सुर्य की उपासना कब और कैसे करे।


सुर्य का परिचय:----
सुर्य कया है और इसकी पुजा कैसे करे:------
स्थूल विज्ञान की दृष्टि से सूर्य एक ऐसा अग्नी पिंड है जो आकाश में अवस्थित अनंत अकाश गंगा में स्पाइरल नामक एक आकाशगंगा के परिवार के लगभग डेढ़ अरब तारों में से एक छोटा सा तारा मात्र है। इसका व्यास लगभग 9 लाख मिल है, अर्थात पृथ्वी की अपेक्षा 110 गुना बड़ा है। उसके परिवार में नौ ग्रह हैं तथा प्रत्येक ग्रह में अनेक उपग्रह है बुध, शुक्र और पृथ्वी का एक-एक चंद्रमा है। मंगल के दो बृहस्पति के 12 ,शनी के 9, वर्ण के पांच, हरीग्रह के दो, बृहस्पति के 12 शनि के 9 वर्णों के पांच हरि ग्रह के दो प्लूटो इनके अतिरिक्त हजारों छोटे ग्रह तथा अन्य अगणित धूमकेतु पुच्छल तारे इस शुक्रवार में शामिल हैं। वह सब सूर्य की प्रबल आकर्षण शक्ति में जकड़े हुए हैं। उसकी परिक्रमा करते रहते हैं अपने सारे परिवार को लेकर सूर्य स्पाइरल आकाशगंगा की परिक्रमा करता है। इस एक परिक्रमा में उसे 25 करोड़ वर्ष लग जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार जब से सूर्य पैदा हुआ है तब से अब तक यह 16 ऐसी परिक्रमा कर चुका है। सूर्य एक ऐसा देवता है जिनके साक्षात दर्शन हमें हर रोज होते हैं। इन को जल देने और पूजा करने के साथ ही दूसरे प्रत्यक्ष देवता चंद्रमा की भी पूजा हो जाती है ।
सूर्य को सुबह जितनी जल्दी हो सके जल देना चाहिए इसका उत्तम लाभ होता है जिसके पास समय है और शास्त्र का ज्ञान भी रखते हैं उन्हें हर रोज आदित्य हृदय स्रोत का 3 बार पाठ करके उसके बाद सूर्य को जल देना चाहिए।
ऐसा माना जाता है भगवान शिव बहुत भोले हैं और बिना कुछ सोचे समझे अपने साधकों को वरदान देते रहते हैं। इस प्रकार भगवान सूर्य भी अपने भक्तों के प्रति इतना भोलापन रखते हैं कि पहली बार में ही अपनी प्रशंसा प्रदर्शित कर देते हैं।
समस्त वेदों और सभी उपनिषदों तथा पुराणों के अनुसार भगवान सूर्य को साक्षात परब्रह्मा के रूप में प्रतिष्ठित माना गया है।
भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था सूर्य ही मन्त्रमय है।
सूर्य ही तीनों लोको के चौदह भवनों के स्वामी हैं। सूर्य से बड़ा कोई देवता नहीं है और यह समझ लो कि सूर्य ही साक्षात प्रभु है।

सुर्य  को अर्घ्य दान कैसे करे :-----

इस पृथ्वी मंडल पर रहने वाले जीवो का सूर्य के साथ सबसे बड़ा संबंध है सूर्य के दर्शन और सूर्य देवता की कृपा से आंखों में ज्योति आती है। हमारी बुद्धि में प्रकाश आता है। बिना सूर्य की शक्ति की आंखें कुछ कर ही नहीं सकती।
अतः भगवान सूर्य को अर्घ्य देना अपने अंतकरण और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत ही लाभदायक है। भगवान सूर्य थोड़ी से जल मात्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं अगर मैं आसान शब्दों में आपको समझाऊं तो यह भगवान शिव का ही रूप है।

सूर्य को जल देना के लाभ:----

प्रातः काल की बेला में सूर्या के प्रतिबिम्ब को तलाबो तथा नदियों में देखना पश्चिमी देशों में बहुत ज्यादा लाभदायक माना गया है।
वहां के वैज्ञानिक कहते हैं ऐसा करने से हमारे नेत्रों को मोतियाबिंद आदि रोगों से बचाया जा सकता है। भारतीय ग्रंथों के अनुसार सूर्य को जल देने का विधान आदि काल से चलता आ रहा है इसका क्रम इस प्रकार है सूर्योदय के समय एक लोटे में जल भरकर सूर्य की ओर मुख करके खड़े हो जाएं लौटे की स्थिति छाती के बीच में रहनी चाहिए और अब धीरे-धीरे जल की धारा को छोड़ना शुरू करें ।लौटे के ऊपर अपनी दृष्टिपात करने से आप सूर्य के प्रति बिंदु रूप में देखेंगे उस बिंदु प्रतिमा में ध्यान पूर्वक देखने से आपको सप्तवर्ण वलय ( न्युटन रिंग) देखने को मिलेगा।

जल पात्र तांबे का हो तो अति उत्तम रहेगा उसके उत्तर किनारे पर शब्द भरवलिया अधिक सूरज दिखाई देंगे इस प्रकार तेज वर्तक तथा नेत्रों को लाभ करने वाली शीतल समय रस्मों को सेवर करने का महा ऋषि सूर्य को जल देने वाला साधक जन पूरित अंजलि लेकर सूर्य विमुख खड़े होकर जब जल को भूमि पर कराता है तो नवोदित सूर्य की सीधी भर्ती वैकेंसी आने बुद्धि अनियमित वह जल राशि मस्तक से लेकर पांव तक साधक के शरीर के समान सूत्र में गिरती हुई सूर्य गिरने से उत्पन्न रंगों के प्रभाव को ऊपर से नीचे तक समाज शरीर में प्रभावित कर देती है हमारे वेदों के अनुसार पूर्व मुख्य उगते हुए सूर्य के सामने शाम को पश्चिम में कुत्ते को सूर्य के सामने खड़े होकर सूर्य को जल देने का विधान है इस प्रकार सूर्य को जल देने से हमारी सभी प्रकार की मनोकामना पूरी होती हैं और कई तरह की बीमारियों से भी हमें छुटकारा मिल सकता है जैसे है जा निमोनिया चेचक आदि घर तक दारु गरम जल में खूब उड़ने वाले पर नष्ट नहीं होते वह प्रातः काल सूर्य किचन में पृथ्वी पृथ्वी अल्ट्रावायलेट किरणों से शीघ्र नष्ट हो जाते है।

सूर्य की दिन के तीन प्रहर की साधना विशेष रूप से फलदायी होती है। 

1. प्रातःकाल के समय सूर्य की साधना से आरोग्य की प्राप्ति होती है। 
2. दोपहर के समय की साधना साधक को मान-सम्मान में वृद्धि कराती है। 
3. संध्या के समय की विशेष रूप से की जाने वाली सूर्य की साधना सौभाग्य को जगाती है और संपन्नता लाती है

सूर्य के इन मंत्रो से पूरी होगी आपकी
हर मनोकामना :-----


सूर्य की साधना में मंत्रों का जप करने पर मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती है। सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हर तरह की बीमारी और जीवन से जुड़े अपयश दूर हो जाते हैं। सूर्य के आशीर्वाद से आपके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होता है। जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता दिलाने वाले सूर्य मंत्र इस प्रकार हैं - 

1.एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।

2. ॐ घृणि सूर्याय नमः।।

3. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पतेए अनुकंपयेमां भक्त्याए गृहाणार्घय दिवाकररू।।

सूर्य देव को प्रसन्न करने के उपाय-

- तांबे के लोटे में जल लें.

- उसमें लाल फूल, चावल डालें.

- प्रसन्न मन से सूर्य मंत्र का जाप करते रहें.

- भगवान सूर्य को अर्घ्य दें.

- अर्घ्यदान से भगवान ‍सूर्य प्रसन्न होंगे.

सूर्य पूजा के नियम-

- रोजाना सूर्योदय से पहले शुद्ध होकर स्नान कर लें.

- इसके बाद सूर्यनारायण को तीन बार अर्घ्य देकर प्रणाम करें.

- संध्या के समय फिर से सूर्य को अर्घ्य देकर प्रणाम करें.

सूर्य देव की कृपा से मिलेगी हृदय रोग से मुक्ति-

- जल में लाल फूल डालकर सूर्यदेव को अर्पित करें.

 सूर्य देव को गुड़ का भोग लगाएं, लाल चन्दन की माला अर्पित करें.  रविवार को सूर्यदेव का पूजन कर पायें उत्तम स्वास्थ्य
अगर आप चाहते हैं हृदय रोग, नेत्र रोग, पीलिया और कुष्ठ रोग जैसे असाध्य रोगों से मुक्‍ति तो रविवार को सूर्यदेव की पूजा में उनके कुछ खास मंत्रों का जाप करें।

साक्षात भगवान् शिव का रूप है सूर्य देव :-----

हिन्दू धर्मानुसार केवल सूर्य देव ही ऐसे देव हैं जो साक्षात दिखाई पड़ते हैं। ऐसी मान्‍यता है कि रविवार को इनकी विधि-विधान से पूजा करने से सफलता, मानसिक शांति और शक्ति तो प्राप्‍त होती है अच्‍छी सेहत का भी वरदान मिलता है। सूर्य की पूजा में गायत्री मंत्र के अतिरिक्त नीचे लिख कई और  मत्रों का भी प्रयोग किया जाता है। सूर्य को यश का कारक मानते हैं, जिनकी पूजा से मान सम्मान में वृद्धि होती है। रविवार से सूर्य मंत्रों का जाप आरंभ करना अत्‍यंत लाभकारी होता है। नीचे दिए मंत्रों का अपनी इच्‍छित कामना को पूर्ण करने के लिए श्रद्धा पूर्वक स्‍मरण कीजिए।  

सूर्य के लाभकारी मंत्र:----

1: सूर्य वैदिक मंत्र – ऊँ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च । हिरण्य़येन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन।

2: सूर्य के लिए तांत्रोक्त मंत्र – ऊँ घृणि: सूर्यादित्योम, ऊँ घृणि: सूर्य आदित्य श्री, ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय: नम:, ऊँ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नम:।

3: सूर्य नाम मंत्र – ऊँ घृणि सूर्याय नम:।

4.सूर्य का पौराणिक मंत्र – जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम। तमोsरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोsस्मि दिवाकरम।

5: सूर्य गायत्री मंत्र – ऊँ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात।

हृदय रोग, नेत्र व पीलिया रोग एवं कुष्ठ रोग तथा समस्त असाध्य रोगों को नष्ट करने के लिए सूर्य देव के इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

6: ऊँ हृं हीं सः सूर्याय नमः

सुर्य की महिमा:----
सूर्य की शप्त किरणें अल्ट्रावायलेट और अल्ट्रावायलेट किरणें स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ी उपयोगी साबित हुई हैं। जल के साथ अपना मुख पूर्व की ओर कर लीजिए और भावना कीजिए कि सूर्य की तेजस्वी अरोग्यमयी किरणें आपके शरीर में चारों ओर से प्रवेश कर रही हैं। रविवार को उपवास रखना सूर्या की तेजस्विता एवं बलदायिनी शक्ति का आह्वान है। यह उपवास हमारे शरीर की कांति और आत्मिक तेज को बढ़ाने वाला सिद्ध होता है। आपका चित जब भी व्याकुल हो घबराहट या किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो आप संकट हो तो आप निम्न मंत्र 108 बार पढ ले ,ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।।
आप को हर काम मे सिद्दि स्वयं अनुभव करेंगे।

रविवार के दिन कैसे पुजा करे:---

रविवार का दिन सूर्य देव की स्तुति के लिए सबसे जयादा समर्पित है. रविवार का व्रत रखने से भगवान भास्कर शीघ्र प्रसन्न होते हैं. अगर आपके मन में कई सारी इच्छाएं और मनोकामनाएं हैं, तो आप रविवार का व्रत कर सकते हैं. सूर्य देव की कृपा के लिए रविवार का व्रत सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि ये व्रत सुख और शांति देता है. पौराणिक धार्मिक ग्रंथों में भगवान सूर्य के अर्घ्यदान का विशेष महत्व बताया गया है. रविवार का दिन सूर्य उपासना के लिए सर्वोत्तम है. ऐसा माना जाता है कि रविवार के दिन सूर्य की पूजा विशेष फलदाय़ी होती है. इससे मान-सम्मान और तेज की प्राप्ति होती है.

व्रत करने के लाभ और नियम ----
अगर संभव हो तो आप रविवार को एक समय भोजन करें और इस दिन नमक का सेवन ना करें, तो यह वरत आपके लिए विशेष लाभदाई साबित होगा। इस दिन भोजन करने से पहले सुगंधित अगरबत्ती जलाकर सूर्य देव के आदित्य हृदय कवच का पाठ करें तो आप स्वयं अनुभव करें कि आपकी कई बाधाओं से मुक्त हो रहे हैं तथा बीमारियों से दूर हो रहे हैं। नेत्र संबंधी सभी रोगों को रोकने के लिए आप आदित्य हृदय स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करें और अमबर की माला को धारण करे।
प्रति रविवार को उपवास करें और तामसिक भोजन ग्रहण ना करें, केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें। इस व्रत में नमक का प्रयोग बिल्कुल ना हो। रविवार का व्रत रखने से आप और आपका परिवार सभी प्रकार से साधन संपन्न होगा एवं समय-समय पर धन की प्राप्ति होगी। सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए नित्य उन्हें लाल चंदन लाल और केसर युक्त जल से समर्पण करें। ऐसा करने से आपकी हर मनोकामना बहुत जल्दी पूरी होगी, क्योंकि सूर्य भगवान कोई और नहीं यह हम सबको शिव भगवान् सुर्य बनकर साक्षात दर्शन देते है। शिव भगवान हमारे पूरे ब्रह्मांड परमधाम की एक ऐसी शक्ति है जो तीनों लोकों के मालिक हैं, उन्ही की मरजी से ये सारा संसार चलता है ।

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