गायत्री मंत्र की महिमा और रहस्य

गायत्री मंत्र जाप करने का सही समय और विधि विधान👇🏻
गायत्री मंत्र का रहस्य है। गायत्री मंत्र विशेषता एक छंद है इसे वेदमाता भी कहा जाता है। गायत्री मंत्र का जाप आप को लोक ही नहीं परलोक भी दे सकता है। इस मंत्र के जाप से हमें धन, संपत्ति, कीर्ति प्राण, सभी कुछ मिल सकता है और ब्रह्मा लोग भी मिल सकता है। गायत्री मंत्र का अर्थ है यह सर्वव्यापी ज्योति स्वरूप रक्षक प्राण आधार दुखों के विनाशक सुखों के दाता अनंत अपार स्वरूप हे परमात्मा इस संसार को पैदा करने वाले और पालने वाले भजन करता तेज स्वरूप सब पापों को हरने वाले दिव्य रूप वाले देव कुणी ब्रह्मस्वरुप मेरे हृदय में वास करने वाले, मेरे हृदय में ही निवास करो और मुझे ऐसी बुद्धि ऐसे विचार प्रदान करो ताकि मै सही कर्म ही करूं। गायत्री मंत्र का जाप करते समय यह अनुभूति सभी को करनी चाहिए कि वह पृथ्वी से ऊपर उठकर अनंत आकाश में अनंत नक्षत्रों के बीच में खड़ा है। ब्रह्मा का ध्यान करने की यह प्राचीन विधि सर्वोत्तम है। इस विधि को ग्रहण करके मनुष्य सदा के लिए भगवान से अपना संबंध स्थापित कर लेता है।
 महात्मा गांधी जी प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप नियम से करते थे।महात्मा गांधी कहा करते थे मन को लगाकर और चित्त को शांत करके अगर गायत्री मंत्र का जाप किया जाए तो प्रत्येक प्रकार के कष्टों को विनाश होता है।
डॉ राधाकृष्णन ने भी गायत्री मंत्र की महत्ता में कहा था कि गायत्री मंत्र मनुष्य को फिर से नया जीवन देने वाली अनुपम प्रार्थना है।
महर्षि दयानंद स्वामी विरजानंद और स्वामी विवेकानंद सभी ने गायत्री मंत्र की शक्ति को अपने अपने शब्दों में बताया है, रविंद्र नाथ टैगोर ने भी कहा था कि भारत को जगाने वाला गायत्री मंत्र सीधा सा महामंत्र है। गायत्री मंत्र से सुंदर कोई और पदार्थ मैंने अपने जीवन में नहीं देखा महान पुरुषों का ऐसा कहना है कि हमने जो कुछ भी प्राप्त किया है जिसके बाारे मेें हमनें कभी कल्पना भी नहीं की थी। वह सब कुछ हमें गायत्री मंत्र से ही प्राप्त हुआ है।
 पंडित मदन मोहन मालवीय कहते हैं कि गायत्री मंत्र हमें आत्मा को परमात्मा के साथ मिला देता है,और दर्शन भी करा देता है। गायत्री मंत्र मन को फिर से नया जीवन देने वाली लाजवाब प्रार्थना है। गायत्री मंत्र का निरंतर जाप रोगियों का अच्छा करने और आत्मा की उन्नति के लिए उपयोगी है। गायत्री का स्थिर चित्त और शांत हृदय से किया हुआ जाप आपत्ति काल के कष्टों को दूर करने का प्रभाव रखता है। गायत्री मंत्र से बुद्धि पवित्र होती है, ईश्वर का प्रकाश आत्मा में आता है। इस प्रकार में असंख्य आत्माओं को बंधन से ऋण मुक्त होकर हम गायत्री में रम जाते है। इस मन्त्र मे भक्ति भाव उत्पन्न करने की शक्ति है साथ ही वह भौतिक अभावों को दूर करती है। जो ब्राह्मण गायत्री जाप नहीं करता वह अपने कर्तव्य धर्म को छोड़ने का अपराधी होता है। गायत्री मंत्र का जाप इतना सरल और आसान होता है कि वह एक ही सांस में उसका उच्चारण किया जा सकता है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी कहते हैं मैं लोगों से कहता हूं कि कोई लंबी साधना करने की इतनी जरूरत नहीं इस छोटी सी गायत्री की साधना करके देखो गायत्री का जाप करने से बड़ी बड़ी सिद्धियां मिल जाती हैं। यह मंत्र छोटा है,और इसकी शक्ति बड़ी भारी है। जगतगुरु शंकराचार्य जी का कथन है गायत्री महिमा का वर्णन करना बलबुद्धि का होना एक महान कार्य है, जिसकी तुलना संसार के और किसी काम से नहीं हो सकती। अतः प्राप्ति करने की दिव्य दृष्टि जिस बुद्धि से प्राप्त होती है उसकी प्रेरणा गायत्री द्वारा होती है। गायत्री मंत्र भगवान् का अवतार है जो कष्टों को नष्ट करने और ऋतु के अति वर्धन के लिए हुआ है। गायत्री का अभिप्राय बुद्धि को काम रुचि से हटाकर रामरूची में लगा देना है। जिसकी बुद्धि पवित्र होगी वही राम को प्राप्त कर सकेगा। गायत्री पुकारती है कि बुद्धि में इतनी पवित्रता होनी चाहिए कि वह राम को काम से बढ़कर समझे, गायत्री मंत्र से आध्यात्मिक और भौतिक दोनों प्रकार के लाभ मिलते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में गायत्री मंत्र का जाप करने से चित्त शुद्ध होता है, और हृदय में निर्मलता आती है। शरीर निरोग रहते हैं स्वभाव में नंमरता आती है। बुद्धि सूक्ष्म होने से दुर्दशा बढ़ती है,और स्मरण शक्ति का विकास होता है। कठिन प्रसंगों में गायत्री द्वारा देवी सहायता मिलती है, उसके आत्मदर्शन हो सकता है ।संत महात्माओं का कहना है कि गायत्री की कृपा सब के ऊपर नहीं होती जिसके ऊपर ईश्वर की कृपा हो जाए वह धन्य हो जाता है। गायत्री जिसके हृदय में निवास करती है, उसका मन ईश्वर की ओर जाता है विषय विकारों  से हटकर सिद्दि प्रकरण में लगती है। प्रेम आत्मा गायत्री जाप करती हैं परमात्मा की शक्ति ही गायत्री है जो गायत्री को नहीं जपता है वह शुद्ध होकर रहता है, आत्म कल्याण के लिए मन की शुद्धि आवश्यक है। मन की शुद्धि के लिए गायत्री मंत्र अद्भुत है। ईश्वर प्राप्ति के लिए गायत्री जाप को प्रथम शिढी समझना चाहिए। गायत्री की उपासना करना योग का सबसे प्रथम अंग है। जो गायत्री के अधिकारी हैं उन्हें नित्य नियमित रूप से जाप करना चाहिए। गायत्री का जाप अत्यंत आवश्यक है। गायत्री बुद्धि को पवित्र करती है बुद्धि की पवित्रता से बढ़कर जीवन में दूसरा कोई काम नहीं है। इसलिए गायत्री एक बहुत बड़ा लाभ की जननी है। यदि हम भौतिक प्रार्थना गायत्री पर विचार करें तो हमें मालूम होगा कि यह वास्तव में कितना ठोस लाभ देती है। गायत्री हमें फिर से जीवन का स्तोत्र उत्पन्न करने वाली प्रार्थना है। गायत्री मंत्र का जाप और ध्यान करने से बुद्धि की मैल तो हमेशा के लिए दूर हो जाती है, ऐसा शास्त्रों में माना गया है ।और जब और उसका अर्थ ही बुद्धि को सद्बुद्धि की तरफ ले जाना है।
गायत्री मंत्र की महिमा अनंत है,पूर्ण महिमा एक सुधार लेख में लिख पाना संभव नहीं है। गायत्री मंत्र 3 पदों में विभक्त है अतः पहले पद के बाद एक छोटा सा विराम आना चाहिए।तीन भागों में विराम देकर जाप करना चाहिए, तभी इसका फल मिलता है। सुबह और शाम दोनों समय गायत्री की कम से कम एक माला का जप अवश्य करना चाहिए। किसी भी तरह का भीषण संकट हो मेरा दृढ़ विश्वास है शुद्ध और शांत चित्त से गायत्री मंत्र का जाप सब प्रकार के भजन कष्टो को काट देता है। गायत्री मंत्र का जाप कम से कम 21 माला प्रत्येक दिन करनी सबसे उत्तम साधना है।


 आज के मेरे इस लेख में गायत्री मंत्र की महिमा और उसकी रहस्य का वर्णन है ।अगर आपको अच्छा लगे तो अपने चाहने वाले और दोस्तों में जरूर शेयर करें गायत्री देवी बुद्धि की देवी है जो इसका जाप करेगा उसकी बुद्धि जरूर निर्मल और पवित्र होगी जिसके पास बुद्धि है, उसके पास धन अपने आप आ जाएगा अगर बुद्धि ही नहीं है तो धन कमाने का कोई फायदा नहीं हमेशा भगवान से प्रार्थना करो हे देवी अगर आप धन देते हो तो साथ में बुद्धि भी जरूर दें, तभी जीवन में सफलता मिल सकती हैं।

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