कन्या के शीघ्र विवाह के लिए चमत्कारिक उपाय और संस्कारों का देहज- Dil ke alfaaz.


कन्या के शीघ विवाह के लिए विविध उपाय :-
1. कन्याएँ प्रतिदिन सुबह और शाम 7 बार कुन्ती - माता और 7 बार सीता -माता का नाम उच्चारण करें तो उन्हें अच्छे स्वभाव और धार्मिक प्रवृत्ति वाला पति मिलता है ओर वे प्रतिव्रता रहेगी ।
हे गौरि शंकराधांगी यथा त्वं शंकरप्रिया । तथा मां कुरु कल्याणि कान्तकान्ता सुदुर्लभाम्......
पार्वती जी के चित्र पर चन्दन, पुष्प चढ़ाकर उपर्युक्त मन्त्र की सात या ग्यारह माला जाप करे तथा प्रार्थना करें , फिर रामायण में ' जय जय गिरिवरराज किसोरी ' ( मानस बाल) से लेकर मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगें तक श्रद्धाविश्वासपूर्वक पाठ करे ।

2.कोरे कागज पर लाल स्याही से सवा लाख बार राम - राम लिखें। कागज के एक ही तरफ लिखे कागज पर लाइनें ना हो ।

3. रामायण में राम विवाह के प्रसंग में मॉडवी श्रुतिकीरति ' छन्द से पाठ आरम्भ करके वहीं पर पाठ की समाप्ति करें। जबतक विवाह ना हो , तब तक कोई एक उपाय करते रहना चाहिए।

बहनों से अनुरोध है कि वे कातरहदृय से भगवान से प्रार्थना करें और प्रतिदिन माता पार्वती के मंढवाये हुए चित्र पर चन्दन , पुष्प चढ़ाकर नीचे लिखे मन्त्र की 11 माला का जप करें । अगर 11 ना तो 5 माला ( 108 दानों की एक माला ) का जाप अवश्य करें। औ, अन्त मे माँ पार्वती से प्रार्थना करें ऐसा करने से कई जगह बहुत शीघ्र सफलता मिली है ।
मन्त्र यह है :- हे गौरि शंकराधांगी यथा त्वं शंकरप्रिया' या मां कुरु कल्यानि कान्तकांता सुदुर्ललाभाम्
यह वर प्राप्ति का अनुभूत मन्त्र प्रयोग है।
अनेक शिक्षित योग्य कन्याओं को सुयोग्य वर ना मिलने की वजह उनके माता-पिता तथा परिवार वाले बड़े चिंतित रहते हैं और कन्याए भी मन ही मन चिंता में घूलती रहती हैं।
इस मनोकामना पूर्ति के लिए निम्नलिखित मन्त्र का प्रयोग उनके माता - पिता या कन्या कोई भी कर सकता है। मनोकामना के लिये यह सब पाठ या मन्तर विधिपूर्वक करना चाहिय। प्रात: उठकर एक बार नकदुर्गा को प्रणाम करते हुए इसका मन्त्र का पाठ करे। 
स्मरण - सर्वमंगलमांगलये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्रयम्बिके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ।।
 स्नानादिक से निवृत्त होकर प्रथम इस मन्त्र से सूर्य को 4 बार अर्घ्य दे तथा 7 बार प्रदक्षिणा करें और सूर्य  मंत्र - ॐ एहि सूर्य सहस्त्रंशो तेजोराशे जगत्पते  अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणाध्यं नमोस्तुते ।। 
जाप मन्त्र: - हे गौरि शंकराधांगी ! यथा त्वं शंकरप्रिया तथा मां कुरु कल्याणि , कान्त - कान्तासु दुर्लभाम् ।।
विधि- प्रातः पार्वती  मूर्ति के सामने । माला ( श्रीगौर्य नमः ) से पूजा तथा 3 बार मूर्ति प्रतिमा के माँग में सिन्दूर भरे , फिर जाप समाप्ति पर जय जय गिरवर राजकिशोरी ,जय महेश नम्बर मुख " चन्द्रचकोरी ” से “ वामअंग फरकन लगे (  यह पुरा दोहा आपको रामचरितमानस में पेज नम्बर .235.5 से 236  मिलेगा ) तक प्रार्थना करे । इस मन्त्र को शिव पार्वती मन्दिर में या घर में प्रतिमा के सामने पंचोपचार पूजन कर 3-5- या 7 माला लाल चन्दन , हरिद्रा ,तुलसी या कमल गट्टा की माला से  कर सकते हैं । पुजा करते समय पूर्व या उत्तर मुख करके जाप करे ।  इस प्रयोग के 10 दिनों के अंदर अवश्य फल मिलेगा।



बेटी को दे सस्कारो का दहेज :-
बेटी को घर के कार्य में दक्ष करें ताकि वह अपने ससुराल में कोई काम करने में हिचकिचाहट ना हो। अगर आप अपने बेटी को संस्कारों का दहेज देंगे तो आपकी बेटी सम्मान व इज्जत पाएगी ।जो आपके द्वारा दिए गए मूल्यवान उपहार देने से कभी नहीं हो सकती ।अमूल्य संस्कारों से आपकी बेटी उम्र भर खुशियों के साए तले सुख में जीवन व्यतीत कर सकती है। मां की शिक्षा बेटी का घर बनाने व उजाड़ने में काफी सहायक होती हैं।
संस्कारी शिक्षा:-
 बेटी को ऐसी शिक्षा दें जिससे वह अपने घर ससुराल में एडजस्टमेंट कर   सके। ससुराल ही उसका घर है तथा वहां के सभी सदस्य उसके अपने हैं, यही बात बेटी को समझाएं क्योंकि आपकी बेटी के घर के मामलों में दखलंदाजी उसकी सास तो क्या आपके दमाद भी बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे ।बेटी को समझाए कि सास तुमसे अधिक अनुभवशील है उन्हे दुनियादारी तुमसे अधिक समझ है। वह बड़ी है उनकी इच्छा को ही सम्मान दो यही तेरा धर्म है। किसी के ह्रदय को प्यार, विश्वास, ममता और त्याग से जीता जा सकता है। उन्हें कभी एहसास ना होने दो कि तू उनकी बहू है बेटी की तरह तन मन धन से उनकी सेवा करो। बेटी को यही कह कर विदा करो अपने रूप, गुण ,सुदंरता पर कभी अभिमान ना करो ।हर सास भी एक मां होती है उन्हें आदर, सम्मान और प्यार देकर अपना बनाया जा सकता है, ना की अपेक्षा  और अनादर करे।  वह बरसों से घर का बोझ उठाती सास की इच्छा होती है ।उसे बहू के आने पर कुछ राहत मिले और वह भी आराम कर सके। इसलिए बहू के आने पर वह अपने कुछ जिम्मेदारियां बहू को सौंपना चाहती है। जिसे उसे स्वीकार कर लेना चाहिए। नाते, रिश्तेदारों, पड़ोसियों की सास बहू में उत्पन्न कलह एक बड़ा कारण है और दूसरों के सामने बुराई करती देखी जाती हैं। और यह सब बातें सुनकर घर में लडाई का मोहाल बढ जाता है। और उनके मन में एक दूसरे के प्रति घृणा के बीज अंकुरित होने लगते हैं। ससुराल में हमेशा प्रातः काल से पहले ही उठे देर तक सोने की आदत को त्याग दें, क्योंकि ससुराल के नियमों को अपनाए उसे अपने मायके के सिद्धांतों पर छोड़ दें। मायके की हर चीज पर  अपना हक ना जामाये यदि कोई परिवारजन इस्तेमाल  करता है तो उसको गुस्सा ना हो और उनसे मर्यादा मे रहकर बात करे।

सास के लिए कुछ सुझाव:- 

 सास को चाहिए कि वह बहू को अपनी बेटी के सामान समझो,  अगर वह कोई गलती भी करते हैं तो पहले उसे प्यार से समझाएं। हमेशा डांटते रहने से उसका मन खिन्न होगा और वह आपका आदर नहीं कर पाएगी। दूसरों के सामने बहु की निंदा कभी ना करें। बहू को एक हद तक घूमने फिरने इजाजत दे। वह मायके से जो भी लाएं उसे खुशी से सविकारें और ना लाने पर ताने कभी मत दें। 
उसके माता-पिता को भूलकर भी अपशब्द मत कहें। बेटी बहू बनकर दो परिवारों को जोड़ती हैं, अतः कोई भी ऐसा काम ना करें जिससे दोनों परिवारों में दरार पैदा हो जाए। अक्सर घरों में यही होता है मायके को अपशब्द बोलते हैं लोग और दोनों परिवारों के बीच में दरार आ जाती है। उनके मान सम्मान को ठेस ना पहुंचाएं ।आप मां बनकर रहें सास बनकर नहीं। अपनी बहु में कोई कमी हो तो उसका बखान इधर उधर ना करे।  उसी काम को आप धैर्य और प्रेम से भी दूर करने की कोशिश कर सकते हैं। 
रिश्ते:- 
ननद, भाभी का रिश्ता ऐसा होना चाहिए जैसे छोटी बहन और एक सहेली का होता है। छोटी नंनद एक सहेली जैसी होती है ,जब बड़ा भाई और देवर को छोटा भाई मानकर चलें। अपना व्यवहार मर्यादित रखें। अपने तन मन और व्यवहार 
 से सभी का मन जीतने का प्रयास करें। हर एक सदस्य की जरूरत का ध्यान रखना एक आदर्श बहू की निशानी है। ससुराल में ऊंची आवाज में बात ना करें । ऊॅची आवाज ना निकाले और यदि कोई  आप के साथ जरूरत से ज्यादा अन्याय करे तो उस अत्याचार  को चुपचाप भी सहन ना करें। शांति से अपने अधिकार का प्रयोग करें।
मां-बाप की आज्ञा का पालन आज्ञा और उनका योगदान करें। किसी काम में  गलती हो जाए तो अपनी गलती सुधारने की कोशिश करें। यदि घर का कोई सदस्य कुछ कह दे तो मुह  फलाकर ना बैठे। अपनी गलती को सुधारने की कोशिश करे। 
 
आधुनिक युग:-और रिश्ते, आधुनिक युग में विवाह के रिश्ते को गुड्डा- गुड्डी का खेल समझा जाने लगा है। पति-पत्नी के बीच थोड़ा सा तनाव होने या मनमुटाव हो जाने से कुछ समय में ही तलाक की नौबत आ जाती है। कुछ पल में ही  गुस्से के कारण हंसता खेलता परिवार उजड़ जाता है।
 अपने बच्चों को संस्कारों का दहेज जरूर दे कयोंकि यह जिंदगी भर चलेगा। यही एक कड़वी सच्चाई है।

Last alfaaz:-
आजकल बेटियां पढ़ने लिखने में किसी से कम नहीं है, पर उन पर दोहरी जिम्मेवारी होती है। वह एक मा,बहन, भाभी, और बेटी के रिश्ते  से होकर गुजरती है। उसको जिम्मेवारी    भी दी जाती है। इसलिए अपनी बेटी को इस तरह की शिक्षा के साथ बड़ा करे ताकि अपनी जिम्मेवारी को अच्छे से संभाल सके, क्योंकि बेटियों में यह गुण  कुदरत ने सभाविक रूप से ही दिया होता है। बस अगर जरूरत है थोड़े से संस्कारों की अपनी बेटी को ऐसे संस्कार जरूर दें। दान, दहेज चाहे थोड़ा कम दे दें पर संस्कारों का दहेज जरूर दें। ऐसे संस्कार उसकी जिंदगी बना देते हैं।

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Quotes in hindi 

1. माँ दान दहेज चाहे कम दे देना पर ससंकारो का दहेज जरूर देना।


2. बेटे हर चीज की ज़िद करते हैं ,वही बेटियाँ अपने शोंक पुरानी चीजों से पूरे कर लेती है ..!!
Quotes. 
3. शर्त लगी थी दुनिया की
खुशियाँ को लिख देने की
लोग किताबों में ढूढते रह गयें
और मैंने अपनी ,बेटी का नाम लिख दिया..!!

4. जिस तरह बालों के बिना श्रृंगार अधूरा है उसी तरह बहु और बेटियाँ घर अधूरा है...!!

5. बेटे भाग्य से होते हैं लेकिन बेटियाँ सौभाग्य से होती है ...!!


Quotes. 6
बहु और बेटी में एक ही फर्क होता है बेटी गुड की तरह मीठी होती है और बहु नमक की तरह होती है इसलिए 
जैसे नमक के बिना सब्जी अधुरी है, उसी तरह बहु के बिना घर अधूरा है। 

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