Motivational and true story हमेशा भगवान् से डरो लोगों से नही

 Tittle :- (true story )👇🏻

हमेशा भगवान् से डरो लोगों से नही  

एक सच्चे इंसान की सच्ची कहानी मेरे गांव में जयवीर बहुत ईमानदार और सच्चे इंसान था। वह कभी किसी को बुरा करना तो बहुत दूर की बात बुरा सोचना भी उसके लिए किसी अपराध से कम नहीं था। एक दिन गांव में एक व्यापारी आलू खरीदने आया था। उसकी मुलाकात सबसे पहले जयवीर से हुई ,व्यापारी को आलू खरीदने थे तो उसने जयवीर से पूछा क्या गांव में कोई आलू बेच रहा है, जयवीर ने अपने गांव के  रतन का नाम लिया जिसके पास बहुत सारे आलू बेचने के लिए खेत में पड़े थे ,तो व्यापारी को उसने रतन का नाम और घर का पता बता दिया । अब व्यापारी बहुत चालाक था, जयवीर को कहने लगा आप मुझे उसके घर तक छोड़ आओ जहां पर आलू बिक रहे हैं । जयवीर उसके साथ चल पड़ा व्यापारी ने पूरे खेत के आलू का भाव 50000 रुपये में तय किया और भाव तय करने के बाद 10000 रूपये एडवांस में दे दिये और बाकी की पेमेंट 10 दिन बाद दे दूंगा ऐसा कहकर आलू ले गया।

 आलू बेचने वाले इंसान को विश्वास हो गया हो गया कि उसने 10000 एडवांस में दे दिए और बाकी की रकम भी दे देगा। 
 ऐसे करते करते एक महीना बीत गया अब व्यापारी कोई अता पता नहीं था।जो पता दिया था वह भी सही नहीं था ।आसपास के गांव में भी पता किया कुछ भी पता नहीं चला व्यापारी का और भी लोगों को उसने ठग रखा था ।
 अब रतन ने पूरे गांव में यही बात फैला दी कि मेरे आलू बिकवाने में जयवीर का हाथ था,मैंने इसके विशवास पर व्यापारी को आलु बेच दिये अगर ये साथ ना आता तो मैं उसके साथ उधार ना करता।
अब रतन ने  गांव में पंचायत कर लोगो को इकट्ठा किया और पंचायत ने सारी बात सुनकर जयवीर को बाकी की रकम 40000 देने का फैसला सुनाया। अब दंड देना पड़ा उसका का दोष सिर्फ इतना था कि वह वयपारी के साथ गया था।
 जब दंड वाली बात उसकी औरत ने सुनी तो बहुत दुखी हुई ।और बहुत रोईं  हमारा क्या कसूर था जो यह दंड हमें आज देना पड़ा। यह बात आज से 30 साल पहले की है ।जब 40000 की कीमत बहुत होती थी । जयवीर का हाथ पहले से ही बहुत तंग था । वह अपने परिवार का पालन पोषण बहुत ही मुश्किल से करता था। 
भगवान् के घर देर है, पर अंधेर नही । कुछ दिन बाद दंड लेने वाले आदमी की भैंस खेत में घास चरने के लिए छोड़ रखी थी । अचानक भैंस  की गिरने की आवाज आई।  कुछ देर तक तो समझ में नहीं आया पर थोड़ी देर बाद पता चला शायद किसी सांप ने काट लिया था भैंस को।  जब तक डॉक्टर देखने आया तब तक भैंस मर चुकी था ।भैंस की कीमत 50,000 तक की थी, जो बहुत दुध देती थी ।
 जयवीर के ऊपर दंड लगाया और भगवान ने भैंस  मरने का दंड रतन को दे दिया घर से दुध भी गया और भैंस भी गई।
अब गांव में सबकी जुबान पर यही बात थी कभी किसी  बेकसूर को इतनी सजा मत दो।अगर किसी की दुआ में ताकत होती है तो बददुआ में उससे भी ज्यादा होती है। 

कहानी से शिक्षा ...☆☆☆☆
परमात्मा सब का हिसाब किताब यहीं पर कर देता है ,इसलिए कभी किसी गरीब के बच्चों का मुंह की रोजी रोटी मत छीनो। ऊपर वाला पता नहीं क्या सजा दे देता है।
 हमेशा भगवान् से डरो लोगों से नही ।
यह एक सच्ची कहानी है मेरी अपनी आखों देखी सिर्फ कहानी में पात्रों के नाम बदले हुए हैं। 
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Hindi motivationl story:-

Tittle:- (second story )

लालच का अंत:-

हम सभी राजा मिदास की कहानी बहुत अच्छे जानते हैं,उसके पास धन दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन वह फिर भी और अधिक सोना और धन दौलत चाहता था। उसने सोने को खजाने में जमा कर दिया था ,और हर रोज उसे गिना करता था ।

एक दिन राजा खजाने को देख रहा था ,तो एक अजनबी कहीं से आया और बोला तुम मुझसे कोई एक वरदान मांग सकते हो।जो तुम्हें दुनिया में सबसे ज्यादा खुशी दे ,राजा बहुत खुश हुआ और उसने कहा मैं जो चाहता हूं  वो सब मुझे मिल सकता है। अजनबी बोला हा ,मै आपको वरदान दे सकता हूँ....!

राजा बोला मैं चाहता हूं ,मै जिस चीज को हाथ लगाऊ वो सोने की बन जाए 
अजनबी ने पूछा क्या तुम यह सब सोच समझकर कह रहे हो, राजा ने कहा हाँ मैं ये सोच समझकर कर बोल रहा हूँ।
अजनबी बोला कल की सूरज की पहली किरण के साथ ही तुम्हें हर चीज को छुने से सोना बनने की ताकत मिल जाएगी ।राजा को लगा एक बार तो कि शायद वह कोई सपना देख रहा होगा।
यह सच नहीं हो सकता, लेकिन अगले दिन जब राजा नींद से उठा तो उसने अपना पलंग छुआ और वह सोने का बन गया
यह वरदान साबित होने लगा राजा ने जिस चीज को छुआ वही सोना बन गई ,उसने खिड़की के बाहर खेलते हुए अपनी नन्ही बच्ची को खेलता पाया, उसने अपनी बेटी को यह अजूबा दिखाना चाहा ,सोचा कि वह बहुत खुश होगी। लेकिन बाहर जाने से पहले उसने एक किताब पढ़ने की सोची उसने जैसे ही छुआ वह सोने की बन गई।
वह किताब को पढ़ ना सका, फिर वह नाश्ता करने बैठा जैसे ही उसने फलों और पानी के गिलास को छुआ वो सब सोने के बन गए।
उसकी भूख बढ़ने लगी और बैठकर सोचने लगा मैं सोने को खा नहीं सकता और किसी भी वस्तु पी नहीं सकता।
ठीक उसी समय राजा की बेटी दौड़ती हुई आई उसने अपने बाहों में भर लिया और वो सोने की मूर्ति बन गई।

अब राजा के चेहरे की सारी खुशी गायब हो गई थी।
राजा सिर पकड़ कर रोने लगा, और वरदान देने वाली अजनबी से फिर प्रार्थना कि मुझे यह सब नहीं चाहिए ।अजनबी प्रकट हुआ...उसने राजा से पूछा क्या हुआ हर चीज को सोना बना देने की अपनी ताकत से खुश हो ।

राजा ने बताया कि मैं दुनिया से सबसे दुखी इंसान हूँ। राजा ने उसे सारी बात बताई अजनबी ने पूछा अब तुम क्या पसंद करोगे अपना भोजन और प्यारी बिटिया या सोने के ढेर।
राजा ने अजनबी से माफी मांगी
और कहा ,मैं अपना सारा धन सोना  सब छोड़ दूंगा, पर मेहरबानी करके मेरी बेटी मुझे वापस लौटा दो, क्योंकि उसके बिना हर चीज़ मेरी मूल्यहीन हो गई है ।
अजनबी ने राजा से कहा तुम पहले से अघिक बुद्धिमान हो गए हो
और अब उसने अपने वरदान को वापस ले लिया।
राजा को अपनी बेटी फिर से मिल गई और उसे एक ऐसी सिख मिली जिसको राजा जिंदगी भर नहीं भूल पाया।

Moral of the story...........

इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि किसी भी चीज का अधिक लालच मुसीबत में भी डाल सकता है धन से अगर सारी खुशियां होती तो शायद कोई इतिहास का राजा दुखी ना होता ।

धन सब कुछ नहीं होता कई बार हमारे लिए इच्छा पूरी ना होना ना पूरा होने से बड़ा दुख बन जाता है।

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TITTLE:- (thrad story 




चोर के प्रति सहानुभूति:-
महावीर बहुत सच्चे  नेक दिल इंसान था ।उसके पास गांव में सबसे ज्यादा जमीन थी ,पर उसके अंदर ज्यादा जमीन होने का कभी कोई घमंड नहीं था ।
वह बहुत ही नेक दिल और गरीबो का साथ देने वाला व्यक्ति था। उसके पास तीन बेटे थे इन तीनों बेटों की नेचर उससे बिल्कुल अलग थी एक दिन महावीर अपने गांव खेत में 4:00 बजे उठकर सैर करने के लिए चल दिया । और वह खेत में जाकर देखता है ,कि एक आदमी उसके खेत में अनाज की चोरी कर रहा है और चोर ने एक बोरी अनाज की भर ली और ज्यादा वजन होने के कारण उसे अकेला उठा नही पाया, शायद कोई आ जाए और इसे उठााने मेरी मदद कर दे। जब खेत का मालिक वहां पहुंचा तो चोर देखकर घबरा गया..!! 

चोर अब जोड़कर खड़ा हो गया खेत मालिक के सामने।  मालिक बोला डर मत चल में तेरी मदद करता हूँ बोरी उठाने में।  चोर यह रूप देखकर रोने लग गया और खेत मालिक के पैर पकड़ लिए। लेकिन महावीर बहुत दयालु किस्म के इनसान था ।चोर को बोला तु अपने घर जा और तेरा नाम कभी किसी को नही बताउंगा।

 चोर ने कभी सोचा नहीं था कि कोई इंसान ऐसा भी हो सकता और कोई होता तो शाायद गााँव में पंचायत करके दंड देने की बात करता पर महावीर ने पर ऐसा नहीं किया । 

महावीर ने उसकी मदद की और घर जाने दिया, और कहा जल्दी जा कहीं मेरे बेटे ना तुझे देख लें। शायद वो तुझे ना बक्से और उस कुछ दिन बाद महावीर ने चोर के घर गेहूं की दो बोरी उसके घर भिजवाई बिना किसी को बताये। 

चोरी करने वाला आदमी जिंदगी भर महावीर का एहसानमंद रहा । महावीर ने सारी बात अपने बेटों को ऐसे कह कर बताई  कि सुबह उठने की आदत डाल लो आज तुम्हारे खेत में कोई अनाज की चोरी कर रहा था। पर महावीर ने सारी जिंदगी उस चोर का नाम नहीं बताया। अपने बेटों के पूछने पर भी बस इतना बताया कि आज खेत में चोरी हुई है ।
उसके बेटों ने बहुत बार पूछा कि उसका नाम बता दो ,पर महावीर ने चोर को वचन दिया था मैं कि कभी किसी को तेरा नाम नहीं बताऊंगा। महावीर के अंदर एक ऐसी भावना थी कि चोरी कोई मजबूरी में ही करता है। कभी किसी का मन चोरी करने को नहीं करता, क्योंकि कोई इंसान मजबूर होकर ही खासकर खाने का समान जब भूखा मरता है ।तभी वह चोरी के रास्ते पर चलता है।चोर के प्रति ऐसी  इंसानियत बहुत कम लोगों में देखने को मिलेगी।  ज्यादातर लोग चोर को चोरी करते देखकर मार पिटाई पर उतर आते हैं ।उसकी भावना की उसकी बुरी परिस्थिति को समझने की कोशिश नहीं करते।

महावीर जैसे लोग बहुत कम देखने को मिलेंगे। महावीर एक अच्छा इन्सान था। गांव के लोग उसे हीरा कहकर बुलाते थे, महावीर के पूरे परिवार की समाज में बहुत इज्जत थी और भगवान की दया से बहुत तरक्की कर ली है उसके बच्चों ने, अब वह गांव छोड़कर किसी शहर में आलीशान बंगले में रहते हैं। उनके पास आज किसी प्रकार की कमी नहीं है ।

यह एक सच्ची कहानी है मेरी अपनी आखों देखी। चोर की कुछ तो मजबूरियां रही होंगी चोरी करने की पर महावीर के वादे और इंसानियत ने उसको जीना सिखा दिया।

कहानी से शिक्षा (moral of the story ....)
अगर आप किसी की मदद करते हैं तो भगवान् आपकी मदद खुद करेगा। ⚘⚘⚘⚘⚘⚘

Fourth story 
TITTLE:-

 मनुष्य अपना भाग्य खुद बनाता है......!!

एक बार एक गुरु जी अपने सभी बच्चों को समझा रहे थे कि इंसान का भाग्य से अपने हाथ में होता है.जैसा आप सोचते हो जैसै आप कर्म करते हो वैसे ही आप बन जाते हो। यह जो कदुरत है हम सभी को समान अवसर देती है, लेकिन यह आप पर निर्भर करता कि आप कौन सा अवसर चुनते हो और कैसे किसको इस्तेमाल करते हो। उदाहरण के लिए गुरु जी ने तीन कटोरे लीये और एक में आलू दूसरे में अंडा तीसरे में बर्फ का टुकड़ा डाल दीया अब तीनों कटोरे में पानी डाल कर उनको चूल्हे पर बनने के लिए रख दिया। ऐसे में तीनों बरतनों का पानी गर्म होने लगा और तीनों चीजें तेजी से उबलने लगी। सभी बच्चे यह सब आश्चर्य पूर्वक देख रहे थे। उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। 15 मिनट बाद जब तीनों बर्तन उबाल आने लगा सभी बर्तनों को नीचे उतारा आलू और अंडे को बाहर निकाला अब सभी बच्चे तीनों को गौर से देखने के लिए कहा गया,लेकिन कोई भी बच्चा समझ नहीं पा रहा था कि यह क्या हो रहा है। अंत में गुरू जी ने बच्चों को समझाया और उनको छुने  के लिए बोला जब बच्चों ने आलू को हाथ लगाया तो पाया आलू पहले से काफी कठोर हो गया था,लेकिन पानी में डालने से पहले वह बहुत ही नर्म था ।अन्डे को उठाया तो जो अंडा पहले बहुत नाजुक था,अब वह कठोर हो गया था। और जो बर्फ का टुकड़ा बहुत बड़े पत्थर जैसा था वह पानी बन गया। उसने तो गर्म होकर अपना रंग रुप ही बदल लिया और वह बर्फ से पानी बन गई। गुरूजी ने समझाया हमनें तीनों अलग-अलग चीजों को एक ही क्रिया से गुजारा था और तीनों को समान रूप से पानी में उबाल आया लेकिन बाहर आने से पहले तीनों चीजें एक जैसी नहीं मिली।आलू मुलायम हो गया,अंडा पहले से नरम था वह कठोर हो गया और बर्फ ने तो अपना रूप ही बदल लिया। इसी तरह यही बात हम सब इंसानों पर भी लागू होती है।एक इंसान विपत्ति में अपना धैर्य खो जाता है।और दूसरा बुद्धिमानी का सामना करते हुए अपने लक्ष्य को साकार करता है तो बच्चों भगवान सभी को कुछ बनने का अवसर देता है। सभी के पास सुख और दुख दोनों आते हैं,लेकिन यह पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है कि आप कैसा बनना चाहते हो।किस तरह से अपने जीवन को ढालना चाहते हो। हर इंसान के जीवन में उतार चढ़ाव दोनों आते हैं। कुछ लोग दुख में भी बहुत 9 सीख जाते हैं और कुछ सुख के बाद दुख को सहन नहीं कर पाते।   परस्थिति कैसी भी हो पर जिसने अपने आप को संभाल लिया उसने परिस्थितियों पर काबू पा लिया।

 मेरी इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है की परिस्थिति कितनी भी बुरी हो वह एक दिन जरूर खत्म हो जाएगी। ऐसा कभी नहीं होता कि रात हुई और सुबह ना हुई हो। भगवान् के घर देर है अन्धेर नहीं। 

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Last thoughts.....
अगर आपके अन्दर जुनून और विश्वास है और मेहनत के लिए तैयार हैं, तब आप दुनिया में कोई भी काम कर सकते हो,और कुछ भी हासील कर सकते हो friends ज़िन्दगीं में किसी भी मंज़िल या मुकाम को पाने के लिए सबसे आवश्यक चीज़ आपकी मेहनत और आपका धैर्य है. अगर आप ईमानदारी से मेहनत करते हुए और कभी भी धैर्य ना खोते हुए अपने मंज़िल की तरफ़ कदम बढ़ाते है तो दुनिया की कोई भी ताकत कोई भी अड़चन आपको सफ़ल होने से नहीं रोक सकती. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि जब हमें लगातार मेहनत करने के बाद भी सफलता नही मिलती है तो हम निराश होकर प्रयास करना छोड़ देते है. लेकिन friends आपको कभी भी निराश नहीं होना चाहिए बल्कि ऐसे समय पर आपको एक बार और पूरी ताकत के साथ प्रयास करने की ज़रूरत होती है.

Friends कई बार ऐसा देखा गया है कि हम सही मार्गदर्शन ना मिलने के कारण भी सफलता के मार्ग से भटक जाते है ऐसे समय मे हमे जरूरत होती है, किसी ऐसे व्यक्ति या कोई हमें motivate करे जो हमे सफलता के लिए प्रेरित करते हुए ऊर्जा और उत्साह से भर दे ताकि हम दोबारा से और अधिक जोश तथा जुनून के साथ अपने मंज़िल को हासिल करने के लिए जुट मेेरी इन कहानियों में बस आपको motivate करना है ।





  

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