भगवान् से वरदान मांगने का अनोखा तरीका motivational story in hindi


Hindi motivationl story भगवान् से वरदान कैसे मांगे 

एक गांव में बनिया जाति के पति पत्नी मंदिर में रहते थे। वह दोनों आंखों से अंधे थे ,उनके पास ना तो धन था ना औलाद थी, और वह शिव के बहुत बड़े के भक्त थे।
हर रोज विधि विधान के साथ शिव की पूजा करते थे। चाहे आंधी तूफान आ जाए  लेकिन पूजा करना नहीं छोड़ते थे। एक दिन शिव ने सपने में आकर कहा कि मैं  तुम्हारी भक्ति से बहुत खुश हूं । मैं तूम्हें साक्षात दर्शन दूंगा,आप जो चाहो मुझसे उस दिन वरदान मांग सकते हो।
अब दोनों  पति-पत्नी ने यह बात आपस में एक दूसरे को बताई तो दोनों इस सोच  में पड़ गए हमारे पास ना तो आंखें हैं ना औलाद है ना धन है,और हमें इन तीनों की जरूरत है।
अब किस तरह से भगवान से वरदान मांगा जाए,अब आप बनिये बुद्धि का कमाल देखिए ।
आखिरकार वो दिन आ ही गया जब शिव ने साक्षात दर्शन दिए और वर मांगने को कहा।
मैं तुम दोनों की भक्ति से बहुत खुश हूं और आज आप जो चाहे मुझसे  वरदान मांग सकते हो।
पति पत्नी ने दोनों हाथ जोड़ कर शिव से बोले वैसे तो हम दोनों इस जिंदगी में भी खुश हैं। और अगर आप हमें वरदान देना ही चाहते हो तो हम दोनों अपने पुत्र को सोने के थाल में खाना खाते हुए देखना चाहते हैं...।
एक ही बार में शिव से तीनों वरदान मांग लिये और शिव का वरदान उनको देना पड़ा ।
उनकी तीनों इच्छाएं एक साथ पूरी हो गई ।धन ,पुत्र और आंखें तीनों ही एक साथ मिल गई । इसे कहते हैं बुद्धि का कमाल
और उनकी लगन से की भक्ति हुई भक्ति का फल। अब पति पत्नी तीनों वरदान पाकर मालामाल थे।
तभी कहते हैं जो भी मांगो भगवान से हमेशा सोच समझकर मांगो।
कई बार हम लुटिया लेकर खड़े होते हैं शायद वह पूरा सागर देने को तैयार हो। वो अंतर्यामी और तीनों लोकों का देव है ,वह कुछ भी दे सकता है।

हमारा मांगने का तरीका अच्छा होना चाहिए। बुद्धि के बल पर छोटा और अनपढ़  आदमी भी बहुत बड़ा काम कर सकता है।

Moral of the story 

*इन्सान की शक्ल चाहे कैसी भी हो लेकिन वह बुद्दी के बल पर बहुत कुछ कर सकता है।

*इन्सान की बुद्धि शक्ल से जयादा महत्वपूर्ण होती है ।

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दुसरी कहानी 

आंतरिक प्रेरणा⚘⚘⚘

एक लड़का फुटबॉल खेलने की प्रैक्टिस करने लगातार आ रहा था ,लेकिन वह कभी टीम में शामिल नहीं हो सका।जब वह प्रैक्टिस करता तो उसके पिता जी मैदान के किनारे में बैठकर उसका इंतजार करते रहते थे । यह हररोज ऐसे ही अपने पिता को साथ लेकर आता था । मैच शुरू हो गये और वह लड़का 4 दिन तक प्रेक्टिस करने नहीं आया ।वह क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल मैचों के दौरान भी नहीं देखा, लेकिन वह लड़का फाइनल मैच के दिन आया और उसने कोच पास जाकर कहा आप मुझे हमेशा रिजर्व खिलाड़ियों में रखा और कभी मुझे टीम में खेलने नहीं दिया,लेकिन कृपया करके आज मुझे खेलने दे। कोच ने कहा बेटा मुझे बहुत दुख है,मैं तुम्हें मौका नहीं दे सकता टिम मैं तुमसे बेहतर खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं। इसके अलावा यह फाइनल मैच है हमारे स्कूल की इज्जत दाव पर लगी है। मैं तुम्हें मौका देकर खतरा मोल नहीं ले सकता। लड़के ने बहुत मिन्नते करते हुए कहा सर मैं आपसे वादा करता हूं और मेरा विश्वास है कि मैं आपको जीत दिला कर दिखाऊंगा। मेरी आपसे विनती है कि मुझे खेलने दे ,कोच ने इससे पहले लड़के को कभी इस तरह विनती करते हुए नहीं देखा था। उसने कहा ठीक है बेटा जाओ खेलो लेकिन याद रखना मैंने यह निर्णय अपने ही बेहतर फैसले के खिलाफ लिया है,और स्कूल की इज्जत दांव पर लगी है, मुझे शर्मिंदा ना होना पड़े ।खेल शुरू हुआ और लड़का तूफान की तरह खेला उसे जब भी बोल मिली उसने गोल कर दिया। और वह मैच का हीरो बन गया चारो तरफ उस लड़के की तारीफ हो रही थी। उस लड़के की वज़ह से आज टीम को एक शानदार जीत मिली। खेल खत्म होने के बाद कोच ने उस लड़के को अपने पास बुला कर कहा बेटा मैं इतना गलत कैसे हो सकता हूं ,मैं तुम्हें पहले कभी इस तरह खेलते हुए नहीं देखा। यह चमत्कार कैसे हुआ तू इतना अच्छा कैसे खेला, लड़के ने जवाब दिया आज मेरा पिताजी मुझे खेलते हुए देख रहे थे ।उसने पिछे मुड़कर उस जगह का देखो जहां उस लड़के के  पिताजी बैठे करते थे। लेकिन वहां पर कोई नहीं बैठा उसने पूछा बेटा तुम जब भी प्रेक्टिस करने आते थे तो तुम्हारे पिताजी वहां बैठा करते थे, लेकिन आज मैं वहां पर कोई  दिखाई  नहीं दे रहा है ।लड़के ने उत्तर दिया मैंने आपको यह कभी नहीं बताया कि मेरे पिताजी अंधे थे। चार  दिन पहले उनकी मृत्यु हो गई आज पहली बार वह मुझे ऊपर से देख रहे है।

 इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है अगर हम अंदर से प्रेरणा मिलती है तो वह आंतरिक संतुष्टि होती है। सफलता पाने के लिए अपनी प्रेरणा को पहचाने और  लक्ष्य को हासिल करने का जनुन  होना चाहिए। 

लगातार कोशिश करते रहो एक दिन सफलता जरूर मिलेगी ।

 हमेशा अपने लक्ष्य को याद रखो।

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written by kiran 


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