गणेश चतुर्थी पर पुजा कैसे करे | मनोकामना पूर्ति के लिए बुधवार को गणेश की पुजा करे |

Tittle- गणेश चतुर्थी पर सथापना कैसे करें- गणेश चतुर्थी  हिन्दू धर्म में  इसी दिन भगवान श्री गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। कहा जाता है कि जो गणपति के 12 नामों या फिर आपके पास समय की कमी ना हो तो 108 नामों का भी स्मरण करते हो तो उस जातक की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण हो जाती है ।
विद्यार्थियों को विद्या अध्ययन में सफलता मिलती है । धानार्थी को धान प्राप्ति होती है, विघ्न - बाधा दूर होती है, रोग दूर भागते हैं, पूरी आस्था से की गई भक्ति पूजा अवश्य ही रंग लाती है ।
इस स्त्रोत्र का नित्य तीन बार पाठ करने से तथा मंगलवार ( बुधवार ) और चतुर्थी को 21 बार पाठ करने से सब प्रकार के विघ्नों की शांति होती है ।
श्री गणेश जी की पूजा समस्त आध्यात्मिक , धार्मिक कर्म , में प्रत्येक पूजा - पाठ , यज्ञ , शादी , व्याह , मुहुर्त , कार्य आरम्भ , मकान मुहर्त , आदि - आदि समस्त कार्यो में प्रथम पुज्यनीय देवता के रूप में सबसे पहले पुजा की जाती है उसके बाद ही कोई शुभ कार्य शुरू करते हैं।
श्री गणेश जी समस्त सिद्धियों , शुभ फली , विद्या - बुद्धि , सफलताओं को शीघ देने वाले देवता है, जो प्राणी सर्व प्रथम गणेशजी की पूजा करे बिना . अनुष्ठान , पूजा , कार्य आरम्भ करेगा तो उसका मंगल कार्य भी , अमंगल हो जायेगा।





गणेश के नाम का स्मरण ही शुभकारक होता है, लेकिन गणेशोत्सव में , दस दिन उनका विधि - विधान से पूजन किया जाये तो ये विशेष फलदायी होते है । अनुष्ठानी पंडितों के अनुसार घर में विराजे गणेश को आचमन करा विधि - विधान से पूजन करें चतुर्दशी को एक ही समय भोजन करे और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेशजी चतुर्दशी को दोपहर को जन्मे थे . गणेशजी के पूजन में दुर्गा का विशेष महत्व होता है।
भगवान गणेश को दुर्वा बहुत प्रिय है । इसके साथ भगवान गजानन को 21 लड्डुओं का भोग लगाया जाये । इसके साथ यदि गणेशजी के विशेष मंत्र का उच्चारण किया जाये तो पूजन सफल हो जाता है ।
ये मंत्र है :- विघ्नानि नाशमायनं तू पूजते त्यैधारित....!!

श्री गणपति जी की पूजा आरम्भ करने की विधि विधान :-
नित्य कामो को समापत कर शुद्ध होकर और शुद्ध आसन से पूर्वाभिमुख की ओर मुख करके बैठे पूजन के लिए समस्त सामग्री एकत्रित करके अपने पास रख लें । सामने चौकी पर वस्त्र बिछाकर , गणपति की मूर्ति - चित्र या यन्त्र स्थापित कर ले, प्रतिमा के अभाव में एक पात्र में चावल भरकर उसके मध्य में एक सुपारी को मौली लपेटकर रख ले और उसमें गणपति की भावना करे । पूजन प्रारम्भ करने से पूर्व घी का दीपक जलाकर देव - प्रतिमा की दाहिनी ओर अगरबत्ती , सुभाषित धूप बायें प्रज्वलित करके स्थापित करें । दीपक की गन्ध - पुष्प और अक्षतादि से ॐ दीप ज्योतिषे नमः ' मन्त्र से पूजा करके निम्न प्रार्थना मन्त्र बोलकर प्रार्थना शुरू करें।
भो दीप ! देवरूपस्तविं कर्मसाक्षी ह्यविघ्नकृत । यावत् कर्म समाप्तिः स्यात्तावत्त्व  सुस्थिरो भव ।।

अब इन मन्त्रों में तीन बार आचमन करें और चौथे मन्त्र से हाथ धो लें । ( 1 ) ॐ केशवाय नमः स्वाहा . ( 2 ) ॐ नारायणाय नमः स्वाहा , ( 3 ) ॐ माधवाय नमः स्वाहा । ( 4 ) ' ॐ गोविन्दाय नमः ' बोलकर हाथ धो लें और जल को अपनी बायीं ओर पीछे फेक दें और दाहिने हाथ की अंगूली में कुशा की बनी
पवित्री धारण करें । कुशा के अभाव में स्वर्ण या चांदी की अंगूठी भी धारण की जा सकती है ।पवित्री धारण करके बायें हाथ में जल लेकर उसे दाहिने हाथ से ढंक लें और मन मन पार्थना करे तथा दाहिने हाथ की मध्यमा और अनामिका ( दोनों के बीच की अंगुली ) को मिलाकर जल को मस्तक पर छिड़कें।और अपनी मनोकामना भगवान् सामने रख दे इस तरह जब तक आप भगवान् गणेश को अपने घर मे विराजमान रखते हो यह विधि हररोज इसी प्रकार से करे।उसके बाद आप अपने घर के कार्य कर सकते हो।

गणेश पूजा की सामग्री---
 पूजन सामग्री - गणेश जी की पूजा के लिए गणेश प्रतिमा, जल कलश, पंचामृत, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत यानी साबुत चावल, कलावा, जनेऊ, इलाइची, नारियल, चांदी का वर्क, सुपारी, लौंग पंचमेवा, घी, कपूर, पूजा के लिए चौकी, लाल कपड़ा और गंगाजल इत्यादि चीजों को इकट्ठा कर लें.
देश भर में गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. इस बार कोरोना के कारण गणेशपूजा भी लोग सिर्फ घर पर रहकर ही कर रहे है। भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को जन्में भगवान गणेश का उत्सव भारत के कई इलाकों में 10 दिनों तक मनाया जाएगा. घर-घर गणपति बप्पा पधारेंगे. आरती, कथा, मंत्र, भजन से उनका स्वागत किया जाएगा. उनका पसंदीदा मोदक भोग लड्डु लेने के लिए जुटाने में लगे हुए है। इस त्योहार की सबसे ज्यादा रौनक मुबंई में देखने को मिलती है। हालांकि इस बार कोरोना वायरस के कारण सार्वजनिक जगहों पर मूर्ति स्थापना नहीं किया जाएगा.

कितने दिन करे गणेश जी की स्थापना - 
दस दिनों तक रखें विशेष ख्याल 
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेशजी की 10 दिन के लिए स्थापना करके उनकी पूजा-अर्चना की जाती है. वेदों के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा की 1, 2, 3, 5, 7, 10 आदि दिनों तक पूजा करने के बाद उसका विसर्जन किया जाता है. गणेश जी को घर पर स्थापित करने के बाद से विसर्जन करने तक उनका पूरा ख्याल रखा जाता है और उन्हें अकेला भी नहीं छोड़ा जाता.और हररोज अलग अलग प्रकार का भोग लगाया जाता है।
भगवान गणेशजी की भोग सामग्री
गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक यानी कि जब तक भगवान गणेशजी घर में रहते हैं तब तक उनका मेहमान की तरह ध्‍यान रखा जाता है. गणपति को दिन भर में 3 बार भोग लगाना अनिवार्य होता है. वैसे गणपति को मोदक अति प्रिय होते हैं. इसलिए इसका भोग लगाना चाहिए. लेकिन आप चाहें तो गणेश जी को बेसन के लड्डू का भी भोग लगा सकते हैं और फलो मे केला पुरे साल आसानी से मिल जाता है यह गणेश जी का प्रिय फल है। और अन्त मे दोनों समय आरती जरूर करे। 

क्या ना करें :- 
 1: गणेश जी की मूर्ति स्थापना करने के बाद घर में क्लेश और लड़ाई झगड़े ना करें,।
 
2:किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन ना बनाएं जैसे अंडा ,मांस मछली ,यह सब निषेध माने गए हैं और अगर हो सके तो मदिरापान भी ना करें। 
3: अगर आपके द्वार पर कोई भी  इन दिनों भीख मांगने आ जाए तो उसे कभी भी खाली हाथ ना लोटाये, अगर ज्यादा कुछ ना कर सके तो पानी अवश्य पिलाएं।

4: गणेश चतुर्थी के दिन चांद के दर्शन ना करें- 

गणेश चतुर्थी के दिन रात को चंद्रमा के दर्शन न करें. इस दिन चंद्रमा के दर्शन करना शुभ नहीं माना जाता है। 22 तारीख को रात में चंद्रमा के दर्शन करने से मिथ्या कलंक लग सकता है ऐसा  हमारे शास्त्रों में लिखा हुआ है ।

 
विघ्नहर्ता की पूजा का शुभ मुहूर्त- 

इस बार 22 अगस्त कल 7 बजकर 57 मिनट शाम तक चुतुर्थी तिथि रहेगी. इसमें राहुकाल को हटाकर आप गणपति की स्थापना करने का काम कर सकते हैं. पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक है. विशेष मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 45 मिनट है. वैसे भगवान् किसी समय के मोहताज नहीं बस मन उनके प्रति भावना और श्रद्धा होनी चाहिए।
ऐसा माना जाता है कि गणेश जी का जन्म दोपहर के समय में हुआ था, इसलिए इनकी पूजा दोपहर के समय की जाती है. इस बार 22 अगस्त के दिन भगवान गणपति की पूजा के लिए दोपहर में 02 घंटे 35 मिनट का शुभ समय है. इस साल आप दिन में 11 बजकर 6 मिनट से दोपहर 1 बजकर 42 मिनट के बीच विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा कर सकते हैं.।

अन्त में नीचे लिखी प्रार्थना बोलकर पूजन -क्रम समाप्त करना चाहिए -

प्रार्थना विधि कैसे करें -

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय । लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय । नागाननाय श्रुति यज्ञ विभूषिताय । गौरी सुताय गणनाथ नमो नमस्ते ।। भक्तार्तिनाशनपराय गणेश्वराय । सर्वेश्वराय शुमदाय सुरेश्वराय । विद्याधराय विकटाय च वामनाया।
भक्त प्रसन्न वरदाय नमो नमस्ते ।। नमस्तेब्रह्मरूपाय विष्णुरूपाय ते नमः । विष्वरूपस्वरूपाय नमस्ते ब्रह्मचारिणे । भक्तिप्रियाय देवाय नमस्तुभ्य विनायक। लम्बोदर नमस्तुभ्यं सततं मोदकप्रिया।। निर्विघ्न कुरू में देव सर्वकार्येषु सर्वदा । त्या विघ्न शत्रुदलनेति च सुन्दरति ।
भक्त प्रियेति सुखदेति फलप्रदेति । विद्याप्रदेत्यवहरेति च ये स्तुवन्ति । तेभ्यो गणेश वरदा भव नित्यमेव ।। गणेशपूजने कर्म यन्ननयूनमधिकं कृतम् ।। तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्नोऽस्तु सदा मम ।। अनया पूजया सिद्धि - बुद्धि सहितो श्री महागणपतिः प्रीयन्तां न मम ।

विसर्जन विधी-

आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम् । पूजा चैव न जानामि क्षमस्व गणेश्वर ।। अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेश शरणं मम । तसमात्कारुण्य भावेन रक्षस्व विघ्नेश्ववर। गतं पाप दुःखं गतं दारिद्रतमेव च । आगताः सुख सम्पतिः पुण्याश्च तब दर्शनात् ।। मन्त्रहीन क्रियाहीन भक्तिहीनं सुरेश्वर । यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु में । यदक्षर पदं भष्ट मात्रहीनं च यद्भवेत् । तत्सर्व सम्यतां देव प्रसीद परमेश्ववर।।

इस प्रकार पूरी पूजा को विधि विधान के साथ करने के बाद आप गणपति, विघ्नहरता का विसर्जन करें, और अपनी मनोकामना को मन ही मन मैं बोले। इस प्रकार भगवान श्री गणेश जी बहुत प्रसन्न होकर आपको आशीर्वाद दे कर ही जाएंगे, और आपकी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
भगवान भाव के भूखे हैं उन्हें किसी के हीरे जवाहरात नहीं चाहिए। मन में विश्वास और श्रद्धा होनी चाहिए। भगवान की भक्ति करते समय घर में किसी प्रकार का कलेश और मांस, मदिरा का सेवन ना करे ।

जय श्री गणेश 

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