सास और बहु एक दुसरे की दोस्त कैसे बने | सुसराल में रिशतो को कैसे ठीक रखे |

सास और बहू के रिश्ते को कैसे मजबूत बनायें-
सास बहू का रिश्ता बुरा नहीं है जितना समाज ने बदनाम कर रखा है । यह एक दूसरे को समझने का सबसे अच्छा  रिश्ता है ,क्योंकि एक औरत ही एक औरत की पीड़ा को समझ सकती है। आज हम इस लेख के माध्यम से इस रिश्ते को मजबूत कैसे बनाएं उसको समझाने की कोशिश करेंगे। इस रिश्ते में दोनों  ही औरतें आपस में तालमेल नहीं बिठा पाती कयोंकि समाज ने इस रिश्ते को कभी अपनाया ही नही । अगर इन दोनों में अच्छे से तालमेल बैठ जाए तो यह रिश्ता मां बेटी के रिश्ते से भी अच्छा हो सकता है।


सास और बहु एक दुसरे को कैसे समझे-

 सिर्फ छोटी - छोटी बातों में नासमझी के ही कारण सास और बहू के झगड़े शुरू होते हैं और बाद में वे छोटी - छोटी बातें विकराल रूप धारण कर  लेती है। घर में अशान्ति पैदा हो जाती है और  पति, बेटा के बीच में विभाजन हो जाता है । मां और बेटे में जिस मां ने उस बेटे को 9 माह पेट में रखा खुद अपना सारा प्रेम उसपर लुटाकर शादी करी तो अनेक अरमान अनेक प्रकार की खुशियों को पाने के लिये, घर में  झगड़ा पैदा होने में दोनो की ( सास और बहू ) ही थोड़ी - थोड़ी भुल और नासमझी होती है वरना अगर दोनों ही समझदारी से काम ले तो झगड़ा पैदा ही नहीं होगा । 
दोनों ही सहनशक्ति से काम ले-
 जब घर में किसी भी बात को लेकर बहुत ज्यादा तनाव बढ़ रहा है तो इस समय  दोनों ही सहनशक्ति से काम ले।  ऐसे महोल में सहनशक्ति वो हथियार है जो तनाव को सहन करने की ताकत  बुराई को काटकर आप को मजबूती प्रदान करेगा। 
अगर आप के पास सहनशक्ति नाम की औषधि है तो आप ( सास बहू) दोनों में हो तब कोई तीसरी स्त्री झगड़ा करवाना भी चाहे तो मी झगड़ा पैदा नहीं होता । यह भी देखने सुनने में आया है कि तीसरी औरत जिसे दूसरों के घर में शान्ति अच्छी नहीं लगती वह झगड़ा कर गलत बातें सीखा कर झगड़ा शुरू करवा देती है । इस बात को समझ लेना चाहिये और अपनी बुद्धि से काम ले  न कि लोगों के बहकावे में आकर घर का माहोल खराब करे।
 कुछ  बहुयें अपने माता - पिता के घर की ( पीहर की ) बडाई ससुराल में कुछ  ज्यादा ही कर देती है , जिसके कारण भी सुसराल पक्ष की तरफ से झगड़ा और नफरत से शुरू हो जाती है शुरू हो जाती है, तो ऐसे में  बहुओं को पीहर को भूलाकर , ससुराल को ही अपना सबकुछ मानकर पूरा प्रेम और इज्जत के साासाथ  ससुराल को ही अपना सब कुछ मान लेना चाहिये। अगर आप इन  बातों का ध्यान रखते हो तो आपको मायके से भी ज्यादा  इज्जत  सुसराल में मिलने  लग जाएगी ।

सासू माँ  के लिए  विशेष टिप्स-

 सास को अपनी बहू को अपनी बेटी से भी ज्यादा स्नेह देना चाहिये।  बहू को अपने घर की रौनक ,रोशनी मानना चाहिए  कयोंकि बुढापे में बेटी नही बहू सेवा करती है।  अगर  बहू से कोई  गलती हो जाये तो  उस पर सास को गुस्सा नहीं करना चाहिये , बल्कि उसे पहले  प्रेम से समझाने का प्रयास करें , क्योकि समझ तो सबकी अलग - अलग होती ही है । सास ख़ासकर अपनी उस समय को याद करे कि कभी वो बहू थी इस घर की। अगर इस प्रकार समझदारी से काम लोगे तो घर में कभी भी सास बहू के झगड़े नहीं होंगे, क्योंकि एक औरत ही एक औरत की पीड़ा समझ सकती हैं। इसलिए अपनी बहू को नारी  समझे बाद में उसको हुकुम बाजी चलाएं, क्योंकि जैसे आप कभी अपने पीहर का घर छोड़कर आई थी, तो वह भी एक नए पौधे की तरह है, उसको समय लगता है नई जगह आकर अपने पैर जमाने में ,क्योंकि एक बार तो पौधे की तरह  वह भी मुरझा जाती हैं तो उसको समय देने के लिए पनपने के लिए। 

 • बहू के लिये कुछ  विशेष  बाते - 

 एक तो सास कोई बात कहे तो सामने मत बोलना और दूसरा , सास जो काम कहे , उसका कहना मानकर काम को कर देना । यह नियम कम से कम शुरू के बारह महीने पालन कर लिया तो सब काम ठीक हो जायेगा, अगर  बीच में कभी भुल करी तो उसी दिन से फिर बाहर महीने गिने जायेंगे । उससे पहले जो दिन बीते वे गिनती में नहीं आयेंगे । ऐसा करने से झगड़ा कभी भी पैदा ही नहीं होगा । सास बहू से अपेक्षा करती है कि वह उसको माँ समझे , लेकिन स्वयं बहू को बेटी मानने को तैयार नही,  बहू चाहती है कि सास मुझको बेटी की तरह माने , लेकिन स्वयं सास को मा जैसा आदर नहीं देती ।  सास को चाहिये कि बहू की कमियों को छिपाये और उसकी उसके सामने परिवार वालों के सामने उसकी बड़ाईया करें और बहू को चाहिये कि सास की बुराईयों को छिपाकर सास की उसके सामने परिवार वालों के सामने बढ़ाई करें । इस प्रकार इस रिश्ते को तालमेल बिठाकर ही जिंदगी की इस रेस को जीत सकते हो आप , एक दुसरे को नीचा दिखाकर नही।  वैसे तो सुसराल के सारे रिश्ते ही अनमोल है पर जो आपका जीवनसाथी है उसने आपकी सास की कोख से ही जन्म ले रखा है सबसे जयादा उसके साथ आपकी बननी बहुत जरूरी है।
 
जिस बहू ने अपने पति की मां  का मन जीत लिया तो फिर उसको किसी भगवान की पूजा करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हमारे धर्म संसार भी माता-पिता  किसी भगवान से कम नहीं है। आपके जीवनसाथी की अगर जन्म देने वाली माता आपसे खुश है तो आपको फिर किसी और को खुश करने की जरूरत नहीं है।

सास बहू का रिश्ता बड़ा ही अनोखा होता है क्योंकि दोनों ही उस घर को संभालने के लिए अलग-अलग परिवार से आती हैं। दोनों के मां-बाप सब कुछ अलग होता है। दोनों ही औरतों  के आपस मे  विचार मेल नहीं खाते और मैं आपको इस बात के लिए ही कहना चाहूंगी कि  विचार बहन भाइयों के मिल सकते हैं, इस रिश्ते में नही। यहां तो आपको  तालमेल बिठाना पड़ता है।  बैगानों को अपना बनाने के लिए, भगवान ने औरत को बहुत ही बड़ी शक्ति बख्शी है ,किसी और को अपना बनाने की, फिर एक बहू के लिए अपने पति की मां को अपना  बनाना कोई मुश्किल काम नहीं है।

सास को भी इस बात की समझ रखनी होगी कि अगर आप अपने बेटी की किसी गलती के लिए माफ कर सकते हो या उसको समझा सकते हैं तो फिर बहू  की भी बातों का बतगडं न बनायें ।  इस रिश्ते में सास और बहू दोनों सिर्फ एक दूसरे को समझने के लिए कम से कम 1 साल का समय अवश्य दें फिर आपकी जिंदगी भर ऐसे बनेगी शायद फिर आपको किसी और दोस्त की जरूरत ना पड़े।

 बहू को भी समझना चाहिए कि अपने ससुराल घर की बातें अपने मायके में जाकर ना बताएं क्योंकि बुरी बातें जंगल में आग की तरह फैल जाती हैं और अच्छी बातों को अगरबत्ती की खुशबू की तरह फैलने में समय लगता है। अगर एक बार  आपके घर की कोई भी गलत बात फैल गई तो आप उसको जिंदगी भर लोगों को समझा नहीं सकती तो ऐसी गलती कभी भी भूलकर ना करें। जितना हो सके अपने ससुराल घर की बातें अपने मायके में जाकर शेयर ना करें।

सास ,बहू का रिश्ता बहुत ही अनमोल है। इस रिश्ते को कामयाब करने के लिए समझदारी और सहनशक्ति दोनों को ही एक रामबाण औषधि की तरह प्रयोग करें।  जिस प्रकार हम स्कूल या कॉलेज में पढ़ने के लिए जाते हैं वहां पर भी तो हम अनजान लोगों से बहुत अच्छे से दोस्ती कर लेते हैं और वही दोस्त हमारे जिंदगी भर रहते हैं। तो इस प्रकार  ससुराल के रिश्तो की शुरुआत भी एक नया कोलिज मानकर शुरू कीजिए।

Last alfaz- 

तुम रिश्तो में न ननद बनो, न जेठानी बनो , न सास बनो , तुम बस केवल एक स्त्री बनना और दुसरी औरत के दुख दर्द को समझना …!!


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 धन्यवाद।    posted by-kiran







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