ खिचड़ी और उड़द की दाल  नहीं खाना चाहिए।


भोजन की शक्ति-
 शांत मन से भोजन करें यह दृढ़ भावना बनाए कि यह  भोजन मुझे पूर्ण शक्ति और ऊर्जा प्राप्त हो रही है ,मैं जो कुछ भी खा रहा हूं, वह भगवान का प्रसाद है, ऐसा समझकर हमेशा भोजन को ग्रहण करना चाहिए और भोजन बनाने वाली जो भी महिला आपके घर में है उसको हमेशा आदर सम्मान और इज्जत से पेश आएं,  क्योंकि वह केवल आपके भोजन बनाने वाली माई नहीं है वह आपकी घर की लक्ष्मी भी है।  जो लोग अपने घर की औरतों को लक्ष्मी मानते हैं और लक्ष्मी मानकर उनके हाथों को बनाया भोजन को ग्रहण करते हैं निश्चित रूप से ही भगवान उनको बरकत देता ही देता है इसमें किसी भी प्रकार का शक नहीं है।
 अंत में मैं आपको यही कहना चाहूंगी आपके घर में जो भी महिला भोजन बनाती है उसके साथ हमेशा आप इज्जत से पेश आएं और उसकी भावनाओं की कदर करें ।क्योंकि बहुत कम लोग हैं जिनके घर में घर का बना हुआ खाना मिलता है नहीं तो बहुत सारे लोग घर के बने हुए खाने के लिए तरस जाते हैं, या फिर घर में बनाने वाली उनके पास महिला ही नहीं है।
 जो महिला आपके लिए घर में भोजन बना रही हैं, वह केवल भोजन ही नहीं अपनी भावनाओं को साथ में उस भोजन में आपको परोसकर दे रही है। कभी भी उस औरत के मन को ना दुखाएं अगर वह दुखी मन से आपके लिए भोजन बनाएगी तो आपको दुख प्राप्त होंगे अगर आपको खुश रखेंगे तो आप वह हर तरह से खुशी से भोजन बनाएगी और आपको हर तरफ से  भोजन के साथ खुशियाँ ही मिलेगी।

Last alfaaz- भोजन को केवल भोजन समझ कर ही ग्रहण ना करें बल्कि उसे प्रसाद समझकर ग्रहण करें ऐसा भोजन हमारे लिए भगवान के प्रसाद के बराबर बन जाता है। 


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